फिर सुर्खियों में आए भाजपा महासचिव वरुण गांधी का मानना है कि गांधी सरनेम से कुछ समय तक तो लाभ मिल सकता है, लेकिन आपके काम से ही आपको सम्मान मिलता है। आगामी चुनावों में भाजपा की रणनीति के संबंध में हरीश लखेड़ा ने उनसे बातचीत की:-
:- भाजपा में आप सबसे कम उम्र में महासचिव बने हैं। क्या इसकी वजह आपकी पारिवारिक विरासत नहीं?
:- भाजपा नेतृत्व खास तौर पर पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह का यह फैसला देश के युवा वर्ग के प्रति पार्टी की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। मैं 2004 में भाजपा में शामिल हुआ, लेकिन जब तक सांसद नहीं बना, तब तक औपचारिक तौर पर कोई भी पद लेने से हिचकता रहा।
पिछले साल उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में पार्टी के 32 उम्मीदवार ऐसे थे, जिन्हें मेरा प्रत्यक्ष समर्थन प्राप्त था। उनमें से 23 जीत गए, जिससे पार्टी नेतृत्व का मुझ पर भरोसा बढ़ा। जहां तक विरासत की बात है, तो मेरा मानना है कि देश व समाज में आपका आदर नाम से नहीं, बल्कि काम से होता है।
:- कई बार आपकी तुलना आपके चचेरे भाई व कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से की जाती है। इसे आप किस तरह लेते हैं?
:- मेरा मानना है कि राहुल जी से मेरी तुलना जायज नहीं है। वह मुझसे लगभग 10 साल बड़े हैं और शासक दल में रहते हुए राजनीति की लंबी पारी खेलकर अनुभवी राजनेता बन चुके हैं। जबकि मैं अभी पार्टी में अपने पहले दायित्व को निभाने जा रहा हूं। हम भले ही विभिन्न दलों में हों, लेकिन हमारा परिवार तो एक ही है।
:- अब लोकसभा चुनाव जल्दी होने की चर्चा शुरू हो चुकी है। इस चुनावी जंग के लिए भाजपा किस तरह तैयार हो रही है?
:- देश का युवा वर्ग चुनाव को लेकर पहले की तुलना में ज्यादा सक्रिय है। यूपीए सरकार भ्रष्टाचार, कुशासन, महंगाई के चलते अलोकप्रिय हो चुकी है, जबकि भाजपा ने गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ समेत विभिन्न राज्यों में बेहतर शासन दिया है। हमने राजग के शासन में, और राज्यों में भी प्रभावी शासन दिया है। इस बार हम ऐसे उम्मीदवारों को मैदान में उतारेंगे, जो ईमानदार हों और लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरें।
:- पर कर्नाटक में तो भाजपा तीसरे स्थान पर चली गई। इससे पहले उत्तराखंड और हिमाचल में भी वह कांग्रेस से हार गई?
:- हां, कर्नाटक में हम हारे हैं, लेकिन भाजपा और कांग्रेस में अंतर साफ है। कांग्रेस केंद्र में आज भी ऐसी सरकार चला रही है, जिसमें कई केंद्रीय मंत्रियों पर आरोप लग रहे हैं। जबकि भाजपा ने भ्रष्टाचार के साथ कभी समझौता नहीं किया। इसी की कीमत हमें कर्नाटक में चुकानी पड़ी। हमने झारखंड में भी झारखंड मुक्ति मोर्चा के साथ संबंध तोड़ दिए। पूर्व अध्यक्ष नितिन गडकरी ने आरोपों के सामने आने पर निर्दोष होते हुए भी पद त्याग दिया।
:- नरेंद्र मोदी को भाजपा का प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने को लेकर आपकी क्या राय है?
:- प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार तो पार्टी का संसदीय बोर्ड ही तय करेगा, पर जहां तक मोदी जी का सवाल है, तो वह आज राजनीतिक बहस का केंद्र बन गए हैं। कई लोग उनमें आशा की किरण देखते हैं।
:- चर्चा है कि आप अगला लोकसभा चुनाव पीलीभीत के बजाय सुल्तानपुर से लड़ने जा रहे हैं?
:- मैं कहां से चुनाव लड़ूंगा, यह तो पार्टी संसदीय बोर्ड ही तय करेगा। पर सुल्तानपुर का विशेष महत्व है। मेरे पिताजी ने इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया था। वह आज भी वहां के लोगों के दिल पर राज करते हैं, वे लोग मुझे भी वैसा ही प्यार व आशीष देते हैं। मगर, पीलीभीत भी मेरे लिए हमेशा खास रहेगा। वहां के लोगों ने मुझे रिकॉर्ड अंतर से जिताया था।