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सर्वोपरि आभूषण है उत्तम चरित्र

Fri, 27 Sep 2013 08:40 PM IST
शिवकुमार गोयल
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आदि शंकराचार्य देश भर का भ्रमण कर लोगों को ज्ञानोपयोगी उपदेश दिया करते थे। एक बार उन्होंने कहा, जीवन में चार कल्याणकारी बातों का होना बड़ा दुर्लभ है। पहला प्रिय वचन सहित दान, दूसरा अहंकार रहित ज्ञान, तीसरा क्षमायुक्त वीरता और चौथा त्यागपूर्वक निष्काम दान। धन, यौवन और आयु विद्युत की भांति अत्यंत चंचल होते हैं। ये नाशवान हैं, अतः इस जन्म में प्राप्त धन, यौवन और आयु का सदा सदुपयोग करना चाहिए। प्राणों पर बन आने पर भी पापाचरण से दूर रहना चाहिए। सद्कर्मों में प्रवृत्त रहकर ही मानव जीवन सफल बनाया जा सकता है।
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जीवन में व्यक्ति का सर्वोत्तम आभूषण क्या है-इसके उत्तर में उन्होंने बताया कि उत्तम चरित्र ही सर्वोपरि आभूषण है। जो सदाचारी और विनयी है और सत्य वचन बोलता है, उसमें सभी प्राणियों को वश में करने की क्षमता होती है। वह व्यक्ति अंधा नहीं होता, जो आंखों से रहित है, बल्कि अंधा वह है, जो आंखें रहते हुए भी निंदित और धर्मविरुद्ध कार्य करता है। इसी तरह बधिर वह है, जो हितकारी बात नहीं सुनता और गूंगा वह है, जो प्रिय वचन नहीं बोलता। उन्होंने आगे कहा, यदि तुममें मोक्ष की इच्छा है, तो विषयों को विष के समान दूर से त्याग दो और भगवतभक्ति में लीन रहकर मानव जीवन को सार्थक बनाओ।
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