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विकास और युवा: बस्तर में आजादी के बाद से पहली बार तिरंगा स्वागतयोग्य, अर्थपूर्ण तभी जब अंतिम व्यक्ति तक लाभ

Mon, 17 Aug 2026 09:30 AM IST
न्यूज डेस्क अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

कभी नक्सलियों का सबसे मजबूत गढ़ रहे बस्तर में आजादी के बाद से पहली बार तिरंगा फहराया जाना और प्रधानमंत्री मोदी का अपने संबोधन में युवा कार्यबल पर जोर देना स्वागतयोग्य है। लेकिन, विकसित भारत का लक्ष्य तभी अर्थपूर्ण होगा, जब विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
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लाल किले की प्राचीर से पीएम मोदी का 13वां संबोधन - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 80वें स्वाधीनता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से लगातार तेरहवीं बार किया गया संबोधन भारतीय राजनीतिक इतिहास में एक अहम पड़ाव तो खैर है ही, वर्ष 2047 तक देश को विकसित बनाने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य के आह्वान के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।

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उनका भाषण विकास, युवा शक्ति, तकनीक, ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा, आत्मनिर्भरता जैसे विषयों पर केंद्रित रहा। लेकिन, उनके संबोधन में सबसे अधिक जोर देश के युवा कार्यबल पर देखने को मिला, जिनकी औसत उम्र 28.4 वर्ष है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रशिक्षण, युवाओं के लिए निःशुल्क कोचिंग और नई तकनीकी क्षमताओं पर जोर इस बात का इशारा है कि भारत की अगली बड़ी छलांग पारंपरिक उद्योगों से ही नहीं, बल्कि ज्ञान, कौशल और तकनीक से भी जुड़ी होगी।

यह व्यावसायिक प्रशिक्षण, डिजिटल आंत्रप्रेन्योरशिप और अनुसंधान आधारित शिक्षा की ओर नीतिगत बदलाव का संकेत देता है। हालांकि, आंकड़े संरचनात्मक चुनौती भी दर्शातेे हैं, क्योंकि उद्योगों के मानकों के हिसाब से मात्र 45 से 50 फीसदी युवा ही तुरंत नौकरी पाने योग्य माने जाते हैं। ऐसे में, विकसित भारत के लक्ष्य को पाने के लिए हमें शिक्षा और रोजगार पाने की क्षमता के बीच के अंतर को कम करना होगा।
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संभवतः इसे हल करने के लिए ही प्रधानमंत्री के संबोधन में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी), 2020 के विस्तार के जरिये नए संस्थागत ढांचे के निर्माण का संकेत दिया गया। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर प्रधानमंत्री का जोर आज के समय की जरूरत है। रक्षा उत्पादन में वृद्धि और निर्यात की उपलब्धियां बेशक उत्साह पैदा करती हैं, लेकिन आत्मनिर्भरता के लिए भारत को ऐसी अनुसंधान व्यवस्था विकसित करनी होगी, जो लगातार नई तकनीक पैदा करे और इसके लिए अनुसंधान एवं विकास का बजट बढ़ाने की आवश्यकता है।

ऊर्जा सुरक्षा को लेकर परमाणु ऊर्जा क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य भी दूरगामी महत्व का है। लेकिन, 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा के महत्वाकांक्षी लक्ष्य के लिए विकास एवं पर्यावरण के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। नक्सली हिंसा पर काबू की वजह से ही छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के 90 से अधिक गांवों में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर 1947 के बाद पहली बार राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराया गया।

कभी नक्सलियों के सबसे मजबूत गढ़ और आतंक के साये में रहे इन अंदरूनी इलाकों में सुरक्षा कैंपों की स्थापना तथा नक्सलवाद के खात्मे के बाद यह ऐतिहासिक बदलाव स्वागतयोग्य है। प्रधानमंत्री ने जिस विकसित भारत का सपना सामने रखा है, वह तभी अर्थपूर्ण होगा, जब विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और सबको आजीविका, स्वास्थ्य, शिक्षा और न्याय का वास्तविक अवसर मिले। 

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