इस बार के अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस की थीम एक ऐसे विषय पर केंद्रित है, जिससे आज जीवन और प्रकृति को समझने-समझाने में सहायता मिल सकती है। जीवन को दो तरह से देखा जाता है, आवश्यकताएं व सुविधाएं। इन दोनों में ज्यादा महत्वपूर्ण आवश्यकताएं हैं, जिसमें पानी, भोजन, हवा आती हैं और दूसरा हिस्सा सुविधाओं से जुड़ी जीवनशैली है। हमारी सोच आज दूसरे पहलू पर ज्यादा केंद्रित है और यही कारण है कि हवा, मिट्टी और पानी की अनदेखी सवाल खड़े करने लगी है।
जीवन के दोनों पहलू अंततः जैव विविधता से जुड़े हैं। मसलन, तमाम तरह के कृषि उत्पाद, फसलें, फल, जड़ी-बूटी ये सब जैव विविधता के प्रताप से हैं। गहराई में जाएं, तो विलासिता के आधार भी जैव विविधता से जुड़े मिलेंगे। पर पेट के सवाल बड़े हैं और उसी से स्वास्थ्य भी जुड़ा है और इन दोनों का आधार जैव विविधता है। उदाहरण के लिए, अगर दुनिया की 90 फीसदी जैव विविधताएं पिछले 100 वर्षों में किसान के खेतों से गायब होती जा रही हों और दूसरी तरफ पालतू जानवरों की आधी से ज्यादा नस्लें खत्म हो चुकी हों, तो यह समझने के लिए काफी है कि 'ऑल इज नॉट वेल'।