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शांति के रंग: होली केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि आत्ममंथन का अवसर भी

अमर उजाला Published by: Pavan Updated Wed, 04 Mar 2026 07:43 AM IST

सार

वर्ष 2026 की होली ऐसे समय में आई है, जब अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव पश्चिम एशिया को एक व्यापक युद्ध की दहलीज पर खड़ा करता दिखाई दे रहा है।अंग्रेजी कला आलोचक जॉन रस्किन ने कहा है कि इंसान को मिलने वाले भगवान के सभी तोहफों में से, रंग ही सबसे पवित्र और सबसे दिव्य उपहार है।
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शांति के रंग - फोटो : अमर उजाला


लेकिन, इस वर्ष होली ऐसे समय में आई है, जब अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव पश्चिम एशिया को एक व्यापक युद्ध की दहलीज पर खड़ा करता दिखाई दे रहा है। नए मोर्चे खुल रहे हैं, बयानबाजी व प्रतिशोध की कार्रवाइयां तेज हो रही हैं और उनकी गूंज भारत सहित पूरी दुनिया में सुनी जा रही है। ऐसे दौर में होली केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि आत्ममंथन का अवसर भी बन जाता है कि क्या हम नफरत के रंगों को और गाढ़ा करेंगे या शांति के रंगों से भविष्य रचेंगे?


होली हमें सिखाती है कि विविध रंग मिलकर ही इंद्रधनुष बनाते हैं। लेकिन आज दुनिया में पहचान की राजनीति और धार्मिक ध्रुवीकरण के रंग ही हावी होते दिख रहे हैं। खून और क्रोध को समेटे युद्ध का रंग लाल होता है, जो जल्दी चढ़ता है, पर उसके दाग लंबे समय तक रह जाते हैं। इसके उलट, शांति का रंग हल्का लगता है, लेकिन यही स्थायित्व और भरोसे की नींव रखता है। सोशल मीडिया के दौर में दुष्प्रचार और भावनात्मक उकसावों से जनमत को भड़काना आसान हो गया है।


अंतरराष्ट्रीय संघर्षों की गूंज भारत जैसे बहुलतावादी समाज में भी सांप्रदायिक तनाव को हवा दे सकती है। इसलिए, हमें यह समझना होगा कि किसी भी वैश्विक संघर्ष को घरेलू वैमनस्य का कारण नहीं बनने देना है। होली गिले-शिकवे भुलाकर गले लगाने का त्योहार है। क्या वैश्विक राजनीति में यह मुमकिन है? इतिहास गवाह है कि अंतत: हर युद्ध वार्ता की मेज पर ही खत्म होता है। ऐसे में, महाशक्तियों की जिम्मेदारी और बड़ी हो जाती है। उन्हें यह समझना होगा कि युद्ध के दुष्परिणाम पूरी मानवता को भुगतने होते हैं।


होली के रंग, चयन का प्रतीक भी होते हैं। देखने वाली बात होगी कि युद्धरत राष्ट्र किस रंग को चुनते हैं- क्रोध व प्रतिशोध का या करुणा व संवाद का, क्योंकि यही मानवता का भविष्य तय करेगा। बारूद की गंध से भरे वैश्विक वातावरण में होली का संदेश यही है कि दुनिया को रंगों की जरूरत है, लेकिन नफरत के नहीं, सद्भाव और प्रेम के।
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