भारत 28 राज्यों और सात केंद्र शासित प्रदेशों का एक संघ है, जिसमें केंद्र सरकार और राज्यों के बीच विधायी जिम्मेदारियों का सांविधानिक विभाजन है। हमारे संविधान की सातवीं अनुसूची में समवर्ती सूची केंद्र और राज्य सरकार, दोनों को ऐसे पहलुओं पर कानून बनाने के लिए सशक्त बनाती है, जैसे कि एक राज्य से दूसरे राज्य में संक्रमण को रोकने के लिए या मनुष्य, जानवरों या पौधों को प्रभावित करने वाले संक्रामक रोगों को रोकने के लिए।
महामारियों का प्रसार रोकने के लिए देश में पहली बार महामारी रोग अधिनियम, 1897 लागू किया गया था, जिसे कि मुंबई में बुबोनिक प्लेग का प्रकोप रोकने के लिए लाया गया था। यह केंद्र और राज्यों को इस तरह के रोगों का प्रसार रोकने के लिए कुछ कदम उठाने का अधिकार देता है। अंग्रेजों का बनाया हुआ 123 साल पुराना वह कानून फिर से हमारे बचाव में आ गया है। इस संबंध में राज्यों की गहन सक्रियता के कारण ही देश इस अधिनियम को आगे ला सका है।
कर्नाटक, महाराष्ट्र, दिल्ली और केरल ने कोविड-19 के समय में विभिन्न नियम और सलाहें जारी की हैं। इन्हीं नियमों के जरिये कई राज्यों ने महामारी रोग अधिनियम, 1897 के तहत अपने-अपने क्षेत्रों में लोगों की आवाजाही को नियमित करने, दुकानों के खुलने और बंद होने का समय नियमित करने, सभी निर्माण कार्य तुरंत बंद करने, नाइट क्लबों को बंद करने आदि के लिए अपनी शक्तियों का प्रयोग किया है।
कोविड-19 भारत सरकार द्वारा संभाली जाने वाली पहली अखिल भारतीय प्राकृतिक आपदा है। वर्तमान तालाबंदी केंद्र सरकार द्वारा आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत की गई है। हमारे संविधान की सातवीं अनुसूची ‘आपदा’ के पहलू पर मौन है। लॉकडाउन को प्रभावी बनाने का विधिक आधार संविधान की समवर्ती सूची की 23 वीं प्रविष्टि है, जो सामाजिक सुरक्षा और सामाजिक बीमा के बारे में बात करती है।
इस अधिनियम के आधार पर केंद्र सरकार के पास भारत में कहीं भी किसी भी प्राधिकरण को आपदा प्रबंधन में सुविधा या सहायता के लिए कोई भी निर्देश जारी करने की विशेष शक्तियां हैं। केंद्र सरकार और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा जारी किए गए ऐसे किसी भी निर्देश का केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा पालन किया जाना आवश्यक है।
केंद्र सरकार ने लॉकडाउन की अधिकांश अवधि में कई नियमों को लागू किया है, जबकि ये पहलू राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। दूसरी ओर राज्यों को आर्थिक रूप से कमजोरी महसूस हो रही है। कई राज्य इस बारे में स्पष्ट नहीं है कि वे सरकारी कर्मचारियों के वेतन का भुगतान कब तक जारी रख सकते हैं। लॉकडाउन के मद्देनजर कोविड-19 में होने वाला अतिरिक्त खर्च तनाव का एक और कारण है।
कोविड-19 का मुकाबला करने के लिए हमारे प्रयासों में संघवाद यानी हमारे संविधान में बनाए गए बुनियादी संघीय ढांचे को हर कीमत पर संरक्षित रखा जाना चाहिए। दो कानून यानी महामारी रोग अधिनियम, 1897 और आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 को केंद्र सरकार द्वारा राज्यों के क्षेत्रों में दखल अंदाजी करने के कवर के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
सभी संसाधनों को केंद्र और राज्यों के बीच संविधान के अनुसार साझा किया जाना चाहिए, ताकि राज्य सरकारें केंद्र के दिशा-निर्देशों को प्रभावी ढंग से लागू कर पाएं। कोरोना से मुकाबला करने में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मजबूत करने में केंद्र की महत्वपूर्ण भूमिका है।
एक और खतरनाक स्थिति जो सामने आई है, वह है कि राज्यों के बीच आपस में टकराव हो रहा है। राज्य सरकारों द्वारा अपनी सीमाओं पर यात्रियों से भरी हुई बसों को रोकने के मामले सामने आए हैं। गरीबों पर थोपे जा रहे नियम, सीमाएं और अत्याचारपूर्ण नौकरशाही भयानक है। जबकि कोविड-19 से मुकाबला करने के लिए सहकारी संघवाद तथा राज्यों के बीच सहयोग और समन्वय अपरिहार्य है। (लेखक पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में अधिवक्ता हैं।)