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नाम जाप की महिमा

Fri, 21 Aug 2015 03:06 AM IST
राजेंद्र शर्मा
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प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले से अपने भाषण में गरीब-गरीबी पर चिंता क्या जता दी, लोग इसकी भी आलोचना पर उतर गए। यह तो हद है। आलोचक कह रहे हैं कि मोदी जी ने अपने भाषण में बयालीस बार गरीब और गरीबी का जिक्र किया। तो इसमें भला क्या बुराई है? क्या वे गरीबों की बात भी न करें?
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बताया जा रहा है कि कोई अगर गरीबों का जरूरत से ज्यादा नाम ले, तो समझ लीजिए, दाल में जरूर कुछ काला है। इतना दिखावा करने की जरूरत तो उसी को होगी, जिसके दिल में खोट हो। कोई यदि बहुत कसमें खाए, बहुत भरोसा दिलाए, बहुत वायदे करे, तो सावधान हो जाना चाहिए कि जरूर धोखा करेगा।मतलब निकलने के बाद पलट कर भी नहीं देखेगा। जिस गरीब के नाम की रट लगाए है, उसे पहचानेगा भी नहीं।

इन आलोचकों को कोई कैसे समझाए कि प्रधानमंत्री ने जाप सिर्फ गरीब और गरीबी का ही नहीं किया है। अगर उन्होंने बयालीस बार गरीब-गरीबी जपा है, तो अड़तीस बार सवा अरब की टीम इंडिया का भी नाम लिया है। क्या कोई सवा सौ करोड़ की टीम इंडिया को भी ठग सकता है? ऐसे आरोप लगाने वाले नाम जाप की महिमा से अनजान हैं।
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ऊपर वाला हो या नीचे वाला, सब को खुश करने का शर्तिया उपाय एक ही है-नाम जाप। जब सिर्फ नाम जाप से सब कुछ सध जाता हो, तो कोई कुछ और करने के चक्कर में ही भला क्यों पड़े? वैसे भी गरीबी दूर करने के इतने उपाय पहले की सरकारों ने किए, गरीबी मिटी क्या? अब नाम जाप कर देखने में क्या हर्ज है?

हां! एक बात समझ में नहीं आई कि जिस देश में सहस्रनाम जाप का चलन हो, वहां पचास बार से भी कम में गरीबी का नाम लेकर गरीबों से कुछ भी पाने की आशा कैसे की जा सकती है? लेकिन, हो सकता है कि प्रधानमंत्री अजपा-जाप वाले हों। बयालीस बार जो सुनाई पड़ा है, वह सिर्फ ऊपरी छोर है, उन्होंने जरूर मन ही मन गरीबों को करोड़ों बार याद किया होगा! हद है कि गरीबों की इतनी चिंता करने वाले आदमी पर शक किया जा रहा है!
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