चार वर्ष पहले चीन ने प्रदूषण के खिलाफ जंग की घोषणा की थी। चार वर्ष बाद के आंकड़े बता रहे हैं कि चीन शानदार जीत हासिल कर रहा है। खासकर शहरी क्षेत्रों में छोटे प्रदूषित कणों की मात्रा में औसतन 32 फीसदी की कमी आई है। प्रदूषण-विरोधी अभियानों की तेज गति से हालांकि यह सवाल उठा है कि यह लक्ष्य कहीं लोगों के जीवन की कीमत पर तो हासिल नहीं किया गया है। पर चीन अगर प्रदूषण में इस कटौती को बनाए रखता है, तो वहां के निवासियों के स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण सुधार देखने को मिलेंगे और उनके जीवन काल में कुछ महीनों या वर्षों की बढ़ोतरी हो जाएगी।
चीन इस उपलब्धि तक कैसे पहुंचा? दरअसल प्रधानमंत्री ने मार्च 2004 में यह महत्वाकांक्षी घोषणा की थी कि गरीबी के खिलाफ छेड़ी गई जंग की तरह हम प्रदूषण के खिलाफ भी लड़ाई शुरू करेंगे। उनके उस भाषण से कुछ महीने पहले चीन ने एक राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता कार्ययोजना जारी की, जिसमें सभी शहरी इलाकों में प्रदूषित कणों की मात्रा कम से कम दस फीसदी और कुछ शहरों में उससे ज्यादा घटाने की जरूरत बताई गई थी। बीजिंग में प्रदूषण 25 फीसदी कम करना जरूरी था और उस शहर ने उसके लिए अलग से 120 अरब डॉलर की राशि निर्धारित कर दी।
इन लक्ष्यों तक पहुंचने के लिए चीन ने बीजिंग सहित देश के सबसे प्रदूषित इलाकों में नए कोयला आधारित बिजली संयंत्रों को प्रतिबंधित किया। मौजूदा संयंत्रों से कहा गया कि वे अपना उत्सर्जन घटाएं, और ऐसा नहीं करते, तो प्राकृतिक गैस का उपयोग करें। बीजिंग, शंघाई और ग्वांगझू समेत सभी बड़े शहरों ने सड़कों पर कारों की संख्या सीमित कर दी गई। चीन ने लोहा और इस्पात बनाने की अपनी क्षमता भी घटा दी और कोयला खदानें बंद कर दीं।
उसके द्वारा उठाए गए कुछ कदम तो असाधारण या आक्रामक थे। मसलन, पर्यावरण संरक्षण मंत्रालय ने पिछली गर्मियों में 143 पृष्ठ की 'आपात योजना’ जारी की, जिसमें घरों व व्यावसायिक संस्थानों में सर्दियों के मौसम में गर्माहट के लिए उपयोग किए जाने वाले कोयले के बॉयलर हटाने की योजना शामिल थी, हालांकि सभी जगह बॉयलरों के विकल्प उपलब्ध नहीं थे। नतीजतन गृहस्वामियों, व्यवसायियों और छात्रों को सर्दियों में ठिठुरना पड़ा। शोध के नतीजे बताते हैं कि चीन की प्रदूषण-विरोधी जंग ने जीवन प्रत्याशा में अप्रत्याशित बढ़ोतरी की नींव रखी है। इस पद्धति को लागू कर वायु प्रदूषण में कमी बरकरार रखने पर नागरिकों की औसत आयु में 2.4 वर्ष की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।
बीजिंग के लगभग दो करोड़ निवासियों की उम्र में 3.3 वर्ष, जबकि शिजियाजुयांग में 5.3 वर्ष और बाओडिंग में 4.5 की बढ़ोतरी का अनुमान है। जीवन प्रत्याशा में यह सुधार सभी उम्र के लोगों द्वारा महसूस किया जाएगा, न कि केवल युवा और बुजुर्गों द्वारा।
अमेरिकी स्वच्छ वायु कानून को वायु प्रदूषण के लिहाज से बेहतर माना जाता है। पर अमेरिका को प्रदूषण में 32 फीसदी कटौती का लक्ष्य हासिल करने में बारह वर्ष लगे, जबकि चीन ने यह लक्ष्य मात्र चार वर्षों में हासिल कर लिया। पर चीन में वायु प्रदूषण का स्तर अब भी उसके अपने मानकों तथा सुरक्षित स्वास्थ्य मानकों के विश्व स्वास्थ्य संगठन की सिफारिशों से ज्यादा है। इसकी भी अनदेखी नहीं करनी चाहिए कि कम्युनिस्ट चीन ने प्रदूषण के खिलाफ जंग अमेरिका की तरह बाजार आधारित नियम अपनाकर नहीं, बल्कि अतिवादी तौर-तरीके अपनाकर जीती है।