पाकिस्तान की वर्तमान सरकार की गलतियों और मतभेदी नीतियों को अभी तक पाक जनता सब्र के साथ इसलिए नजर अंदाज कर रही थी कि पिछली सरकारों ने जनता की समस्याओं को हल करने के बजाय अपना सारा समय लूट-खसोट में लगा दिया। पिछली सरकारों के भ्रष्टाचार से तंग अवाम को इस बात की उम्मीद थी कि इमरान खान देश में फैले भ्रष्टाचार, महंगाई व बेरोजगारी को खत्म कर देंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बल्कि हालात और खराब हो गए हैं।
पाक की अर्थव्यवस्था बुरी तरह लड़खड़ा गई है। देश कर्ज के बोझ से दिवालिया होने के कगार पर है। सरकार को अपने पहले साल में 19 अरब का कर्ज चुकाना है। सूद की शक्ल में प्रतिदिन छह अरब रुपये अदा करने पड़ रहे हैं। चालू घाटा बढ़कर नौ अरब रुपये हो गया है। कर्ज चुकाने के लिए सरकार ने सरकारी संपत्तियों को बेचने का फैसला लिया है। लाख कोशिशों के बावजूद अभी तक वह अपने मित्र देशों से व आईएमएफ, विश्व बैंक से कर्जा लेने में विफल रही है। चीन ने अब पाकिस्तान को दिवालिया होने से बचाने के लिए दो अरब डॉलर कर्ज देने का फैसला लिया है।