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परिवर्तन तो हुआ

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परिवर्तन तो हुआ
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- डॉ.राजकुमार शर्मा

परिवर्तन तो हुआ
गांव से शहरों तक बेशक
लेकिन अभी बहुत कुछ ऐसा
जो कि नहीं बदला
कई पीढ़ियां जिसकी
भूख, गरीबी में बीतीं
उसी नरक को भोग रहा है
‘नन्हुआ’ अधपगला

‘नत्थू’ बाबा ने जमीन
‘हुल्ला’ की हथिया ली
पास-पड़ोसी रहे देखते
कोई क्यों बोले?
वे दबंग हैं, नेता हैं
थाने में चलती है,
फिर गुंडों से कौन बिगाड़े
कौन जहर घोले?
जिस ‘पुतान’ को बेटे जैसा
पाला ‘हुल्ला’ ने
बुरे वक्त में आस्तीन का
सांप वही निकला

जिसके घर में रोटी है
तो राजनीति भी है
अलग-अलग सबके खेमे
हैं अलग-अलग दल हैं,
गोटों में कट्टे हैं,
कंधों पर बंदूकें हैं,
गांव-शहर अब नहीं,
सिर्फ ईंटों के जंगल हैं।
जहां सिर्फ बारूदी भाषा
में बातें होतीं,
जंगलराज हर तरफ
उनको रोके कौन भला

मनमुटाव नाले-परनाले
घूरे-बठिए पर,
मेड़, कुआं, बोरिंग पर
चलते कांते-भाले हैं।

चार दिनों के बाद
खेत में नंगी लाश मिली
होंठ सिए बैठा ‘झिगुरी’
हम बेटी वाले हैं।
खलिहानों से लांक चुराते
‘छुनुआ’ पकड़ गया,
सुलग उठी दुश्मनी पुरानी
पूरा गांव जला।
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गौरैया
संतोष कुमार तिवारी
1
जिस घर में
चहचहाना छोड़ देती गौरैया
अक्सर उस घर के बच्चे
फुदकना और खिलखिलाकर हंसना भूल जाते हैं।
आप कहीं
अपने बच्चे के
गूंगेपन के लिए
जिम्मेदार तो नहीं.....?
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2
घर का सूना आंगन
सवाल करता....
बच्चे का चेहरा
दुःख और क्षोभ से भरा है
मैंने नोंच डाला कल
गौरैया का घोंसला
मी लॉर्ड मैं गुनहगार हूं
मुझे 'बेघर' होने की सुनाओ
सजा
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