जब पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश मियां शाकिब निसार ने कटासराज के हिंदू मंदिर के पवित्र तालाब में पानी की कमी से संबंधित खबर पर प्रतिक्रिया देते हुए चिंतित स्वर में पंजाब सरकार को कार्रवाई करने का आदेश दिया, तो यहां कई लोगों की भवें तन गईं। यह मंदिर यूनेस्को के विश्व विरासत स्थल की अस्थायी सूची में शामिल 26 स्थलों में से एक है, गौरतलब है कि यूनेस्को की सूची में शामिल दस स्थल पाकिस्तान के पंजाब में स्थित हैं। मंदिर के आसपास की सीमेंट फैक्टरियों ने पानी सोख लिया है, क्योंकि फैक्टरी के उपयोग के लिए यहां कई कुएं खोदे गए हैं। इसने इस इलाके के लोगों और आगंतुकों, खासकर दुनिया भर से मंदिर के दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं के बीच खलबली पैदा कर दी है। इसके साथ ही एक अच्छी खबर यह है कि इतिहास में पहली बार पाकिस्तान ननकाना साहिब के पवित्र कुएं से 'अमृत जल' का पूरी दुनिया में बिना किसी मूल्य के निर्यात करेगा।
प्रधान न्यायाधीश ने मुख्यमंत्री शहबाज शरीफ को मंदिर के आसपास की फैक्टरियों द्वारा जल उपयोग के पैमाने को समझाते हुए एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के लिए एक हफ्ते का समय दिया है और कहा है कि अगर इन फैक्टरियों द्वारा कोई प्रदूषण हो रहा है, तो प्रदूषण स्तर को भी मापकर बताएं।
पंजाब सरकार पिछले एक साल से इस समस्या पर संज्ञान लेने में विफल रही, जब पहली बार यह मुद्दा उठाया गया था। सरकार का ध्यान इस पर केवल तब गया, जब सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे का स्वतः संज्ञान लिया और मंदिर में पानी की कमी तथा मंदिर में हिंदू देवताओं की मूर्तियों की गैर-मौजूदगी पर सरकार से जवाब मांगा। इस गंभीर मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में लाने में पाकिस्तान के मीडिया, खासकर पंजाब के मीडिया ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। देर से यह खबर आई कि भारत तथा दुनिया के अन्य हिस्सों से आने वाले यात्री कटासराज के पवित्र तालाब में स्नान नहीं कर सके, क्योंकि आसपास की सीमेंट फैक्टरियों द्वारा पानी की भारी खपत के कारण तालाब लगभग सूख चुका था। अकेले बेस्टवे सीमेंट कंपनी कुओं के माध्यम से प्रति दिन 80,000 गैलन पानी बाहर निकाल रही थी, जबकि इस क्षेत्र में कई अन्य सीमेंट फैक्टरियां भी हैं।
सवाल उठता है कि क्या शहबाज शरीफ के पास राजनीतिक इच्छाशक्ति है कि वह बड़े व्यावसायिक घरानों के खिलाफ कार्रवाई कर सकें, खासकर तब, जब पंजाब में सरकार कमजोर है और आगामी आम चुनाव में मात्र कुछ ही महीने बचे हुए हैं। प्रधान न्यायाधीश ने सरकार से यह भी पूछा है कि आखिर किसने और क्यों कटासराज मंदिर से हिंदू देवताओं की मूर्तियों को गायब किया। सुप्रीम कोर्ट ने मंदिरों से हिंदू देवताओं की मूर्तियों के गायब होने पर भी खेद जताया, जिसने श्रद्धालुओं को अपने देवताओं की मूर्तियों को साथ लाने के लिए मजबूर किया।
निर्वासित ट्रस्ट संपत्ति बोर्ड (ईटीपीबी) ने अदालत को बताया कि 1992 में बाबरी मस्जिद की घटना के बाद स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया के चलते कटासराज के भीतर से श्री हनुमान और श्रीराम मंदिर से देवताओं की मूर्तियों को हटाया गया। लेकिन अदालत सरकार से जवाब चाहती है कि हिंदू देवताओं की वे मूर्तियां कहां हैं और क्या वे सुरक्षित तथा अच्छी स्थिति में हैं?
हाल ही में भारत से पाकिस्तान आए हिंदू तीर्थयात्रियों के समूह का नेतृत्व करने वाले प्रताप बजाज ने फरवरी, 2018 में भारत से कुछ हिंदू देवताओं की मूर्तियों की व्यवस्था करने का वायदा किया है। पंजाब सरकार द्वारा अदालत को बताया गया कि दिल्ली के पहाड़गंज की मूर्तियां खास तौर से पवित्र होती हैं, क्योंकि वे संगमरमर से बनाई जाती हैं। कटासराज जैसे स्थलों पर ध्यान देने की तत्काल जरूरत है, अन्यथा पाकिस्तान औद्योगिक एवं शहरी विकास के कारण उन्हें गंवा देगा और भावी पीढ़ियां अपनी विरासत और राजस्व स्रोतों से वंचित हो जाएंगी। कटासराज धार्मिक पर्यटन का हिस्सा है, जिसे भारत और पाकिस्तान ने अपने द्विपक्षीय समझौतों में स्वीकार किया है।
हसन खावर नवी वक्त समूह के अंग्रेजी अखबार द नेशन नोट्स में लिखते हैं, 'इन सभी स्थलों को उनकी स्पष्ट सीमा और उसके आसपास के बफर जोन समेत संरक्षित क्षेत्र घोषित करना चाहिए। सरकार को इन स्थलों के प्रबंधन के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश जारी करना चाहिए, या तो पुरातत्व विभाग की क्षमता बढ़ाकर सुधार करना चाहिए या यूनेस्को और अन्य अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से सहायता लेनी चाहिए।'
ईटीपीबी ने खुलासा किया कि उसके पास मुख्य रूप से पंजाब में दस लाख एकड़ जमीन है और वह सिख एवं हिंदू समुदाय की तमाम गतिविधियों एवं पवित्र स्थलों के प्रबंधन के लिए जिम्मेदार है। पंजाब के ननकाना साहिब के पास 16,000 एकड़ कृषि भूमि है, जिससे कुल नब्बे लाख पाकिस्तानी रुपये की आय होती है, जबकि प्रति वर्ष गुरुद्वारों एवं हिंदू मंदिरों में आने वाले श्रद्धालुओं से दान के रूप में करीब एक करोड़ पाकिस्तानी रुपये जमा किए जाते हैं।
ईटीपीबी के चेयरमैन सिद्दिकुल फारूक कहते हैं कि 'तीन मंदिर 1947 के विभाजन के समय से बंद थे, आज खैबर पख्तुनख्वा में कई मंदिर खोल दिए गए हैं। हम लाहौर, कटासराज और ननकाना साहिब में हिंदू और सिख यात्रियों के लिए सैकड़ों सुसज्जित कमरे बनवा रहे हैं।'
वर्ष 2005 में भी पाकिस्तान में पाकिस्तान मुस्लिम लीग और भारत में भारतीय जनता पार्टी की ही सरकार थी। उस वक्त भारत के पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी को विशेष रूप से कटासराज में पूजा के लिए आमंत्रित किया गया था। आडवाणी की यात्रा ने कटासराज को वैश्विक नक्शे पर ला दिया था और यहां के प्रति हिंदू श्रद्धालुओं में दिलचस्पी पैदा हुई थी। सांसद मुशाहिद हुसैन कहते हैं, 'भाजपा नेता को कटासराज आमंत्रित करने का विचार हमने इसलिए किया था, क्योंकि हम भारत को एक व्यापक राजनीतिक संदेश देना चाहते थे।'