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गहराता संकट: पश्चिम एशिया में जंग जारी, हूती विद्रोहियों के दखल से खुला नया मोर्चा

अमर उजाला Published by: Pavan Updated Mon, 30 Mar 2026 06:04 AM IST

सार

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच हूती विद्रोहियों के दखल से जहां इस संघर्ष में एक नया मोर्चा खुल गया है, वहीं वैश्विक बाजारों में पहले से ही चल रही उथल-पुथल के और ज्यादा बढ़ने से ईंधन की कीमतों में और बढ़ोतरी होने की आशंका भी बढ़ गई है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI


वर्ष 2014 से ही हूती उत्तर-पश्चिमी यमन पर कब्जा जमाए हुए है, जिसके चलते होर्मुज मार्ग से इतर एक अन्य प्रमुख व्यापारिक मार्ग लाल सागर पर इसका नियंत्रण है। गौरतलब है कि फलस्तीनियों के साथ एकजुटता दिखाते हुए गाजा संघर्ष के दौरान लाल सागर और अदन की खाड़ी से होते हुए स्वेज नहर की ओर जाने वाले मालवाहक जहाजों पर हूती ने लगातार हमला किया था। शनिवार से पहले, जब हूती विद्रोही इस ताजा संघर्ष से दूर थे, तो होर्मुज मार्ग बंद होने के कारण लाल सागर का महत्व और भी बढ़ गया था।


सऊदी अरब ने अपने तेल निर्यात का एक बड़ा हिस्सा लाल सागर के यानबू बंदरगाह की ओर मोड़ दिया था, ताकि वह होर्मुज मार्ग से बच सके। लेकिन, अब जबकि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को शत्रु देशों के लिए बंद कर दिया है, तो ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के फिर से लाल सागर में व्यापारिक जहाजों पर हमले की आशंका बढ़ गई है। इसके अलावा, यह भी ध्यान देने वाली बात है कि हूतियों द्वारा ये हमले तब किए गए हैं, जब अमेरिका और ईरान के बीच परोक्ष रूप से वार्ता शुरू होने की खबरें हैं।


अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संकेत दिया है कि कुछ ही हफ्तों में युद्ध खत्म हो सकता है। खुद ट्रंप ने भी यह संकेत दिया है कि ईरान में उनके प्रशासन ने लक्ष्य हासिल कर लिए हैं, और इशारा किया है कि युद्ध तय समय-सीमा के भीतर समाप्त हो सकता है। ऐसे में, इस संघर्ष में हूती के शामिल होने से शांति वार्ता की उम्मीद धूमिल लग रही है। सबसे अहम बात यह है कि अगर युद्ध खत्म भी हो गया, तो इस युद्ध का असर लंबे समय तक बना रहेगा, क्योंकि आपूर्ति शृंखला में रुकावटें और युद्ध के विनाश का असर जल्दी खत्म होने वाला नहीं है।


जैसे-जैसे अमेरिका मध्यावधि चुनावों की तरफ बढ़ रहा है, ट्रंप प्रशासन के खिलाफ बड़े पैमाने पर नो किंग्स प्रदर्शन बढ़ रहे हैं, जिससे ट्रंप और उनकी पार्टी की चुनौतियां और भी बढ़ सकती हैं। पश्चिम एशिया का संकट जिस ओर बढ़ रहा है, उससे दुनिया एक दीर्घकालिक युद्ध की ओर बढ़ती दिख रही है। अगर वक्त रहते इस आग को नहीं बुझाया गया, तो इसके दुष्परिणाम न केवल पश्चिम एशिया, बल्कि पूरी दुनिया को भुगतने पड़ सकते हैं।
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