चीन में असंख्य फैक्टरियां हैं, जो बेशुमार चीजें बनाती हैं। हालांकि अमेरिका के साथ छिड़े व्यापार युद्ध के कारण उसका सबसे बड़ा उपभोक्ता अब उससे पहले जैसी चीजें नहीं खरीदता। ऐसे में, चीन नए खरीदार ढूंढ रहा है। इसी सप्ताह उसने एशिया-प्रशांत क्षेत्र में मुक्त व्यापार क्षेत्र स्थापित करने की अपनी कोशिशें फिर शुरू कीं। अगर वह अपने उद्देश्य में सफल होता है, तो यह समझौता उसके लिए ऑस्ट्रेलिया से भारत तक मुक्त व्यापार क्षेत्र खोल देगा। वह चीन, जापान और दक्षिण कोरिया में व्यापार शुल्क कम करने के सिलसिले में भी बात कर रहा है।
चीनी अर्थव्यवस्था की सेहत दांव पर है। पिछले सप्ताह उसकी आर्थिक विकास दर पिछले तीन दशक में सबसे कम दर्ज की गई। इसकी एक वजह यह है कि ट्रंप प्रशासन के साथ चल रहे व्यापार युद्ध के कारण उसका निर्यात क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। इससे बचने के लिए चीन स्थित विदेशी कंपनियां अब दूसरे देशों में चले जाना चाहती हैं। चूंकि निकट भविष्य में इस समस्या का समाधान नहीं दिखता, ऐसे में चीन को हर हाल में अपनी उत्पादित वस्तुओं के लिए नया बाजार चाहिए।
ग्वांग्झू स्थित जिनान यूनिवर्सिटी में इंटरनेशनल रिलेशन्स के प्रोफेसर चेन डिंगडिंग कहते हैं, 'अमेरिका की जगह लेना मुश्किल है, पर आपको कोशिश करनी होगी और अपने में विविधता लानी होगी। हम हमेशा के लिए अमेरिका पर निर्भर रहना नहीं चाहते।' पर चीन के लिए दूसरे देशों से व्यापारिक समझौता करना आसान काम नहीं है। वह जिन देशों के साथ नए कारोबारी रिश्ते बनाना चाहता है, वे देश चीन के इरादे के प्रति चिंतित हैं।