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उत्तम है उत्तर प्रदेश

Tue, 03 Jun 2014 08:07 PM IST
अंशुमाली रस्तोगी
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आजकल जिसे देखो, वह उत्तर प्रदेश की बुराई-खिंचाई में लगा है। जाने क्या-क्या और कैसा-कैसा कहा जा रहा है। अखबारों और टेलीविजनों पर राज्य की कानून-व्यवस्था पर तीखी बहस छिड़ी है। कोई उत्तर प्रदेश को ‘अपराध प्रदेश’ बता रहा है, तो कोई ‘जंगल राज’ की संज्ञा दे रहा है। कुछ के पेट में केवल इसीलिए दर्द है, क्योंकि उत्तर प्रदेश में बत्ती गुल है।
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जबकि ऐसा कुछ नहीं है। मैं स्वयं उत्तर प्रदेश का सैंतीस साल पुराना निवासी हूं। मेरे परदादा से लेकर दादा तलक उत्तर प्रदेश में रहे हैं। न कभी उन्हें राज्य सरकार से शिकायत रही और न ही मुझे है। मुझे सरकार के भीतर-बाहर ‘शिकायत’ जैसा कुछ लगता ही नहीं, तो फिर क्यों करूं?

एकदम सबकुछ ‘चकाचक’ तो चल रहा है उत्तर प्रदेश में। अब हिंसा-अपराध का क्या है, यह तो कभी भी, कहीं भी घट सकते हैं। बेचारे मुख्यमंत्री जी या उनके अधिकारी अब चप्पे-चप्पे पर तो मौजूद रह नहीं सकते! इत्ता बड़ा प्रदेश है। इत्ते सारे शहर-गली-मोहल्ले-गांव-कस्बे-सड़कें-चौराहें हैं। तो अगर कुछ छिटपुट हो जाता है, तो भला इसमें सरकार या मुख्यमंत्री जी क्या करें? अपराधियों के साथ-साथ अधिकारियों तक को इत्ता ‘टाइट’ किया हुआ है, फिर भी दो-चार दगा तो दे ही जाते हैं।
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यों भी, इत्ते बड़े प्रदेश को अकेले दम पर संभालना हंसी-ठिठोली नहीं है प्यारे। कुछ लोग बत्ती को लेकर ही हाय-हाय कर रहे हैं। अरे भई क्यों कर रहे हो हाय-हाय? अच्छी-खासी तो बत्ती आ रही है! दिनभर में अगर 17-18 घंटे बत्ती नहीं भी आती, तो इत्ता दुखी क्यों हो? सरकार कने जित्ती बत्ती होगी, उत्ती ही तो मिलेगी। बत्ती या सरकार को दोष देने से अच्छा है, गर्मी को दीजिए। गर्मी को बोलिए 40-44 के पार पारे को न लेकर जाया करे। हम जनता को ‘प्रोब्लम’ होने लगती है।

मेरी मानिए, उत्तर प्रदेश को गलत निगाह से देखने वाले चश्मे का नंबर बदल डालिए। उत्तर प्रदेश में केवल ‘समाजवादी राज’ है। एक दफा यहां बसकर तो देखो- सब मालूम पड़ जाएगा!
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