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जलवायु संकट गहराया: अब भी देर नहीं हुई, समाधान संभव

एंड्रयू किंग Published by: Devesh Tripathi Updated Sat, 25 Apr 2026 06:34 AM IST

सार

स्टेट ऑफ द क्लाइमेट रिपोर्ट के अनुसार, भले ही 2025 अब तक के सबसे गर्म वर्षों में से एक रहा हो, पर कुछ ठोस व रणनीतिक कदम उठाकर जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटा जा सकता है।
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जलवायु परिवर्तन - फोटो : Istock


अगर हम 2025 को जलवायु परिवर्तन के चार प्रमुख संकेतकों के नजरिये से देखें, तो तस्वीर और भी स्पष्ट एवं चिंताजनक बन जाती है। पहला संकेतक है कार्बन डाइऑक्साइड। आज वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड औद्योगिक क्रांति से पहले के स्तरों की तुलना में करीब 50 फीसदी अधिक है, जो रिकॉर्ड स्तर है। बड़े पैमाने पर जीवाश्म ईंधनों के इस्तेमाल से भारी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जित हो रही है, जो वायुमंडल में लंबे समय तक बनी रहती है। यानी हर साल जितनी ज्यादा यह गैस उत्सर्जित होगी, उतनी ही तेजी से इसकी सांद्रता बढ़ेगी तथा जलवायु संकट और भी गहराएगा। दूसरा संकेतक है तापमान। 2025 अब तक के सबसे गर्म वर्षों में से एक रहा। इस वर्ष औसत वैश्विक तापमान, औद्योगिक क्रांति से पहले के स्तर से लगभग 1.43 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया।


हैरानी की बात यह है कि पिछले 11 वर्षों में हर साल, तापमान के लिहाज से अपने पहले के सभी वर्षों को पीछे छोड़ता गया है। तीसरा संकेतक है-महासागर और बर्फ। 2025 में, दुनिया के महासागरों में गर्मी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। महासागरों के गर्म होने से ग्लेशियर तेजी से पिघलेंगे और समुद्र का जलस्तर बढ़ेगा। इससे समुद्री जीवों के अस्तित्व के लिए गंभीर संकट पैदा होगा। चौथा संकेतक है-चरम मौसम। 2025 में दुनिया भर में आई कई विनाशकारी मौसमी घटनाएं, इन्सानों द्वारा किए गए जलवायु परिवर्तन के कारण और भी खतरनाक हो गईं। रिपोर्ट में सामने आया है कि ग्रीनहाउस गैसों का बढ़ता उत्सर्जन न केवल चरम मौसमी घटनाओं को अधिक बार ला रहा है, बल्कि उनकी तीव्रता भी पहले से कहीं ज्यादा बढ़ रही है।


ऐसे में, सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन परिस्थितियों में हम क्या कर सकते हैं? 2025 की स्टेट ऑफ द क्लाइमेट रिपोर्ट तुरंत कार्रवाई की जरूरत पर जोर देती है। ऐसे में, सबसे पहली और अहम प्राथमिकता है-उत्सर्जन में कटौती। बेशक, कुछ देश तेजी से डीकार्बोनाइजेशन की दिशा में बढ़ रहे हैं, खासकर नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को अपनाकर, पर इस दिशा में और तेज व निर्णायक कदम उठाने होंगे। कई देशों ने 2050 तक नेट जीरो हासिल करने का संकल्प लिया है। इसका मतलब है-जितनी मात्रा में हम ग्रीनहाउस गैसें उत्सर्जित करें, उतनी ही मात्रा में उन्हें वायुमंडल से हटाएं भी। हालांकि, ऐसा कर लेने भर से जलवायु परिवर्तन अचानक खत्म नहीं हो जाएगा। फिर भी, अगर जीवाश्म ईंधनों पर अपनी निर्भरता को कम और ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में ठोस कटौती की जाए, तो भविष्य को बेहतर बनाया जा सकता है।

- द कन्वर्सेशन
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