रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2022 में देश में फसल बीमा का इस्तेमाल करने वाले महज आठ फीसदी किसान थे, जो वर्ष 2024 में 37 फीसदी हो गए। यह भी पाया गया है कि 11 फीसदी किसान वर्ष 2024 में जैविक उत्पादों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि वर्ष 2022 में यह आंकड़ा दो प्रतिशत ही था। इस रिपोर्ट का यह निष्कर्ष भी महत्वपूर्ण है कि भारत के किसान औपचारिक ऋण की ओर बढ़ रहे हैं। वर्ष 2024 में 36 फीसदी किसानों ने बैंक से कर्ज लिया, जो वर्ष 2022 में केवल नौ फीसदी था। वहीं, 26 फीसदी किसानों ने सब्सिडी वाले सरकारी ऋण का उपयोग किया, जबकि वर्ष 2022 में यह आंकड़ा सिर्फ एक फीसदी था। रिपोर्ट ने यह भी बताया कि भारत के 53 फीसदी किसान फसल चक्रीकरण जैसे टिकाऊ खेती के तरीकों को अपनाने के लिए सरकारी सब्सिडी पर निर्भर हैं। सरकार कई तरह से सहायता प्रदान कर रही है, जैसे-लागत में छूट, कार्बन क्रेडिट से आय बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन आदि।
हाल ही में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, शहरों के बजाय ग्रामीण इलाकों में गरीबी तेजी से कम हुई है। वर्ष 2011-12 में ग्रामीण गरीबी 25.7 प्रतिशत और शहरी गरीबी 13.7 प्रतिशत थी। वर्ष 2023-24 में ग्रामीण गरीबी घटकर 4.86 प्रतिशत और शहरी गरीबी घटकर 4.09 प्रतिशत पर आ गई। वर्ष 2009-10 से 2023-24 के बीच शहरी इलाकों में एमपीसीई 1,984 रुपये से बढ़कर 6,996 रुपये और ग्रामीण इलाकों में यह खर्च 1,054 रुपये से बढ़कर 4,122 रुपये हो गया। निस्संदेह ग्रामीण एवं कृषि विकास के विभिन्न अभियानों के कारण देश में ग्रामीण गरीबी में तेजी से कमी आ रही है। यह पिछले वर्ष 2024 में घटकर पांच प्रतिशत से भी कम रह गई है। साथ ही ग्रामीणों की आमदनी और क्रयशक्ति बढ़ी है।
डिजिटल तकनीक की मदद से बेहतरीन डॉक्टर और अस्पताल भी गांवों से कनेक्ट हो रहे हैं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के जरिये देश के किसानों को तीन लाख करोड़ रुपये की आर्थिक मदद दी जा रही है। बीते दस वर्षों में कृषि ऋण साढ़े तीन गुना बढ़ गए हैं। अब पशुपालकों और मछली पालकों को भी किसान क्रेडिट कार्ड दिए जा रहे हैं। बीते दस वर्षों में फसलों पर दी जाने वाली सब्सिडी और फसल बीमा की राशि को बढ़ाया है। स्वामित्व योजना जैसे अभियान चलाए हैं, जिनके जरिये गांव के लोगों को संपत्ति के दस्तावेज दिए जा रहे हैं। गांव के युवाओं की मुद्रा योजना, स्टार्टअप इंडिया, स्टैंडअप इंडिया जैसी योजनाओं के जरिये मदद की जा रही है। यह भी महत्वपूर्ण है कि डिजिटल इंडिया, शौचालय, स्वच्छ पेयजल और स्वच्छ ईंधन के लिए उज्ज्वला योजना, सभी घरों में बिजली के लिए सौभाग्य योजना जैसे अभियानों से भी ग्रामीण भारत में गरीबी में कमी आ रही है।
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत 80 करोड़ से अधिक गरीब व कमजोर वर्ग के लोगों को मुफ्त खाद्यान्न कार्यक्रम ने भी ग्रामीण भारत में गरीबी को कम करने में अहम भूमिका निभाई है। निश्चित रूप से ग्रामीण भारत में सकारात्मक परिवर्तन, कृषि और ग्रामीण विकास तथा किसानों की आमदनी बढ़ाने के मद्देनजर केंद्रीय बजट 2025-26 एक और आशा की किरण लेकर आया है। ग्रामीण विकास मंत्रालय के लिए इस बार केंद्रीय बजट 2025-26 में 1,88,754 करोड़ का प्रावधान किया गया है। नए बजट में कृषि एवं किसान कल्याण का बजट आवंटन 1.71 लाख करोड़ रुपये किया गया है, जो पिछले वर्ष के बजट की तुलना में 11 फीसदी अधिक है। तमाम सुविधाओं के बावजूद अभी ग्रामीण भारत और किसानों की प्रगति के लिए काफी कुछ करना है। करीब 42 फीसदी किसानों का कहना है कि उन्हें ऑनलाइन विक्रेताओं से पर्याप्त ग्राहक सेवा और लचीला भुगतान का विकल्प नहीं मिलता है। ऐसी कठिनाइयों को दूर करना होगा।