ऐसे में खुद को मजबूत बनाना एक सफल रणनीति है, जिसे मनोवैज्ञानिक प्रतिफल संवेदनशीलता (रिवॉर्ड सेंसिटिविटी) कहते हैं। खुशी तलाशने की इच्छा एक ताकत है, जिसे हम विकसित कर सकते हैं। हमें बस अपनी खुशी वाली कोशिका को मजबूत बनाना होगा। अनुभवों का आनंद लेने की हमारी क्षमता भी इस पर ही निर्भर है। लगभग हर इन्सान अपनी सकारात्मक भावनाओं को समझने व आनंद लेने के लिए खुद को प्रशिक्षित कर अपनी रिवॉर्ड सेंसिटिविटी बढ़ा सकता है। यह अवसाद और चिंताग्रस्त लोगों के लिए भी सच है, जो आनंद के लिए जूझते हैं। जब मानसिक स्वास्थ्य उपचार की बात आती है, तो चिकित्सक अपने रोगियों के नकारात्मक लक्षणों को कम करने पर ध्यान केंद्रित करते हैं। लेकिन ज्यादातर लोगों को दर्द कम करने के साथ अपनी खुशी बढ़ाने की भी जरूरत है। रिवाॅर्ड सेंसिटिविटी बढ़ाने के लिए आप व्यायाम आजमा सकते हैं। जब तक यह मददगार हो, इसे रोजाना करें, लेकिन कम से कम एक हफ्ते तक इसे करने का प्रयास करें। प्रतिदिन ऐसी गतिविधि की शुरुआत करें, जो आपको खुश करे। इससे सकारात्मक अनुभवों को टालने की संभावना कम हो जाएगी। यह पसंदीदा स्नैक खाने, उपन्यास के कुछ पन्ने पढ़ने या किसी मित्र से आमने-सामने बैठकर या वीडियो पर बात करने जैसा छोटा काम भी हो सकता है। मनोवैज्ञानिक सकारात्मक भावनाओं को पहचानने और उनमें डूबने की प्रक्रिया को 'स्वाद लेना' कहते हैं। डॉ. लाफ्रेनियर के अनुसार, आनंद लेने से किसी घटना के नकारात्मक पहलुओं से मुकाबला करने में भी मदद मिलती है।
सकारात्मक भावनाओं को बढ़ाने के लिए अपनी खुशी की शब्दावली का विस्तार करें। सामाजिक संवेदनशीलता पर शोध करने वाले कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में मनोचिकित्सा के एसोसिएट प्रोफेसर चार्ली टेलर कहते हैं, अपनी भावनाओं को व्यक्त करना लुभावना हो सकता है। लेकिन आपको सबसे ज्यादा खुशी किस बात से मिली, यह बताने से आप बेहतर महसूस कर सकते हैं, उस खुशी को दूसरे व्यक्ति तक फैला सकते हैं और रिश्ते को भी मजबूत बना सकते हैं। हमेशा खुद को खुश रखें।