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आतंक के खिलाफ: 'प्रतिक्रियात्मक' से 'पूर्व सक्रिय' रणनीति की ओर, क्रियान्वयन से होगी असल परीक्षा

अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: लव गौर Updated Wed, 25 Feb 2026 06:55 AM IST

सार

केंद्र सरकार द्वारा जारी देश की पहली आतंकवाद रोधी नीति इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह दर्शाती है कि देश आतंकवाद के खिलाफ ‘प्रतिक्रियात्मक’ से ‘पूर्व-सक्रिय’ रणनीति की ओर बढ़ रहा है। हालांकि, किसी भी नई पहल की तरह इस नीति की वास्तविक परीक्षा भी इसके क्रियान्वयन में ही होगी।
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आतंक के खिलाफ - फोटो : अमर उजाला प्रिंट


नई नीति इसी शून्य को भरने का एक प्रयास है। इसकी खासियत है कि यह आतंकवाद को महज कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं, बल्कि बहुस्तरीय चुनौती के रूप में देखती है। इसमें रोकथाम, प्रतिक्रिया, क्षमताओं का एकीकरण, मानवाधिकार व विधि का शासन, आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली स्थितियों को कम करने, अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का समन्वय और हमलों से उबरने व सहनशीलता दिखाने की भी बात शामिल है। दरअसल, आतंकी संगठन जिस तेजी से संगठित कार्रवाइयां कर रहे हैं, उसे देखते हुए यह जरूरी है कि इनसे निपटने की रणनीतियों में भी एक समन्वय हो। यही वजह है कि नीति में आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक प्रयासों में तालमेल बैठाने पर खास जोर दिया गया है।


दशकों से भारत आतंकवाद की मार झेलता आया है, पर अब तक की उसकी प्रतिक्रियाएं घटना के बाद ही होती रही हैं, किंतु प्रहार इस नजरिये में क्रांतिकारी बदलाव लाता है, जिसमें खुफिया जानकारियों पर आधारित पूर्व-रोकथाम को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलने की बात कही गई है। नई नीति में खुफिया ब्यूरो (आईबी) के मल्टी एजेंसी सेंटर और संयुक्त खुफिया कार्यबल के जरिये केंद्रीय एजेंसियों और राज्य पुलिस बलों के बीच सशक्त साझेदारी की बात भी की गई है। बेशक, नीति का असल परीक्षण क्रियान्वयन में होगा, लेकिन किसी आतंकवाद रोधी नीति की सफलता केवल सख्ती पर निर्भर नहीं करती, इसके लिए लोकतांत्रिक समाज में सुरक्षा और नागरिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन का ध्यान रखना होगा।


इसके अतिरिक्त, नई नीति महज एक कागजी दस्तावेज बनकर न रह जाए, इसके लिए एनआईए, आईबी, रॉ, राज्य पुलिस, अर्धसैनिक बलों इत्यादि के बीच समन्वय, संसाधनों का उचित आवंटन, तकनीकी क्षमता का विस्तार और राजनीतिक इच्छाशक्ति की निरंतरता जरूरी होगी। ऐसा होने पर ही प्रहार सही मायनों में देश को आतंकवाद-मुक्त बनाने की दिशा में एक ठोस कदम साबित हो सकेगा।
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