हंसी पर दुनिया की कोई भी ताकत रोक नहीं लगा सकती। अगर जिंदगी हमें रुलाती है, तो हंसने का भी पूरा मौका देती है। अगर हम उस मौके का फायदा नहीं उठा सके तो गलती हमारी है। जिस व्यक्ति को बिना वजह हंसने की कला आती है, उसे आगे बढ़ने से दुनिया की कोई ताकत रोक नहीं सकती।
मसला यह है कि बिना वजह मुंह फाड़ने वाले को लोग पागल और मूर्ख समझते हैं। लेकिन मैं कहता हूं कि आप दिल खोलकर मुंह फाड़िए। क्या पता दानवरूपी हंसी से कोरोना दुम दबाकर भाग जाए। आखिर है तो चीन का माल ही न! वैसे चीन वालों का खानपान भी गजब का है।
भला चमगादड़ और सांप भी खाने की चीज है? इनका वश चले तो मेज, कुर्सी, चारपाई और घर के बर्तन भी खा लें। भला हो ऊपर वाले का कि उसने इन चीजों को पचाने के लिए कोई एंजाइम नहीं बनाया। तुम्हें मान गए चीन वालों। हर चीज डुप्लीकेट बनाई, लेकिन वायरस ओरिजनल।
मुझे आजकल तनिक फुर्सत है। इसका भरपूर लाभ उठा रहा हूं। लोगों को अपने स्तर से जागरूक करने की कोशिश कर रहा हूं। 14 अप्रैल तक घर में बंद रहना है। बंद नहीं रहेंगे, तो प्रसाद में तात्कालिक रूप से लट्ठ और दीर्घकालिक रूप से कोरोना मिलेगा। इसलिए बिना चूं-चपड़ किए घर में रहने में ही भलाई है।
इस समय कॉमेडी की धारा कुछ मंद पड़ गई है। कोरोना, कॉमेडी का विषय नहीं है। देश पर एक गंभीर संकट है। हम लोगों को बहुत सावधानी से रहना है। अगर कोरोना का संक्रमण विस्फोटक हो गया तो क्या होगा, हम और आप इसकी कल्पना भी नहीं कर सकते। वैसे तमाम बुराइयों के बाद इस कोरोना ने कुछ बढ़िया चीजें सिखाई हैं।
उनमें से कुछ अहम हैं, जैसे- हाथ धोने की आदत, साफ-सफाई की आदत और बिना वजह एक-दूसरे का हालचाल पूछने की आदत। आपका नहीं पता, लेकिन मैं तो बॉस-बिग बॉस खेल रहा हूं। श्रीमती जी बनी हैं बिग बॉस और हम बने हैं घर वाले। जरा-सा चाय पीने बैठते हैं कि आवाज आती है- बिग बॉस चाहती हैं कि मटर छीलकर उनके पास लाई जाए।
फिर थोड़ी देर बाद फरमान जारी होता है- सभी कमरों में झाड़ू लगाई जाए। हंसिए मत, आपकी हालत भी इससे बेहतर नहीं होगी। आप भी जानते होंगे कि बिग बॉस के हुक्म को नकारने का तो सवाल ही नहीं उठता। ज्यादा चूं-चपड़ हुई, तो बिग बॉस घर से बाहर निकाल देंगी। और बाहर कोरोना आपके इंतजार में बैठा है। मैं तो कहता हूं, घर में मार खा लेना बेहतर है।
लगातार घर में रहने के अपने नुकसान हैं। लेकिन इस समय नुकसान झेलने वाला ही सिकंदर है। बिस्तर और सोफे को अधिक कष्ट न दें। कहीं ऐसा न हो कि वे बोल पड़ें कि प्रभु अब बस करो, कोरोना के चक्कर में हमारी जान के दुश्मन न बनो। एक्सरसाइज करते रहें। घर के छोटे-मोटे कामों में पत्नी जी की मदद करें। बच्चों की तोतली बातों की नकल करें।
अफवाहों और व्हाट्सएप युनिवर्सिटी के नुस्खों के खिलाफ आवाज उठाएं। मैं भी यही कर रहा हूं। घर के कामों में हाथ बटाता हूं। बच्चों के कपड़ों में इस्त्री करता हूं। स्त्री भड़क जाती है तो मेरी ही इस्त्री हो जाती है। आप भी दिल लगाने के कुछ बहाने तलाशिए। आसपास के जरूरतमंद लोगों का भी ध्यान रखिए।
अपनी सोसाइटी के गार्ड और सफाईकर्मियों का ख्याल रखिए। इन दिनों दूरियां बनाए रखिए, लेकिन सजग रहिए कि ये दूरियां दिलों तक न जाएं। हंसी और ठहाकों से कोरोना का मुकाबला करिए। कोरोना ने जिंदगी में मुश्किलें जरूर बढ़ाई हैं, पर इतनी भी नहीं कि अपने बच्चों की भोली-मासूम बातों पर मुस्कराया न जा सके। (लेखक मशहूर कॉमेडियन हैं।)