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कर्ज के बोझ से गले तक दब चुका पाकिस्तान, खतरे में पूरी अर्थव्यवस्था

कुलदीप तलवार
Updated Wed, 10 Apr 2019 12:56 PM IST
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कर्ज में आकंठ डूब चुका पाकिस्तान - फोटो : File Photo

पाकिस्तान की वर्तमान सरकार की गलतियों और मतभेदी नीतियों को अभी तक पाक जनता सब्र के साथ इसलिए नजर अंदाज कर रही थी कि पिछली सरकारों ने जनता की समस्याओं को हल करने के बजाय अपना सारा समय लूट-खसोट में लगा दिया। पिछली सरकारों के भ्रष्टाचार से तंग अवाम को इस बात की उम्मीद थी कि इमरान खान देश में फैले भ्रष्टाचार, महंगाई व बेरोजगारी को खत्म कर देंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बल्कि हालात और खराब हो गए हैं।

पाक की अर्थव्यवस्था बुरी तरह लड़खड़ा गई है। देश कर्ज के बोझ से दिवालिया होने के कगार पर है। सरकार को अपने पहले साल में 19 अरब का कर्ज चुकाना है। सूद की शक्ल में प्रतिदिन छह अरब रुपये अदा करने पड़ रहे हैं। चालू घाटा बढ़कर नौ अरब रुपये हो गया है। कर्ज चुकाने के लिए सरकार ने सरकारी संपत्तियों को बेचने का फैसला लिया है। लाख कोशिशों के बावजूद अभी तक वह अपने मित्र देशों से व आईएमएफ, विश्व बैंक से कर्जा लेने में विफल रही है। चीन ने अब पाकिस्तान को दिवालिया होने से बचाने के लिए दो अरब डॉलर कर्ज देने का फैसला लिया है।



दूसरी तरफ पाकिस्तान में कर्ज माफ कराने वाले आजाद घूम रहे हैं, जिसने पाक की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर डाला है। वर्ष 2009 से 2015 तक 245 अरब रुपये के कर्ज माफ कराए गए। पिछले 25 साल में 988 से ज्यादा कंपनियों और रसूख वाले लोगों ने चार खरब 30 अरब छह करोड़ रुपये के कर्ज माफ कराए। कर्ज माफ कराने वालों में राजनीतिक व कारोबारी लोग शामिल हैं।

देश में ऐसे लोगों के खिलाफ कोई कानून नहीं है। लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था से जरूरी चीजों की कीमतें बढ़ गई है। इन दिनों टमाटर 100 रुपये और आलू 60 रुपये किलो से भी ज्यादा बिक रहा है। पेट्रोल की कीमतें आसमान छू रही हैं। सच तो यह है कि पाक सरकार अवाम को आर्थिक सुरक्षा प्रदान नहीं कर पाई। आज भी चार करोड़ से अधिक लोग बेरोजगार हैं। इस बेकारी के कारण युवा दहशतगर्दी का दामन थाम रहे हैं।

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कर्ज में आकंठ डूब चुका पाकिस्तान - फोटो : File Photo
पाकिस्तान की वर्तमान सरकार की गलतियों और मतभेदी नीतियों को अभी तक पाक जनता सब्र के साथ इसलिए नजर अंदाज कर रही थी कि पिछली सरकारों ने जनता की समस्याओं को हल करने के बजाय अपना सारा समय लूट-खसोट में लगा दिया। पिछली सरकारों के भ्रष्टाचार से तंग अवाम को इस बात की उम्मीद थी कि इमरान खान देश में फैले भ्रष्टाचार, महंगाई व बेरोजगारी को खत्म कर देंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बल्कि हालात और खराब हो गए हैं।

पाक की अर्थव्यवस्था बुरी तरह लड़खड़ा गई है। देश कर्ज के बोझ से दिवालिया होने के कगार पर है। सरकार को अपने पहले साल में 19 अरब का कर्ज चुकाना है। सूद की शक्ल में प्रतिदिन छह अरब रुपये अदा करने पड़ रहे हैं। चालू घाटा बढ़कर नौ अरब रुपये हो गया है। कर्ज चुकाने के लिए सरकार ने सरकारी संपत्तियों को बेचने का फैसला लिया है। लाख कोशिशों के बावजूद अभी तक वह अपने मित्र देशों से व आईएमएफ, विश्व बैंक से कर्जा लेने में विफल रही है। चीन ने अब पाकिस्तान को दिवालिया होने से बचाने के लिए दो अरब डॉलर कर्ज देने का फैसला लिया है।

दूसरी तरफ पाकिस्तान में कर्ज माफ कराने वाले आजाद घूम रहे हैं, जिसने पाक की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर डाला है। वर्ष 2009 से 2015 तक 245 अरब रुपये के कर्ज माफ कराए गए। पिछले 25 साल में 988 से ज्यादा कंपनियों और रसूख वाले लोगों ने चार खरब 30 अरब छह करोड़ रुपये के कर्ज माफ कराए। कर्ज माफ कराने वालों में राजनीतिक व कारोबारी लोग शामिल हैं।

देश में ऐसे लोगों के खिलाफ कोई कानून नहीं है। लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था से जरूरी चीजों की कीमतें बढ़ गई है। इन दिनों टमाटर 100 रुपये और आलू 60 रुपये किलो से भी ज्यादा बिक रहा है। पेट्रोल की कीमतें आसमान छू रही हैं। सच तो यह है कि पाक सरकार अवाम को आर्थिक सुरक्षा प्रदान नहीं कर पाई। आज भी चार करोड़ से अधिक लोग बेरोजगार हैं। इस बेकारी के कारण युवा दहशतगर्दी का दामन थाम रहे हैं।

इमरान खान पाकिस्तान में जड़ पकड़ चुके भ्रष्टाचार को खत्म करने की बात करते हैं। मगर उनकी पार्टी के बहुत से सदस्य ऐसे हैं, जो भ्रष्टाचार के लिए जाने जाते हैं। इसे विडंबना ही कहा जाएगा कि हाल ही में वह खुद इसकी लपेट में आ गए हैं। लाहौर हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है, जिसमें 2018 के चुनाव में उन पर ईमानदार व नेकनीयत न होने का आरोप लगा है कि उन्होंने अपने नामांकन-पत्र में अपनी अवैध बेटी की जानकारी छिपाई थी।

ऐसा करके उन्होंने पाकिस्तानी संविधान के अनुच्छेद 62 और 63 के प्रावधान को तोड़ा है। उनकी कुर्सी भी जा सकती है। इमरान खान की बहन अलीमा पर आरोप है कि उसने दुबई में अपनी जायदाद टैक्स चोरी के लिए छिपाई है। पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ भ्रष्टाचार के कई मामलों में आरोपी सिद्ध हो चुके हैं और सजा काट रहे हैं। ऐसे ही पाक के पूर्व राष्ट्रपति और उनकी बहन फरियाज तालपुर के खिलाफ मनी लांड्रिंग का केस बना हुआ है और उनके देश से बाहर जाने पर रोक लगी हुई है। पाकिस्तान भ्रष्टाचार से जूझ रहा है।

इधर पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद की धुरी बन गया है। दुनिया भर में प्रमुख आतंकवादी हमलों के तार पाकिस्तान से जुड़े हुए हैं। अमेरिका पर 9/11 के आतंकी हमले के प्रमुख ओसामा-बिन-लादेन को भी पाकिस्तान में पनाह मिली थी। पुलवामा में हुए आतंकी हमले को पाकिस्तान के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने अंजाम दिया। इमरान खान ने सत्ता संभालने के बाद कहा था कि वह सबसे पहले जनता की समस्याओं को हल करेंगे और फिर प्रशासन में सुधार लाएंगे, पर अभी तक अपने आठ महीने के कार्यकाल में विफल रहे हैं। देखना यह है कि अगले चंद दिनों में पाकिस्तान के हालात क्या शक्ल लेते हैं।
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