पिछले एक महीने में देश के तमाम हिस्सों में और खास तौर से उत्तर भारत में, और उसमें भी खासकर उत्तर प्रदेश में बलात्कार की अनगिनत घटनाएं घटी हैं। लगता है कि अब कुछ भी पढ़ें, कुछ भी सुनें, इसका असर पड़ेगा ही नहीं, पर दूसरे दिन कोई नई घटना घटती है और नए सिरे से दिल पर असर पड़ने लगता है। लोग सोचने के लिए मजबूर हो जाते हैं कि यह क्यों हो रहा है?
समाज में लोगों का मन क्यों और कैसे बढ़ रहा है? हिंसा को बढ़ावा देने वाला माहौल जोर पकड़ रहा है। कानून के हाथ भी कुछ शिथिल पड़ने लगे हैं या यों कहिए कि कुछ को दबोचने के लिए बढ़ते हैं और कुछ को बचाने के लिए। इन घटनाओं का विरोध भी अक्सर सांप्रदायिक चश्मे को लगाकर होता है। बहुत सारे सवाल हैं; जवाब भी बहुत हैं और नए जवाबों की खोज भी बहुत है।