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फर्जी की अहमियत समझिए

Mon, 20 Jul 2015 08:29 PM IST
सहीराम
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फर्जी की अर्जी सुनें महाराज। अर्ज किया है जनाब कि कोई फर्जी एडमिशन, कोई फर्जी डिग्री न हो, तो दुनिया में कोई मुन्ना भाई भी न हो। न डॉक्टर, न प्रोफेसर। फर्जी वकीलों पर अभी मुन्ना भाई का सीक्वल नहीं आया है, सो तब तक आप जितेंद्र तोमर से काम चलाएं। तो जनाब, अगर फर्जी एडमिशन, फर्जी डिग्री न हो, तो फिर थ्री इडियट्स भी न हों। कोई रैंचो न हो। यह क्या कि आप फिल्मों के मुन्ना भाई और रैंचो को तो पसंद करेंगे, पर व्यापम के मुन्ना भाइयों के खिलाफ आंदोलन चलाएंगे।
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जब मुन्ना भाई और रैंचो के बल पर फिल्मवाले करोड़ों-अरबों कमा सकते हैं, तो मध्य प्रदेश सरकार मुन्ना भाइयों से करोड़ों-अरबों क्यों नहीं कमा सकती? अगर व्यापम जैसे घोटाले न होते, तो रंजीत डॉन कहां से ऐसा प्रभावशाली नेता बन जाता कि उसके खिलाफ थाना-कचहरी में इतने मामले होने पर भी रामविलास पासवान जी उसे विधान परिषद के लिए अपनी पार्टी का उम्मीदवार बनाने को मजबूर हो जाते!

जनाब, अगर आपको असल डॉक्टर ही चाहिए, तो डॉक्टर अस्थाना आपको प्यारे क्यों नहीं? कायदे से चलनेवाले सहस्रबुद्धे उर्फ वायरस आपको पसंद क्यों नहीं? अगर फर्जी डिग्री न हो, तो इन-उन राज्यों में इन डिग्रियों के बूते बने मंत्री आपको कैसे मिलेंगे?
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अब देखिए, स्मृति ईरानी की शैक्षिक योग्यता के बारे में भी लोगों ने न जाने क्या-क्या कहा। पर संघ उनके काम से खुश है। देखिए जी, ज्यादा पढ़े-लिखों से डील करना बड़ा मुश्किल है। अब जेटली जी तो दिग्गज डिग्रीधारी हैं, पर उनकी नीतियों से कोई खुश नहीं है। बाबा रामदेव जी के पास कौन-सी डिग्री है? योग तक की डिग्री नहीं है उनके पास, फिर भी वह फार्मेसी चलाते हैं, विश्वविद्यालय भी चलाते हैं, सबका इलाज भी करते हैं। अब उन्हीं का विश्वविद्यालय चाहे, तो उन्हें कभी डी. लिट् दे दे, पर वह क्या करेंगे लेकर? अब तो वह खुद नेताओं को काबिलियत की डिग्रियां बांटते हैं। तो जनाब, देश को फर्जी की अहमियत समझनी चाहिए। उसको बदनाम नहीं करना चाहिए।
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