फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स

युद्ध का नया मोर्चा: अब केवल सैन्य तैयारी से ही लड़ाई नहीं... भ्रामक सूचनाओं की बाढ़ को विफल करना जरूरी

अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: ज्योति भास्कर Updated Mon, 02 Jun 2025 05:45 AM IST

सार

सीडीएस का बयान कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सेना का 15 फीसदी वक्त फर्जी खबरों का मुकाबला करने में बर्बाद हुआ, दर्शाता है कि अब युद्ध केवल सैन्य तैयारी से ही नहीं लड़े जा रहे। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धारणा की लड़ाई के अलावा जब भ्रामक सूचनाओं की बाढ़ आती है, तब उन्हें विफल करने की तैयारी भी जरूरी बन जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
जनरल अनिल चौहान, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ - फोटो : ANI


इससे यह भी पता चलता है कि हमें ऑपरेशन सिंदूर के दौरान और उसके बाद भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नैरेटिव की लड़ाई, तो दूसरी ओर मीडिया युद्ध क्यों करना पड़ा। दरअसल, आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया और त्वरित संचार ने गलत सूचनाओं को फैलाने की गति को अभूतपूर्व बना दिया है।


ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित झूठी खबरों ने लोगों की धारणा को प्रभावित करने की साजिश रची, जिसका सामना भारत ने तथ्य-आधारित और संयमित संचार की रणनीति से किया, लेकिन इसकी कीमत भी चुकानी पड़ी। पाकिस्तान के दुष्प्रचार तंत्र द्वारा फैलाई गई भ्रामक सूचनाओं को ही कई देश काफी समय तक सच मानते रहे। वरना ऐसी नौबत ही क्यों आती कि कोलंबिया को पाकिस्तान के साथ सहानुभूति दर्शाने वाले बयान को वापस लेने के लिए राजी होना पड़ा, जब शशि थरूर के नेतृत्व वाले भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने सच्चाई को सामने रखा।


इससे यह भी पता चलता है कि प्रतिनिधिमंडलों को विभिन्न देशों में भेजकर अपना पक्ष रखने का निर्णय कितना जरूरी था और ये दल अंतरराष्ट्रीय समुदाय तक अपनी बात पहुंचाने में सफल भी रहे हैं। बात सिर्फ कोलंबिया या चुनिंदा देशों की नहीं है, ऐसे बहुतेरे देश होंगे, जो पाकिस्तान के झूठे बयानों की असलियत से अब भी अंजान होंगे। यह स्थिति हमें एक गंभीर सबक देती है कि अब युद्ध सिर्फ हथियारों से नहीं, बल्कि सूचनाओं के मोर्चे पर भी लड़े जा रहे हैं।


चूंकि गलत सूचनाओं का प्रभाव केवल सैन्य अभियानों तक सीमित नहीं रहता; यह जनता के मनोबल, अंतरराष्ट्रीय धारणा और राष्ट्रीय सुरक्षा को भी प्रभावित करता है, जनरल चौहान ने उचित ही सूचना युद्ध के लिए एक समर्पित शाखा की जरूरत पर बल दिया है। यह इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि जब सूचनाओं की बाढ़ आती है, तो उन्हें विफल करना भी तैयारी की बात बन जाती है।


ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की सैन्य ताकत और स्वदेशी रक्षा प्रणालियों की क्षमता को तो प्रदर्शित किया ही, साथ ही सूचना युद्ध और साइबर खतरों की गंभीर चुनौतियों को भी उजागर किया। जनरल चौहान का बयान दरअसल हमें इस नए युद्ध क्षेत्र में अपनी तैयारी को और पुख्ता करने के प्रति आगाह करता है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next