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Cyclone Mocha: मोचा चक्रवात से मोर्चा लेने की चुनौती, तटीय इलाकों पर गहरी नजर

ठाकुर ठाकुर
Updated Wed, 17 May 2023 06:21 AM IST

सार

‘मोचा’ की गंभीरता को देखते हुए तटीय इलाकों पर जबर्दस्त पहरा है और तटरक्षक बल के जवान मुस्तैदी से समुद्री क्षेत्र पर नजर बनाए हुए हैं।
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चक्रवात मोचा (सांकेतिक तस्वीर)। - फोटो : सोशल मीडिया


इसकी शुरुआती रफ्तार नब्बे किलोमीटर प्रति घंटा थी, जो पोर्ट ब्लेयर तक पहुंचते-पहुंचते रफ्तार 520 किलोमीटर में बदल गई। इसके बाद प्रशासन पूरी तरह चौकन्ना हुआ। हालांकि हिंदुस्तान पहुंचते-पहुंचते इसकी गति काफी कम हो गई। वर्ना तबाही कितनी मचती, उसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल होता, क्योंकि बांग्लादेश और म्यांमार के जलीय क्षेत्रों के निकट इसने जमकर कहर बरपाया है। उस स्थिति को भांपते हुए हमारी राज्य सरकारों ने पहले से ही मोर्चा संभाल लिया और चेतावनी जारी करके लोगों को पहले ही सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाकर समझदारी का परिचय दिया।


गौरतलब है कि मानसून से पहले अक्सर किसी न किसी चक्रवाती तूफान का आगमन हो ही जाता है। यह सिलसिला विगत एक दशक से नियमित जारी है। इससे पहले हुदहुद, फानी, फेलिन, जैसे चक्रवाती तूफान आए, जिन्होंने तैयारियों के बावजूद काफी जानमाल का नुकसान किया।


मौसम वैज्ञानिकों ने ‘मोचा’ को अन्य चक्रवाती तूफानों के मुकाबले खतरनाक बताया है। अब तक कुल छह प्रकार के साइक्लोनों की पहचान हुई है, जिसमें ध्रुवीय निम्न (पोलर लो), ध्रुवीय चक्रवात, अंतः उष्ण कटिबंधीय चक्रवात, उष्णकटिबंधीय चक्रवात, सोसाईंक्लोनेस व अत्तिरिक्त उष्णकटिबंधीय चक्रवात प्रमुख हैं।


इसके अलावा कम गति वाले तूफान भी समय-समय पर आते रहते हैं, जो तटीय क्षेत्रों तक नहीं पहुंचते। सिर्फ समुद्र में ही उफान मारकर चले जाते हैं। उस समय समुद्र में जहाजों और मछुआरों को जाने से रोक दिया जाता है। हिंदुस्तान का मौजूदा वक्त ऋतुओं के परिवर्तन का माना जाता है। जून में मानसून दस्तक देता है, जो पूरे वर्ष के मौसम के मिजाज से वाकिफ करवाता है। ऐसे में जब कोई चक्रवाती तूफान आता है, तो मौसम में बदलाव होने आरंभ हो जाते हैं।


दरअसल, चक्रवाती तूफान यानी साइक्लोन एक ऐसी संरचना है, जो गर्म हवा के चारों ओर कम वायुमंडलीय दाब के साथ गहरे पानी में उत्पन्न होती है। जब एक तरफ की गर्म हवाओं का दूसरी ओर की ठंडी हवाओं से मिलन होता है, तो वह गोलाकार आंधी में तब्दील हो जाता है और उसे ही चक्रवात कहा जाता है। कलकत्ता में 1836 और 1855 के बीच महान वैज्ञानिक और तर्कशास्त्री हेनरी पिडिंगटन ने द जर्नल ऑफ द एशियाटिक सोसाइटी पुस्तक में उष्णकटिबंधीय तूफानों से संबंधित करीब चालीस शोध पत्र लिखे थे, जो अन्य भाषाओं में अनुदित होकर दुनिया भर में प्रकाशित भी हुए थे।


देसी भाषा में समझें, तो साइक्लोन का मतलब ‘सांप की कुंडली’ होता है, जो तबाही का ही संकेत देता है। साइक्लोन के संबंध में  विस्तार से उन्होंने 1842 में अपनी ऐतिहासिक थीसिस ‘लॉज ऑफ द स्टॉर्म’ में समझाया था। चक्रवात का नाम वही देश रखता है, जहां से चक्रवात की उत्पत्ति होती है। नाम ज्यादातर हिंसक प्रवृति के जानवर या कीड़े-मकोड़े के नाम पर रखे जाते हैं। रखे गए नाम से चक्रवात को अन्य देश तब तक पुकारते हैं, जब तक उसकी मियाद पूरी नहीं हो जाती।
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फिलहाल, ‘मोचा’ तूफान की गंभीरता को देखते हुए समुद्र तटीय इलाकों पर जबर्दस्त पहरा है। पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, मणिपुर, गुजरात जैसे खतरे वाले जलीय क्षेत्रों में भारतीय तटरक्षक बल के जवान मुस्तैद हैं और कम दबाव वाले क्षेत्रों पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। मछुआरों को समुद्र में जाने से रोक दिया गया है। तूफान जब तक पूरी तरह से शांत नहीं हो जाता, तब तक खतरे का अंदेशा बना रहेगा। 18 मई तक तबाही का अंदेशा है। उसके बाद खतरे कम होंगे। तब तक सुरक्षाबलों को मुस्तैदी दिखाते रहना होगा।

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