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कैमन द्वीपसमूह

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आज ही के दिन, यानी 10 मई, 1503 को क्रिस्टोफर कोलंबस ने नई दुनिया की खोज के सिलसिले में की गई अपनी चौथी एवं अंतिम यात्रा के दौरान पश्चिमी कैरिबियाई सागर में स्थित एक ऐसे निर्जन द्वीप की खोज की थी, जो आज दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा बैंकिंग केंद्र है। यह द्वीपसमूह ब्रिटेन के अधिकार क्षेत्र में है।
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इस द्वीप पर काफी संख्या में समुद्री कछुओं को देखकर कोलंबस ने इस द्वीप का नाम लॉस टॉरटुगास रखा था, लेकिन इस द्वीप पर 1586 में पहुंचने वाले पहले अंग्रेज यात्री सर फ्रांसिस ड्रेक ने इसका नाम केयमन रखा, जो बाद में कैमन हो गया।

यह द्वीपसमूह 17वीं शताब्दी तक लगभग निर्जन ही रहा। बाद में विभिन्न पृष्ठभूमि के लोगों ने वहां अपना घर बनाया, जिसमें समुद्री डाकू, स्पेनिश शरणार्थी, नाविक एवं जमैका के ओलिवर क्रोमवेल की सेना के भगोड़े शामिल थे।
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जमैका के साथ 1670 में की गई मैड्रिड संधि के कारण ब्रिटेन ने इस द्वीप पर आधिपत्य जमाया, लेकिन 1962 तक यह जमैका के उपनिवेश के रूप में प्रशासित होता रहा।

इस ब्रिटिश उपनिवेश की 15 सदस्यीय विधानसभा के लिए प्रतिनिधियों का चयन जनता द्वारा होता है। चुने हुए पांच प्रतिनिधियों को मंत्री बनाया जाता है और कैबिनेट के मुखिया वहां के गवर्नर होते हैं। सरकार के प्रमुख की नियुक्ति गवर्नर द्वारा होती है।

गवर्नर की नियुक्ति ब्रिटेन की महारानी करती हैं। गवर्नर के पास घरेलू मामलों से संबंधित सभी विधायी एवं कार्यकारी अधिकार होते हैं, जबकि विदेशी मामले ब्रिटिश सरकार के अधीन होते हैं।

यह द्वीपसमूह कर मुक्त क्षेत्र (टैक्स हेवन) के रूप में जाना जाता है। यहां की सरकार अपने नागरिकों से कोई प्रत्यक्ष कर नहीं वसूलती, बल्कि अप्रत्यक्ष कर ही उसके राजस्व का साधन है।
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