हे चाय-चौपाल के बहाने वोट की जुगाड़ करने वालो, बड़े फन्ने खां बने फिरते हो न! लेकिन अब आपको यह जानकर सहन करने से कहीं अधिक दुख होगा कि भले ही हमने आपके पहले वाले दावे का तोड़ न निकाला हो, पर आपकी चाय-चौपाल का तोड़ जरूर निकाल लिया है। आप जानना चाहते होंगे कैसे? सो मित्रो, कल से आपकी हर चाय की चौपाल के ठीक सामने ठांय-चौपाल खोलने का हमारी पार्टी ने निर्णय लिया है, ताकि ईंट का जवाब पत्थर से नहीं, बल्कि पत्थरों से दिया जा सके।
बरसों से खून के आंसू पी रही जनता को अगर पीना ही है, तो चुनाव के दिनों में भी वह बेचारी चाय पीकर क्यों अपना मुंह फूंके? आप सबको बहला-फुसलाकर उल्लू बना सकते हो, पर चाय चौपाल के बहाने हमारी प्यारी जनता को कम से कम उल्लू नहीं बना सकते। न ही आपके द्वारा हम उसे उल्लू बनने देंगे। जनता को उल्लू बनाने का हमारा पुश्तैनी हक है। छि! चुनाव के दिनों में भी चाय! हाय! हाय!
हे मेरे देश के वोटरो, ये चाय वाले आपको सरासर ठग रहे हैं कि चाय से चाह बढ़ती है। हम देश की जनता को साफ-साफ सचेत करते हुए वैधानिक चेतावनी जारी करते हैं कि इनकी चाय से सावधान! चाय पीने से कभी न ठीक होने वाली गैस्टिक की शर्तिया प्रॉब्लम हो सकती क्या, होती देखी गई है। देश के सरकारी अस्पतालों में जितने भी मरीज आजकल आ रहे हैं, उनमें अस्सी प्रतिशत चाय के कारण हुई गैस्टिक के ही आ रहे हैं।
वैसे तो आप समझदार हैं, पर चुनाव के दिनों में बड़े से बड़ा तीस मार खां वोटर भी गच्चा खाता आया है। रही बात पीने की, तो चाय क्यों, पीना ही है, तो हमारी चौपाल पर आइए। आपके लिए हमारी चौपाल चुनाव के आखिरी क्षणों तक खुली रहेगी। माल ऐसा कि आप एक ही घूंट में वाह-वाह कर उठें।
बस, एक बार हमारी चौपाल पर आकर देखिए तो सही, हम आपको विश्वास दिलाते हैं कि एक बार जो हमारी चौपाल पर आ गए, तो अपने माल की कसम कि आप वहां से चुनाव संपन्न होने के बाद भी उठने का नाम लें। हमारी चौपाल पर उनकी चौपाल की तरह मुंह नहीं जलेगा, बल्कि जले हुए दिल तक को गारंटिड राहत मिलेगी। चंद महीनों के लिए ही सही, जनता के पेट की भूख के सारे कीड़े मस्त होकर सो जाएंगे! और जनता को चाहिए भी क्या?