भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में आंकड़े केवल आंकड़े नहीं होते। वे शासन-व्यवस्था के भीतर मौजूद उन दरारों का संकेत देते हैं, जिनसे होकर नागरिक का भरोसा रिसता है। केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) की 2025 की वार्षिक रिपोर्ट इस संदर्भ में एक महत्वपूर्ण तस्वीर पेश करती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में सरकारी संस्थाओं के खिलाफ भ्रष्टाचार से जुड़ी 70,584 शिकायतें प्राप्त हुईं। हालांकि, यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि इनमें से करीब 65 हजार शिकायतों का 31 दिसंबर, 2025 तक निपटारा कर दिया गया। लेकिन, साल के अंत तक लंबित मामलों की संख्या और शिकायतों का संस्थागत वितरण कई गंभीर सवाल उठाता है।
सबसे अधिक 9,933 शिकायतें बैंकों व 9,381 शिकायतें रेलवे के खिलाफ आईं। आवास एवं शहरी मामलों तथा स्थानीय निकायों से संबंधित शिकायतों की संख्या भी उल्लेखनीय रही। हालांकि, इन आंकड़ों को देखकर किसी संस्था को भ्रष्टाचार का पर्याय मानना उचित नहीं होगा। फिर भी, इस सूची में बैंकों व रेलवे का शीर्ष पर होना नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता।
दोनों ही संस्थाएं आम नागरिक के जीवन से गहराई से जुड़ी हैं और दोनों में सार्वजनिक धन व प्रशासनिक निर्णय शामिल होते हैं। ऐसे में, इन क्षेत्रों में शिकायतों का विश्लेषण उन प्रक्रियाओं की पहचान के लिए होना चाहिए, जहां अनियमितता की गुंजाइश हो सकती है। इसके अलावा, कुल लंबित शिकायतों में करीब दो हजार शिकायतों का निर्धारित तीन महीने से अधिक समय से लंबित होना भी चिंताजनक है। इससे जांच की विश्वसनीयता और शिकायतकर्ता का भरोसा, दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
गौरतलब है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ किसी व्यवस्था की सफलता इससे तय होगी कि कितनी शिकायतें प्रथमदृष्टया सही पाई गईं, कितने मामलों में जिम्मेदारी निर्धारित हुई, कितने दोषियों पर कार्रवाई हुई और कितने मामलों के बाद व्यवस्था में स्थायी सुधार किया गया। केवल निस्तारण के लिए फाइल बंद कर देना और भ्रष्टाचार के मूल कारण को छोड़ देना इस लड़ाई को अधूरा बना सकता है। यहीं से भ्रष्टाचार विरोधी तंत्र की अगली चुनौती शुरू होती है।
निगरानी व्यवस्था को केवल शिकायतों पर प्रतिक्रिया देने के बजाय भ्रष्टाचार की संभावनाओं को पहले से पहचानने वाली व्यवस्था बनाना होगा। डिजिटल प्रक्रियाएं इस दिशा में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं। देश में शिकायतों को सुनने वाली व्यवस्था भी है। अब जरूरत इसे अधिक पारदर्शी, तेज और परिणामोन्मुख बनाने की है।