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दरिंदगी और सवाल: माधवी की हत्या का मामला निर्णायक परिणति तक पहुंचना जरूरी, नजीर बने तेलंगाना की अदालत का फैसला

अमर उजाला Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Sat, 25 Jan 2025 05:14 AM IST

सार

तेलंगाना में एक पूर्व सैनिक गुरुमूर्ति द्वारा अपनी पत्नी माधवी की बर्बर तरीके से की गई हत्या स्तब्ध करने और मानवता को शर्मसार करने वाली तो है ही, यह समाज के भीतर छिपी हिंसा की प्रवृत्ति और मानसिक विकृति को भी उजागर करती है। यह वारदात तीन साल पहले दिल्ली में श्रद्धा की उसके कथित प्रेमी द्वारा की गई हत्या की भी याद दिलाती है।
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माधवी हत्याकांड के बाद घटनास्थल की फोटो - फोटो : अमर उजाला


हमारी सामूहिक चेतना को झकझोर देने वाली यह घटना एक समाज के तौर पर हमारी नाकामी को भी दिखाती है और जवाबदेहियों से जुड़े सवाल भी खड़े करती है। बेशक, पति-पत्नी के बीच संबंध एक निजी मामला है, लेकिन क्या सब कुछ इतना यांत्रिक हो चुका है, जिसमें मानवीय संवेदना के लिए समाज और घर में कोई जगह ही नहीं बची है? अगर हत्या की नौबत आ गई, तो जाहिर है कि गुरुमूर्ति और माधवी में पहले भी लड़ाइयां होती रही होंगी। जहां ये लोग रह रहे थे, वहां आसपास के लोगों को भी अब तक कोई भनक नहीं लगी, आज तक किसी ने आवाज नहीं उठाई; आखिर हम किस तरह का एकाकी जीवन जी रहे हैं।


कारण चाहे जो हो, इस घटना से यही जाहिर होता है कि समाज को आत्मचिंतन करने की जरूरत है। घरेलू हिंसा और पारिवारिक तनाव के बढ़ते मामलों के बीच, हमें यह समझने की जरूरत है कि इनका समाधान केवल कड़े कानूनों से नहीं हो सकता। एक समाज के तौर पर हमें घरेलू हिंसा के मामलों को गंभीरता से लेना होगा, भले ही वह अपने नहीं, बल्कि पड़ोस के घर की बात हो। यह अत्यंत आवश्यक है कि माधवी की हत्या का मामला निर्णायक परिणति तक पहुंचे और हत्यारे को ऐसी सजा मिले, जो नजीर बन सके।

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