कई उत्तर भारतीय राज्यों और शहरों में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) का विरोध हो रहा है, और दक्षिण भारतीय राज्य भी इसका अपवाद नहीं हंै। केरल और पुड्डुचेरी के मुख्यमंत्रियों- क्रमशः पिनरई विजयन और नारायणसामी ने स्वयं इसका विरोध किया है। तमिलनाडु में एम के स्टालिन के नेतृत्व में द्रमुक ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है। दक्षिण में विरोध प्रदर्शन ने तब हिंसात्मक रूप ले लिया, जब कर्नाटक में दो लोगों की मौत हो गई। तेलुगू भाषी दो राज्यों-आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में भी आंदोलन हुए हैं। लेकिन भारतीय जनता पार्टी, दक्षिणपंथी विचारक, सुपरस्टार रजनीकांत समेत कई नामचीन हस्तियां और आम लोग, जिनसे इन पंक्तियों के लेखक ने बातचीत की, इस विरोध प्रदर्शन से खुश नहीं हैं। उनमें से कुछ लोग इन रैलियों और उसके बाद हुई हिंसा के पीछे निहित स्वार्थी तत्वों का हाथ भी देखते हैं।
चेन्नई में छात्रों के एक वर्ग के विरोध प्रदर्शन की रिपोर्टिंग करने वाले एक मीडियाकर्मी का कुछ ऐसा कहना है- 'मैंने विरोध प्रदर्शन करने वाले पांच युवाओं से सीएए और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) का विश्लेषण करने के लिए कहा, तो उनमें से तीन युवाओं को कुछ भी पता नहीं था। उनमें से दो ने बताया कि उन्हें उनके 'सीनियरों' ने बताया कि इस कानून से मुसलमानों को देश से बाहर भेज दिया जाएगा। यदि चेन्नई के एक प्रमुख संस्थान के छात्रों का यह हाल है, तो आप कल्पना कर सकते हैं कि राज्य के अन्य हिस्सों के छात्रों को किस तरह गुमराह किया गया होगा।'
भाजपा की तमिलनाडु इकाई के सचिव के टी राघवन पूछते हैं कि सीएए का कौन-सा हिस्सा भारत के मुस्लिम नागरिकों के खिलाफ है, जैसा कि विपक्षी पार्टियां आरोप लगाती हैं। अपनी पार्टी द्वारा इस कानून के समर्थन में तिरुचिरापल्ली में हुए प्रदर्शन में भाग लेने वाले राघवन कहते हैं वे सिर्फ राजनीतिक लाभ हासिल करने और भाजपा के खिलाफ लोगों को भड़काने के लिए इस मुद्दे पर झुठे अभियान में लोगों को शामिल कर रहे हैं। राघवन कहते हैं कि सत्तारूढ़ भाजपा सरकार केवल अपने सभी चुनावी वादों को लागू कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट कर दिया है कि यह कानून किसी भारतीय को बुरी तरह से प्रभावित नहीं करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुस्लिमों का वोट सुरक्षित करने के लिए द्रमुक, कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टियां दोहरा खेल खेल रही हैं।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा ने दृढ़ता से कहा कि राज्य में सीएए को लागू किया जाएगा। साथ ही उन्होंने मुस्लिम समुदाय को आश्वस्त करते हुए कहा कि राज्य की भाजपा सरकार द्वारा उनके हितों की रक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा कि मैं मुस्लिम भाइयों से शांति की अपील करता हूं। आपके हितों की रक्षा हमारी जिम्मेदारी है। सीएए से आपको नुकसान नहीं होगा। इस देश के लोगों को सीएए से कोई खतरा नहीं है। यह कानून दूसरे देशों के नागरिकों के लिए है, जो भारत की नागरिकता चाहते हैं। सीएए धर्म के आधार पर लोगों में भेदभाव नहीं करता है। नागरिकता राष्ट्रीयता के आधार पर दी जाती है, न कि धर्म या जाति के आधार पर।
दिलचस्प बात यह है कि सिर्फ येदियुरप्पा ही नहीं, दक्षिण के और भी मुख्यमंत्री सीएए का समर्थन करते हैं। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एडापड्डी के. पलानीस्वामी भी इसका समर्थन करते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि यह कानून सिर्फ शरणार्थियों के लाभ के लिए लाया गया है और भारतीय नागरिकों को चिंता करने की जरूरत नहीं है। सीएए के समर्थन का बचाव करते हुए उन्होंने द्रमुक अध्यक्ष स्टालिन पर भी निशाना साधा। श्रीलंकाई तमिलों को नागरिकता दिए जाने के द्रमुक की मांग पर पलानीस्वामी ने कहा कि अन्नाद्रमुक ने श्रीलंकाई तमिल शरणार्थियों के लिए दोहरी नागरिकता का समर्थन किया है। हमने इस संदर्भ में केंद्र को एक ज्ञापन सौंपा है। जब द्रमुक 13 साल तक केंद्र में गठबंधन सरकार का हिस्सा थी, तब इस मुद्दे को क्यों नहीं उठाया, स्टालिन को इसका जवाब देना चाहिए।
जब विरोध प्रदर्शन के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों में पत्थरबाजी हुई, तो शीघ्र ही राजनीतिक पार्टी शुरू करने वाले अभिनेता रजनीकांत ने ट्वीट कर कहा कि हिंसा किसी भी समस्या के समाधान का उपाय नहीं होना चाहिए। भारत के लोगों को राष्ट्र की सुरक्षा और कल्याण के लिए एकजुट और सतर्क होना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि देश में जारी हिंसा से उन्हें पीड़ा हुई है। उनके ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए नाम तमिलार काची (एनएमके) पार्टी के संस्थापक सीमैन ने कहा कि रजनीकांत को सीएए पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। रजनीकांत के ट्वीट का संकेत करते हुए उन्होंने आगे कहा कि यह उन छात्रों का अपमान है, जो सीएए का विरोध कर रहे हैं। जबकि स्टालिन के बेटे, अभिनेता, द्रमुक के युवा इकाई के नेता उदयनिधि स्टालिन ने रजनीकांत पर निशाना साधते हुए कहा कि आइए, हम सब स्टालिन के नेतृत्व में सीएए-विरोधी आंदोलन में हिस्सा लें। उन संपन्न और बूढ़े लोगों को घर पर छोड़ दें, तो वैध अधिकारों के लिए आंदोलन की आलोचना करते हैं, और उसे हिंसा बताते हैं।
आम लोगों का एक बड़ा वर्ग सीएए के समर्थन में है और उनका मानना है कि यह भारतीय मुसलमानों के खिलाफ नहीं है। यह सिर्फ अवैध विदेशियों के प्रवेश को रोकता है। तमिलनाडु एकथुवा प्राच्या जमात के राज्य अध्यक्ष एम इब्राहिम ने सीएए का समर्थन करते हुए कहा है कि मुस्लिम समुदाय के हमारे भाई-बहनों को समझना चाहिए कि भारतीय मुसलमानों को सीएए से चिंतित होने की जरूरत नहीं है। मैं उनसे आग्रह करूंगा कि वे कोई निष्कर्ष निकालने से पहले कानून के प्रावधानों को पढ़ें। मैं उनसे झूठे प्रचार में न फंसने की अपील भी करूंगा। कांग्रेस, द्रमुक और स्वयंभू बुद्धिजीवी हमें गुमराह कर रहे हैं। हम सबको अपने देश की बेहतरी के लिए एकजुट होकर काम करना चाहिए।