चकरपुर थोक मंडी में सेठ मोतीलाल लैपटॉप पर बाजार के हाल देख चकरा गए। रुपये को वेंटीलेटर पर देख उन्हें गश आ गया, तो सेवक कृष्ण बिहारी दौड़ पड़े और सेठ जी के मुख पर पानी के छींटें मारते हुए ज्ञान दिया-रुपये से इतना मोह न करो सेठ जी, डॉलर तो बेवजह इतराता फिर रहा है। अरे, उसकी औकात ही क्या है? उससे महंगा तो अपना प्याज बिक रहा है। सेठ जी, छोटे मुंह बड़ी बात, हमारी मानो, पेटेंट करवा लो प्याज का, अर्थशास्त्री मौनी बाबा को सुझाव दो। प्याज को करेंसी बनाकर उतार दें, तो अमेरिकी डॉलर औंधे मुंह गिर जाए। भारत में चमड़े का सिक्का चल सकता है, तो प्याज का क्यों नहीं?
सेठ की आंखों में चमक आ गई। वाह-वाह, क्या आइडिया है, प्यारे कृष्ण बिहारी। लाख टके की बात कही है तुमने। फिलहाल एक काम करो। मुझे स्टेशन जाना है, टैक्सी वाले से पूछो कि कितने प्याज में जाओगे। जवाब अगर दो किलो में मिलता है, तो डेढ़ किलो में सौदा पटा लो। नया टैक्सीवाला होगा, तो शायद एक किलो प्याज में ही मान जाए। इससे एक लाभ यह होगा कि नकली नोट के झंझट से छुटकारा भी मिल जाएगा। पाकिस्तान आए दिन नकली नोटों की खेप भेजकर हमारी अर्थव्यवस्था बिगाड़ रहा है। अब नकली नोट की तरह वह नकली प्याज तो बनाने से रहा। इस बार हमने अपनी बहन को रक्षाबंधन पर नोट न देकर प्याज दिए, तो इसका इतना प्रचार हुआ कि आसपास से कई बहनें राखी बांधने आ धमकीं।
अब तक आसपास के कई सेठ आ गए। कृष्ण बिहारी बिल्कुल चाणक्य स्टाइल में चुटिया पर हाथ फेरते हुए मूड में आ गए और बोले- इससे काला धन पकड़ना कितना आसान हो जाएगा। जिस घर से गंध-सुगंध ज्यादा आ रही हो, मार दो छापा और सारा माल जब्त। इससे दहेज प्रथा भी खत्म हो जाएगी। अब प्याज लोगे, तो बदबू मारोगे और पकड़े जाओगे। लेकिन सेठ जी, प्याज के पैकेट पर महात्मा गांधी का नहीं, आपकी फोटू होनी चाहिए, क्योंकि आइडिया बिकता है। जब तक अपने मनमोहन की बांसुरी बजेगी, प्याज के भाव बढ़ते जाएंगे और अमेरिका में मंदी की मार होगी। जिस तरह आज हम चिल्ला रहे हैं, उस तरह कल अमेरिका चिल्लाएगा, प्याज के मुकाबले डॉलर गिर रहा है। जरा सोचो-अपने देश की धमक कितनी बनेगी। सेठ जी हम दुनिया पर राज करेंगे। देश में सब अमीर। गरीब और गरीबी तो मिट ही जाएगी। है न कमाल का आइडिया सर जी...।