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अपनी अंग्रेजी यहां ठीक कराएं

Mon, 13 May 2013 02:54 PM IST
सहीराम
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जी, आजकल स्कूल के बच्चे भी जिद करने लगे हैं कि वे अपनी इंग्लिश पूर्व लॉ मिनिस्टर से ही ठीक कराएंगे। पढ़े-लिखे मां-बाप अपने बच्चों को समझाते हैं कि बेटा, इतनी अंग्रेजी तो हमें भी आती है। पर बच्चे नहीं मानते।
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उनका कहना है कि जैसी इंग्लिश अश्विनी कुमार जी को आती है, वैसी आपको नहीं आती। कुछ समझदार मां-बाप समय के साथ चलने में यकीन रखते हैं, सो वे सीबीआई निदेशक की तरह बच्चों को यह छूट दे रहे हैं कि जाओ, इस्तीफा दे चुके कानून मंत्री से ही अपनी इंग्लिश ठीक कराओ।

और हां, अगर वह घर पर न मिलें, तो कोयला मंत्रालय चले जाना, वहां कोई सेक्रेटरी रैंक का बंदा मिल जाएगा। अगर वहां भी सफलता न मिले, तो सीधे पीएमओ चले जाना।
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बड़े-बड़े अंग्रेजीदां स्कूलों के इंग्लिश टीचर परेशान हैं। बच्चे कह रहे हैं-सर जी, जैसी इंग्लिश अश्विनी कुमार जी को आती है, वैसी आपको नहीं आती। चालू किस्म के कई बच्चे तो टीचर को हूल दे रहे हैं कि सर जी, कॉपी तो मैं पहले ही पूर्व कानून मंत्री से चेक कराकर लाया था। इसमें गलती हो ही नहीं सकती। फिर भी आपने इसमें लाल स्याही क्यों फिरा दी?

इंग्लिश के एक जानकार अपने सामने किसी को कुछ नहीं समझते थे। तंग आकर उनके दोस्तों ने कहा-यार, तुम जो कर रहे हो, वह तुम्हारे लेवल का काम नहीं है, तुम लॉ मिनिस्टिर क्यों नहीं बन जाते? सरकार ने भी एक अति गोपनीय आदेश जारी कर दिया था कि हर विभाग की खतो-किताबत पहले लॉ मिनिस्टर से क्लियर करानी होगी।

बड़े-बड़े अंग्रेजीदां नौकरशाहों ने इस पर ऐतराज किया, तो पीएमओ का जवाब था कि इंग्लिश आपकी धांसू हो सकती है, पर ग्रामर तो वही ठीक करेंगे। वह तो अच्छा है कि लॉ मिनिस्टर ने खुद इस्तीफा दे दिया। वर्ना तमाम अफसरों का बुरा हाल होता।

कायदा तो यही है कि कानून मंत्री को कानून आना चाहिए। कानून का तो जी पता नहीं, पर उन्हें अंग्रेजी इतनी अच्छी आती है कि सीबीआई के अफसर भी अपनी रिपोर्ट पहले उन्हें दिखाते थे कि साहब, ग्रामर की कोई गलती हो, तो ठीक कर दें।

इंग्लिश ग्रामर की उनकी काबिलियत के इतने चर्चे हैं कि अब मिनिस्टरी चले जाने के बाद भी उन्हें कोई गम नहीं है। वह ग्रामर कनसलटेंसी कर सकते हैं। बेरोजगार होने का तो सवाल ही नहीं। बल्कि धंधा यह भी अच्छा चल निकलेगा।
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