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नौकरियों की गिनती

मोहनदास
Updated Wed, 13 Mar 2019 06:33 PM IST
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पेशेवर

यह निर्विवाद तथ्य है कि भारत की अर्थव्यवस्था पिछले कुछ वर्षों से तेजी से बढ़ रही है, जिसके कारण वर्ष 2018 में उसे ‘सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था’ का खिताब मिला। सबसे सराहनीय बात यह है कि यह वृद्धि कम मुद्रास्फीति के साथ हासिल की गई है। पिछले 4.75 वर्षों में सरकार की यह महत्वपूर्ण उपलब्धि रही है, जिससे भारत की विकास की गति निरंतर बनी रही, जबकि पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान मुद्रास्फीति उच्च स्तर पर थी, जो कहर बरपा रही थी।



इसके अलावा मौजूदा बाजार कीमतों पर वर्ष 2014-19 के दौरान (2019 के आंकड़े अनुमानित) जीडीपी में वृद्धि वर्ष 2009-14 के मुकाबले 28 फीसदी ज्यादा है। उच्च मुद्रास्फीति के साथ भारत की जीडीपी वर्ष 2009-14 के दौरान मात्र 59 लाख करोड़ रुपये बढ़ी। इसके विपरीत वर्ष 2014-19 के दौरान जीडीपी में 78 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई, जबकि मुद्रास्फीति दर भी कम रही, जो उच्च गुणवत्ता वाले विकास को प्रदर्शित करती है।


भारत के आकार की अर्थव्यवस्था इस गति से बढ़ रही है, जो रोजगार विहीन विकास से ग्रस्त हो ही नहीं सकती है। यूपीए-दो के कार्यकाल में भी बड़े पैमाने पर रोजगार का सृजन हुआ होगा। पर लगता है कि यूपीए यह भूल गया कि रोजगार की गणना कैसे होती है और वह रोजगार विहीन विकास के फर्जी सिद्धांत का शिकार हो गया।


स्वस्थ रोजगार वृद्धि के रुख का समर्थन करने के लिए हमारे लिए यह आवश्यक है कि हम देश की अर्थव्यवस्था के प्रमुख वाहकों पर नजर डालें, जो रोजगार पैदा करते हैं। अपने पिछले आलेख में मैंने परिवहन क्षेत्र में रोजगार सृजन के बारे में बताया था कि अकेले इस क्षेत्र में अप्रैल, 2014 से दिसंबर, 2018 के बीच करीब 1.4 करोड़ नौकरियां पैदा हुईं। उसी तरह रोजगार पैदा करने वाला एक दूसरा क्षेत्र है व्यावसायिक क्षेत्र, जिसमें से अधिकांश गैर-कॉरपोरेट और सामाजिक सुरक्षा नेटवर्क के बाहर हैं।


ऐसे पेशेवर जो अपना काम खुद शुरू करते हैं, वे भी बड़ी संख्या में रोजगार पैदा करते हैं, और उसे भी हमारी गणना का अभिन्न हिस्सा होना चाहिए। चार्टर्ड अकाउंटेंट, कंपनी सेक्रेटरी, मैनेजमेंट अकाउंटेंट, वकील, फैशन डिजाइनर, डॉक्टर्स, आर्किटेक्ट्स, प्रोजेक्ट मैनेजर्स, फाइनेंशियल एडवाइजर, इंश्योरेंस एजेंट्स, रियल एस्टेट ब्रोकर्स, स्टॉक मार्केट ब्रोकर्स और बिचौलियों, और असंख्य अन्य पेशेवर सेवा प्रदाताओं जैसे पेशेवरों के बीच काफी रोजगार का सृजन होता है। अर्थव्यवस्था के इस खंड द्वारा सृजित कुल नौकरियां भी हमारे विश्वविद्यालयों और व्यावसायिक संस्थानों से ग्रेजुएट करके निकली समृद्ध मानव पूंजी का कार्य है।


आयकर विभाग की वार्षिक आयकर रिटर्न सांख्यिकी रिपोर्ट के आंकड़े उपलब्ध हैं, जो कर चुकाने वाले कुल गैर-कॉरपोरेट पेशेवरों की संख्या बताते हैं। गैर-कॉरपोरेट पेशेवर अपनी आय 'पेशे से आय' शीर्षक के तहत बताते हैं। इसका तात्पर्य है कि उन्होंने स्वयं को वेतन नहीं दिया, बल्कि अपने द्वारा नियोजित लोगों को वेतन दिया। अधिकांश गैर-कॉरपोरेट पेशेवरों के पास 20 से कम संख्या में कर्मचारी होंगे, जो सामाजिक सुरक्षा भुगतान के दायरे से बाहर होंगे और उन्हें अलग से गिना जा सकता है। वित्त वर्ष 2016-17 की नवीनतम रिपोर्ट (आकलन वर्ष 17-18) के आधार पर 31 मार्च, 2017 तक ऐसे करदाताओं की कुल संख्या 20 लाख थी। प्रति वर्ष लगभग डेढ़ लाख नए करदाताओं का औसत लें, तो हम मार्च, 2019 तक 24 लाख गैर-कॉरपोरेट पेशेवर करदाताओं का अनुमान लगा सकते हैं। जाहिर है, बहुत से ऐसे पेशेवर काम करते होंगे, जो करदाता नहीं हो सकते हैं, लेकिन आने वाले वर्षों में वे करदाता हो सकते हैं।


प्रत्येक करदाता द्वारा पांच लोगों को रोजगार देने का एक अत्यंत संकीर्ण अनुमान लगाएं, तो हम अनुमान लगा सकते हैं कि अकेले इस क्षेत्र में न्यूनतम 1.2 करोड़ लोगों के नियोजित होने का ताजा आंकड़ा हमारे पास है। फिर हम अनुमान लगाते हैं कि तीन पेशे-चार्टर्ड एकाउंटेंट, वकील, मेडिकल प्रोफेशनल्स मिलकर एक लाख लोगों को नियोजित कर सकते हैं, क्योंकि ऐसे पेशेवरों में से ज्यादातर (जिन्हें पांच वर्ष से ज्यादा काम करने का अनुभव है) पांच से ज्यादा लोगों को नियोजित कर सकते हैं। वर्ष-दर-वर्ष गैर-कॉरपोरेट पेशेवर करदाताओं में कुल वृद्धि हमें हर साल नए पेशों की संख्या का अनुमान लगाने में मदद करती है। प्रत्येक पेशे पर पांच रोजगार के अनुमान का उपयोग करते हुए हम अनुमान लगा सकते हैं कि हर साल व्यावसायिक क्षेत्र में आठ लाख रोजगार जुड़ते हैं।
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आंकड़े बताते हैं कि हर साल करदाताओं की संख्या में वृद्धि होती है। यह भी संभव है कि वे पहले से काम करते हों और कर के दायरे में इस साल आए हों। हालांकि यह निरंतर पाइपलाइन में होने कारण एक वार्षिक विशेषता है, जो समय के साथ सामान्य हो जाता है।


हमारा अनुमान है कि अकेले व्यावसायिक क्षेत्र ने 2014-15 से 2018-19 तक लगभग चालीस लाख नौकरियां सृजित की हैं (पिछले वर्ष की संख्या अनुमानित है)। इसी अवधि में परिवहन क्षेत्र में रोजगार सृजन के अपने अनुमानों (1.4 करोड़) के साथ अगर इस संख्या को जोड़ लें, तो हम आसानी से अनुमान लगा सकते हैं कि इस अवधि के दौरान परिवहन और व्यावसायिक क्षेत्र में कुल 1.8 करोड़ रोजगार का सृजन हुआ। हम अपने विश्वविद्यालयों और व्यावसायिक संस्थाओं से पेशेवर प्रतिभा के वार्षिक प्रवाह से सत्यापित कर यह सुनिश्चित करते हैं कि हर साल रोजगार बाजार में पर्याप्त प्रतिभा शामिल होती है। जाहिर है, उनमें से कई कॉरपोरेट नियोक्ता कंपनी में काम करेंगे और सामाजिक सुरक्षा के दायरे में आएंगे, लेकिन बड़ी संख्या में लोग पेशों से भी जुड़ते हैं।


हमें तीन बड़े रोजगार आंकड़ा क्षेत्रों में समग्र नौकरियों का बेहतर अनुमान हासिल करने के लिए आगे ईपीएफओ, ईएसआई और एनपीएस आंकड़े पर गंभीरतापूर्वक नजर डालने की आवश्यकता है। लेकिन अपरिहार्य निष्कर्ष यह है कि भारत बड़ी संख्या में नौकरियों का सृजन कर रहा है और रोजगार विहीन विकास के फर्जी दावे का कोई सुबूत नहीं है।


लेखक मणिपाल ग्लोबल एजुकेशन सर्विस के चेयरमैन हैं।

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