लॉस एंजेल्स अपने फिल्म स्टूडियो और फिल्म उद्योग के प्रसिद्ध सम्मान समारोहों के लिए मशहूर है, तो ओरलैंडो में मनोरंजन पार्क और रिसॉर्ट होटल हैं। मगर अब चीन का एक समृद्ध उद्यमी अपने देश के सबसे खूबसूरत तटीय शहर किंगदाओ में इसी तर्ज पर अपना फिल्मी साम्राज्य खड़ा करने की तैयारी में है। डालियान वांडा ग्रुप के चेयरमैन एवं सार्वजनिक कारोबारी कंपनियों के सबसे धनी निवेशक माने जाने वाले वांग जियानलिन ने 'किंगदाओ ओरिएंटल मूवी महानगर' विकसित करने की घोषणा की है, जिसकी लागत 4.9 अरब से लेकर 8.2 अरब डॉलर आएगी। इसमें फिल्म स्टूडियो, रिसॉर्ट होटल, एक इनडोर एम्यूजमेंट पार्क, तीन हजार दर्शकों की क्षमता वाला मूवी थियेटर और यहां तक कि एक अस्पताल भी होगा।
इस समारोह में निकोले किडमैन, जॉन ट्रावोल्टा, लियोनारडो डीकैपरिओ जैसी कई फिल्मी हस्तियों की मौजूदगी से स्पष्ट है कि चीन फिल्म-निर्माण के क्षेत्र में भी सिरमौर बनने को प्रयासरत है। डालियन वांडा पिछले वर्ष ही एएमसी इंटरटेनमेंट को 2.6 अरब डॉलर में खरीद चुके हैं; यह अमेरिकी फिल्म बाजार में चीन का अब तक का सबसे बड़ा सौदा है। वांग कहते हैं, 'चीन की बॉक्स ऑफिस से होने वाली कमाई 2018 तक उत्तरी अमेरिका को पीछे छोड़ देगी और 2023 तक उसकी दोगुना हो जाएगी। इसलिए वैश्विक फिल्म उद्योग का भविष्य चीन में है।' उनकी कंपनी डालियन वांडा मूवी साउंड सेट शृंखला का निर्माण करेगी और हॉलीवुड के चार सबसे बड़े फिल्म एजेंटों की मदद से फिल्मी सितारों के साथ अनुबंध करेगी, ताकि साल में 30 विदेशी फिल्में बनाई जा सकें। इसके अलावा कंपनी की 50 घरेलू कंपनियों के साथ अनुबंध की भी योजना है, ताकि वर्ष में सौ फिल्मों एवं टेलीविजन कार्यक्रमों का निर्माण किया जा सके।
सरकार नियंत्रित चीनी फिल्म एसोसिएशन के अध्यक्ष ली क्विंकौन बताते हैं कि किंगदाओ परियोजना निवेश एवं स्तर के मामले में अभूतपूर्व है। यह इतिहास रचेगी, क्योंकि यह चीन के फिल्म उद्योग के उच्च स्तर एवं विकास के भविष्य का प्रतिनिधित्व करती है।
वांग ने हर वर्ष किंगदाओ में एक वार्षिक फिल्मोत्सव के आयोजन की भी घोषणा की है, जो 2016 से शुरू होगा। इसमें एक बड़ा पुरस्कार समारोह होगा। लेकिन रविवार की योजना के मुताबिक फिल्म निर्माण के पहलुओं को उसके आसपास बनने वाले रियल एस्टेट प्रोजेक्ट ने बौना साबित कर दिया। वांग ने 14 अरब डॉलर की योजना बनाई है, जिसमें आठ रिसॉर्ट होटल, एक विशाल शॉपिंग मॉल, तीन सौ सीटों वाला एक नौका क्लब, कई अपार्टमेंट टावर, समुद्र के किनारे रेस्तराओं की कतार एवं मशहूर हस्तियों के मोम के पुतलों का संग्रहालय बनाने की योजना है। इसके अलावा 20 मूवी साउंड सेट एवं एम्यूजमेंट पार्क भी।
अपने मनोरम समुद्रतटीय जलवायु के लिए प्रसिद्ध किंगदाओ बींजिंग तथा संघाई के बीच स्थित है, जो कुछ बेशकीमती अचल संपत्तियों के लिए भी मशहूर है। लेकिन जैसा कि चीन में हर जगह है, सभी जमीन का मालिक वहां की सरकार है। इसलिए कम कीमत पर जमीन पाना और उस पर निर्माण की अनुमति हासिल करने के लिए स्थानीय अधिकारियों का सहयोग आवश्यक है। एक ऐसे शहर में, जहां छोटे से भूखंड के लिए भी ऊंची बोलियां लगती हैं, लगता है कि वांग की नजर स्थानीय नेताओं का दिल जीतने पर है। वांग ने बताया, ‘यह प्रोजेक्ट 929 एकड़ में बनेगा, जो शहर के बाहरी इलाके में विकसित किया जाएगा।’
कुछ वर्ष पहले तक चीन में स्थानीय शासन से सस्ते में शहरी जमीन का बड़ा भूखंड हासिल करने का सबसे उत्तम उपाय ऑटो असेंबली प्लांट निर्माण के लिए सहमति जताना था। इसने चीन में शताधिक ऑटो कंपनियों के विकास में योगदान दिया। लेकिन पिछले पांच वर्षों से स्थानीय शासन ने बीजिंग के निर्देश पर नियम बदल दिया है और अक्षय ऊर्जा कंपनियों को शहर के बाहरी हिस्सों या उपनगरों में तकरीबन मुफ्त में जमीन दे रहा है। इससे सौर पैनलों एवं विंड टरबाइन (पवन चक्की) के उत्पादन में अप्रत्याशित रूप से मदद मिली है। यही वजह है कि चीन इन दोनों का सबसे बड़ा उत्पादक बन गया है।
फिल्मी महानगर योजना बताती है कि चीन एक बार फिर अपनी दिशा बदल सकता है और सांस्कृतिक विकास एवं उपभोक्ता उद्योगों से जुड़ी परियोजनाएं डेवलेपरों के भूखंड प्राप्त करने का नया जरिया बन सकती हैं। देश के नए प्रधानमंत्री ली केचियांग ने उपभोक्ता क्षेत्र के विकास एवं निवेश खर्च पर अपनी निर्भरता सीमित करने के एक व्यापक प्रयास का वायदा किया है।
किंगदाओ कॉम्प्लेक्स परियोजना नौका क्लब के शामिल होने के कारण विशेष रूप से उल्लेखनीय है। लेकिन बीजिंग के अधिकारियों को भय है कि अगर ज्यादा नौका क्लब खोलने की अनुमति दी जाएगी, तो देश में धनी और निर्धनों के बीच आय का अंतर और बढ़ जाएगा, जो फिलहाल सरकारी आंकड़ों के मुताबिक विश्व में सबसे ज्यादा है।
अपने इस प्रोजेक्ट के जरिये वांग ने एक सूक्ष्म संकेत दिया है कि अन्य लोगों को भी चीन के विशाल बाजार पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, जो एक ऐसा देश है, जिसने ब्रेड पिट की सेवन ईयर्स इन तिब्बत जैसी फिल्म पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी, क्योंकि इसमें मानवाधिकार उल्लंघन एवं जातीय अल्पसंख्यकों के साथ चीन के व्यवहार की आलोचना की गई है। वह कहते हैं, ‘विश्व फिल्म उद्योग के जिन लोगों को चीन की ताकत का सबसे पहले एहसास हुआ, वही सहयोग करने भी पहले आगे आए हैं और मुनाफे का स्वाद भी उन्हें ही पहले मिलेगा।'