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ढाका की मंशा: भारत और बांग्लादेश के संबंध अब तक पूरी तरह से पटरी पर नहीं, पूर्वोत्तर पर सतर्कता से सोचना जरूरी

अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: न्यूज डेस्क Updated Mon, 05 Oct 2026 07:23 AM IST

सार

भारत और बांग्लादेश के संबंध अब तक पूरी तरह से पटरी पर आए नहीं हैं, और अब ढाका, तुर्किये के साथ मिलकर सिलीगुड़ी कॉरिडोर के पास ड्रोन फैक्टरी लगाने की योजना बना रहा है। बदलते क्षेत्रीय समीकरणों के बीच नई दिल्ली को पूर्वोत्तर की सुरक्षा के मद्देनजर सतर्कता से सोचने की जरूरत है।
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भारत से तनाव के बीच बांग्लादेश और तुर्किये बढ़ा रहे सहयोग (सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स


दरअसल बोगुरा भारत के बेहद संवेदनशील 'सिलीगुड़ी कॉरिडोर' (जो पूर्वोत्तर राज्यों को शेष भारत से जोड़ता है) के पास है। इसलिए यहां सैन्य और ड्रोन निर्माण बेस का होना भारत के इस मुख्य चोकपॉइंट (अहम और संकरे रास्ते) के लिए सामरिक जोखिम पैदा करता है। इस प्रस्तावित फैक्टरी के पास एक नए एयरफोर्स बेस और अंतरराष्ट्रीय स्तर के हवाई अड्डे को उन्नत करने की भी योजना है, जिसका इस्तेमाल भविष्य में सैन्य गतिविधियों के लिए एक बड़े रणनीतिक हब के रूप में किया जा सकता है।


तुर्किये भारत के पारंपरिक रणनीतिक साझेदारों के दायरे से बाहर है और भारत-तुर्किये के रिश्ते पहले से ही तनावपूर्ण भी हैं। यह वही देश है, जिसने ऑपरेशन सिंदूर के समय पाकिस्तान की मदद की थी। यही नहीं, पाकिस्तान पहले से ही भारत की पश्चिमी सीमा पर तुर्किये के ड्रोन का इस्तेमाल कर रहा है। ऐसे में पूर्व में तुर्किये के सहयोग से बनने वाली बांग्लादेश की बोगुरा ड्रोन फैक्टरी भारत के हवाई-रक्षा संसाधनों पर दबाव डाल सकती है। बांग्लादेश पहले से ही तुर्किये से ड्रोन खरीदता है, लेकिन बोगुरा में ड्रोन फैक्टरी की योजना बांग्लादेश के एक बड़े कार्यक्रम का हिस्सा है।


जनवरी में, बांग्लादेश एयर फोर्स ने बांग्लादेश के अंदर ड्रोन बनाने और उसे असेंबल करने का प्लांट लगाने के लिए चीन की कंपनी 'चाइना इलेक्ट्रॉनिक्स टेक्नोलॉजी ग्रुप कॉर्पोरेशन इंटरनेशनल' (सीईटीसी) के साथ भी एक समझौता किया। चीन और तुर्किये के साथ समझौतों से उसे इंजीनियर, असेंबली लाइन, मेंटेनेंस की स्किल और देश में ही बिना पायलट वाले एयरक्राफ्ट बनाने का अनुभव मिल सकता है। गौरतलब है कि बांग्लादेश में तख्तापलट और नई सरकार के बनने के बाद यहां पाकिस्तान, तुर्किये और चीन का रक्षा व कूटनीतिक दखल तेजी से बढ़ा है।


क्षेत्रीय राजनीति में इसे भारत के खिलाफ माहौल बनाने और सामरिक दबाव बढ़ाने की एक बड़ी कोशिश के रूप में देखा जा सकता है। भारत के लिए असली रणनीतिक सवाल यह नहीं होना चाहिए कि बांग्लादेश आज कितनी क्षमता के ड्रोन बना सकता है, बल्कि यह होना चाहिए कि वह अगले पांच या दस वर्षों में किस स्तर की क्षमता हासिल कर सकता है। बदलते क्षेत्रीय समीकरणों के बीच इसी दीर्घकालिक दृष्टि के साथ नई दिल्ली को अपनी पूर्वी सुरक्षा नीति तैयार करनी होगी।

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