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बदल रही है समाज की सोच

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महिला सशक्तिकरण को लेकर समाज में आई जागरूकता के मद्देनजर राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य चारू वली खन्ना से प्रियंवदा सहाय ने बातचीत की-
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प्र- महिला सशक्तिकरण, सुरक्षा और समानता को लेकर सामाजिक वस्तुस्थिति क्या है, और इसे बदलने की शुरुआत कहां से होनी चाहिए?

इसमें शक नहीं कि महिलाओं के प्रति समाज में सोच बदल रही है। सरकार और समाज के प्रयास से ही यह अपेक्षित परिवर्तन आ रहा है। हालांकि काफी प्रयासों के बावजूद अब भी महिला उत्पीड़न और यौन हिंसा की घटनाएं कम नहीं हो रही हैं। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस से ठीक पहले यौन उत्पीड़न की कई घटनाएं जिस तरह सामने आईं, वे दुखद थीं। इसलिए महिलाओं के सम्मान के मामले में सबसे पहले परिवार से ही कदम बढ़ाना होगा। तभी तो बाहर भी स्त्रियों के साथ मर्यादा से पेश आएंगे।

प्र- महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सरकार के प्रयासों से आप कितनी संतुष्ट हैं?
दिसंबर, 2012 में चलती बस में लड़की के साथ दुष्कर्म का मामला उजागर होने के बाद सरकार ने जो कदम उठाए हैं, वे सराहनीय रहे हैं। पहली दफा आम जन की मांग पर सरकार ने सभी पहलुओं पर ध्यान दिया है। ऐसा भी नहीं कह सकते कि कानून बनाने के लिए सरकार ने लंबा समय लिया है। हालांकि इस संवेदनशील मसले पर कामयाबी हासिल करने के लिए समाज, सरकार और कानून का तालमेल जरूरी है। मेरा मानना है कि सभी महिला राजनेताओं को राजनीति, पार्टी और धर्म को छोड़कर एक साथ आगे आकर पहल करनी चाहिए। महिला सुरक्षा को लेकर सरकार को अब भी बहुत कुछ करने की जरूरत है।
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प्र- क्या दिल्ली में दिन ढलने के बाद महिलाएं सुरक्षित हैं?
यह सच है कि राष्ट्रीय राजधानी में भी महिलाओं को शाम ढलने के बाद घर से निकलने के लिए दो दफा सोचना पड़ता है। ऐसे में देश के दूसरे हिस्सों में लड़कियों के लिए रात में निकलना कितना जोखिम भरा होगा, इसकी सहज ही कल्पना की जा सकती है। इस भयावह स्थिति से पार पाने के लिए समाज में जागरूकता, शिक्षा के पैटर्न में बदलाव और तकनीक के दुरुपयोग को रोकना जरूरी है। पाठ्यक्रम में बदलाव लाकर महिला सशक्तिकरण के लक्ष्य को काफी हद तक हासिल किया जा सकता है।

प्र- किन राज्यों में महिलाएं ज्यादा तरक्की कर रही हैं?
अगर आंकड़ों की बात करें, तो केरल में महिलाएं दूसरे राज्यों के मुकाबले जीवन के हर क्षेत्र में ज्यादा तरक्की कर रही हैं। जबकि उत्तर प्रदेश में महिलाओं की स्थिति खस्ताहाल है। हालांकि प्रदेश के युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से काफी कुछ बदलाव की उम्मीद है। यह आशा है कि वह राज्य में महिलाओं की स्थिति में सुधार के लिए अपनी पत्नी के साथ मिलकर तस्वीर बदलने की कोशिश करेंगे।
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प्र- आपकी नजर में कौन-सी महिला राजनेता अपनी छवि के जरिये समाज में महिलाओं में बदलाव का संदेश दे रही है?
मेरा मानना है कि डिंपल यादव एक ऐसी महिला नेता बनकर उभरी हैं, जो एक राजनीतिक परिवार की बहू होने के बावजूद अपनी छवि से महिलाओं को आधुनिकता के बारे में संदेश दे सकती हैं। उनका यह संदेश सिर पर बिना पल्लू रखे पति के साथ बेहद सहज भाव से कदम से कदम मिलाकर चलने से मिलता है। यह काफी सकारात्मक बदलाव को दर्शाता है। यह महिला नेताओं की रूढ़िवादी छवि को तोड़ने के लिए काफी बेहतर संदेश है। इसके लिए मैंने उन्हें बधाई पत्र भी लिखा है। लेकिन उन्हीं के राज्य में औरतों के हित में बदलाव सबसे ज्यादा जरूरी हैं।
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