मेरी एक सहकर्मी का तर्क है कि संकल्प इतने बड़े नहीं होने चाहिए कि हम पहले से ही हार मानने लगें। वह कहती है कि इससे बेहतर तो यही होगा कि हम नए साल पर कोई संकल्प लें ही ना। हालांकि मैं ऐसा बिल्कुल नहीं मानती। मुझे नए साल का सुरूर भी पसंद है और संकल्प भी। मुझे यह जानना भी पसंद है कि दूसरे लोग अपने लिए कौन-कौन से संकल्प लेते हैं। मुझे लगता है कि नए साल पर लिए जाने वाले संकल्प यह विश्वास किए बगैर कि आपमें कुछ कमी है, बेहतर बनने का एक तरीका है।
नए साल के संकल्प खुद को एक उपलब्धि का एहसास दिलाने का अवसर हैं। यह अपने भविष्य को वर्तमान में दिया जाने वाला तोहफा है। मैंने उन कार्यों की सूची बना ली है, जिन्हें मैं नए साल पर करना शुरू करने वाली हूं। आज नए साल के पहले दिन मैं अपनी सूची इस उम्मीद के साथ आपसे साझा कर रही हूं कि आप भी खुद में सुधार लाने के लिए खुद को मना लेंगे। यह खुद में सुधार यानी आत्म-सुधार की जो बात है, बड़ी व्यापक है। लेकिन महत्वपूर्ण यह है कि व्यक्ति इसे महत्व देते हुए कितनी और किस तरह कोशिश करता है। कुछ तकनीकें हैं, जो खुद में बदलाव के इच्छुक लोगों के लिए कारगर साबित हो सकती हैं। लेकिन मैं सिर्फ तीन नियमों का पालन करती हूं।
कोई पैमाना साफ हो
आप संकल्प ले सकते हैं, ‘मैं घर पर अधिक खाऊंगा।’ लेकिन यह इतना अस्पष्ट संकल्प है कि आप कभी जवाबदेही तय ही नहीं कर सकेंगे। इसके बजाय अगर आप यह कहें, ‘मैं हफ्ते में पांच बार घर पर खाऊंगा’, तो यह एक बेहतर संकल्प है।
थोड़ा व्यवहारिक बनें
अगर आप यह संकल्प लें, ‘मैं एक महीने तक हर दिन एक घंटा व्यायाम करूंगा’, तो इसमें मुश्किल हो सकती है। जिंदगी है, कुछ काम आड़े आ सकता है। लेकिन अगर आप यह कहें, ‘मैं महीने में दस बार व्यायाम करूंगा,’ तो यह आप निस्संदेह कर सकते हैं।
पसंद भी तो मायने रखती है
मुझे कार्डियो और स्ट्रेच संबंधी कसरतें बिल्कुल पसंद नहीं हैं और अगर मैं इन्हें करने का संकल्प लेती हूं, तो मैं लंबे समय तक इन्हें नहीं ही कर पाऊंगी। लेकिन मुझे योग पसंद है, क्योंकि यह आरामदायक है और शरीर व मन को बेवजह का तनाव नहीं देता। जाहिर है, योग को दिनचर्या में शामिल करने का संकल्प मुझे आश्वस्त बनाएगा।
मेरे संकल्प
तो मैंने एक कागज पर लिखा-
एक महीने में दस बार एक घंटे के लिए योग करूंगी।
इस वर्ष दो बार दांतों के डॉक्टर से मिलूंगी।
दो महीने तक नाखून नहीं चबाऊंगी।
एक पेंटिंग बनाऊंगी।
जिस खतरनाक झूले से मुझे सबसे ज्यादा डर लगता है, उस पर एक बार बैठूंगी।
एक बिल्कुल नया दोस्त बनाऊंगी। (यह सबसे मुश्किल हो सकता है।)
अब मैं इस सूची को मोड़कर अपने से अलग रख देती हूं। इसे मैं बार-बार नहीं देखूंगी। मैं इसे 2025 के अंत में देखूंगी। यह कोई होमवर्क थोड़े है, न ही यह कोई परीक्षा है। एक नई राह है, जिस पर जितना भी चल सकी, वह मेरे लिए उपलब्धि ही होगी।
अगर मैंने सूची सही बनाई होगी, तो 2025 के अंत में इसमें से काफी कुछ मैं कर चुकी होऊंगी। बेशक मैं सब कुछ नहीं कर पाऊंगी। मैंने पहले भी नाखून चबाना छोड़ने की कोशिश की है, लेकिन अब तक छोड़ नहीं सकी हूं। फिर भी मुझे लगता है कि मेरे संकल्प आम तौर पर काम करते हैं। वजह सामान्य है। आप क्या करना चाहते हैं और आप क्या बनना चाहते हैं, इस बारे में सोचने के लिए समय निकालना संकल्प को सिद्ध करने की राह में सबसे मुश्किल हिस्सा है।
अपने संकल्पों को लिखना आपको अपने लक्ष्यों के प्रति सचेत रहने के लिए तैयार करता है। वर्ष के अंत में या तो आपको अपने लक्ष्यों को पाने की संतुष्टि मिलती है या फिर अगर आप ऐसा नहीं कर पाए, तो आत्मचिंतन का अवसर, जो आपको भविष्य में सुधार करने के लिए प्रेरित करता है। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी तरह का दबाव महसूस न करें। अपने संकल्पों पर काम करने के लिए आपके पास पूरा साल पड़ा है। मैंने इस साल की शुरुआत में जो संकल्प लिए थे, कम से कम एक तो पूरा हो ही रहा है और वह था अखबार में अपना लेख छपवाना। ©The New York Times 2025