अपने दूसरे कार्यकाल में भाजपा ने अब तक जो भी कदम उठाया है, उससे पता चलता है कि वह राज्यसभा में बहुमत हासिल करने की जल्दबाजी में है। पांच विफल प्रयासों के बाद आखिरकार बीएस येदियुरप्पा कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस सरकार को हटाने में सफल रहे और राज्य की सत्ता संभाल ली है।
भाजपा अन्य दलों के विधायकों को सामूहिक रूप से या व्यक्तिगत रूप से अपनी पार्टी से अलग कर रही है, जैसा कि गोवा में हुआ, जहां कांग्रेस के 15 में से दस विधायक (दो तिहाई हिस्सा) भाजपा में मिल गए, जिसे दलबदल विरोधी कानून अनुमति देता है। तृणमूल कांग्रेस, तेलुगू देशम पार्टी और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के कुछ विधायक भी भाजपा के खेमे में आ गए हैं, जहां वे अपना भविष्य देखते हैं।