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सूट-बूट में कहीं चोर आते हैं!

Sun, 31 May 2015 07:54 PM IST
श्याम विमल
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अभी पिछले दिनों संपन्न हुए संसद के बजट सत्र का टेलीविजन पर लाइव शो देखते हुए विपक्ष की बेंच में एक आक्रामक चेहरा देखकर आश्चर्य हुआ था। वह राहुल गांधी थे। करीब छह दशक राज करने वाली कांग्रेस के वर्तमान उपाध्यक्ष एवं अग्रणी सांसद पिछले दिनों जय-पराजय के दुश्चक्र से बाहर होकर अपने बंगले से चोरी-चोरी निकल कर, बुद्ध बनने को नहीं, बल्कि अज्ञात प्रवास करने कुछ हफ्तों के लिए गायब हो गए थे। जब वह गायब हुए थे, तब इसका खूब शोर था कि इतने जरूरी समय में वह कहां और क्यों चले गए। उन्हें अभी नहीं जाना चाहिए था। और लौटने के बाद भी युवराज उतनी ही चर्चा में हैं। उनके आने और सरकार पर हमला बोलने से उन्हीं की पार्टी के कुछ नेता जहां चौंक उठे हैं, वहीं उनके घोषित आलोचकों का कहना है कि हर मुद्दे को लपक लेने से उनकी छवि कहीं विदूषक जैसी न हो जाए।
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लेकिन पिछले दिनों संसद में राहुल गांधी की सक्रियता से यह सर्वज्ञात हुआ है कि वह पुनर्नवा होकर लौटे हैं। उनकी इस बदली हुई छवि से तो कुछ उत्साही लोग यह भी उम्मीद पालने लगे हैं कि वह अपनी राजनीतिक पार्टी को बदल देंगे। राहुल गांधी लौटे हैं यह ज्ञान उपार्जित करके कि देश की राजनीति में सूट-बूट वाले किन्हीं राजनीतिक चोरों ने दिन-दहाड़े देश की भूमि-धन-यश-पदों पर कब्जा कर रखा है।

राहुल बाबा पिछले दिनों बोल रहे थे, चोर तो सुनते हैं, रात के अंधेरे में खिड़की से कूदकर धंधा करने आते हैं, किंतु अब तो दिन में ही सूट-बूट वाले चोर आ जाते हैं। ज्ञान प्राप्त कर आने के बाद भी शायद उन्हें पता नहीं कि दिन के उजाले में घर में घुसने वाले लुटेरे होते हैं, चोर नहीं। फिर चोर भी क्या कहीं सूट-बूट में आते हैं? लेकिन भाषा और शब्दों के इतने बारीक अंतर को समझने की अपेक्षा राजनीतिकों से भला क्यों करें? इतनी छोटी-छोटी बात समझने की अगर उनसे उम्मीद करें, तो उन्हें बार-बार छुट्टियों पर जाना पड़ेगा। ऐसे में उनसे राजनीति क्या खाक होगी?
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