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आयुष्मान भारत बदल देगा तस्वीर

आर राजगोपालन, वरिष्ठ पत्रकार Updated Tue, 25 Sep 2018 06:09 PM IST
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आयुष्मान भारत
आयुष्मान भारत एक ऐसा कार्यक्रम है, जिसे गेम चेंजर कहा जा सकता है। मगर ऐसे समय जब मीडिया में राफेल विवाद छाया हुआ है, इसका सर्वाधिक असर आयुष्मान भारत पर पड़ेगा, प्रधानमंत्री ने जिसकी पिछले हफ्ते औपचारिक शुरुआत की है। इस कार्यक्रम से निश्चित रूप से भाजपा और नरेंद्र मोदी की छवि को निखारने में मदद मिलेगी।

 

वैसे भी मोदी नकारात्मक प्रचार से प्रभावित नहीं होते, क्योंकि वह देश के आम मतदाता से सीधा संवाद करते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने समाज के सबसे निचले तबके की मदद करने के मकसद से बहुत ही गंभीरता के साथ इस कार्यक्रम की शुरुआत की है। 


यह कुछ कुछ वैसा ही है, जिस तरह से यूपीए ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की शुरुआत की थी। मनरेगा डॉ मनमोहन सिंह की सरकार के लिए गेम चेंजर कार्यक्रम था, लेकिन यह लोकप्रिय सामाजिक योजना टू जी और राष्ट्रमंडल खेल घोटालों में डूब गई। 


इसी तरह से अटल बिहारी वाजपेयी ने एनडीए-एक के समय अपने कार्यकाल में काम के बदले अनाज (अंत्योदय) योजना शुरू की थी। इसी तरह से इंदिरा गांधी ने भी 'गरीबी हटाओ' का नारा दिया था। अतीत की इन योजनाओं से आयुष्मान भारत योजना अलग है। प्रधानमंत्री मोदी ने झारखंड की राजधानी रांची से प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना- आयुष्मान की शुरुआत की। 


दक्षिणी राज्य कई मामलों में आगे रहे हैं। वास्तव में आयुष्मान भारत को तमिलनाडु और अविभाजित आंध्र प्रदेश में शुरू की गई जन स्वास्थ्य योजनाओं की प्रतिलिपि कहा जा सकता है। हालांकि इन दोनों राज्यों की योजनाएं सीमित थीं। दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री एम करुणानिधि ने 2006 में सामाजिक बीमा योजना की शुरुआत की थी। उससे थोड़ा पहले आंध्र प्रदेश के दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री वाई एस राजशेखर रेड्डी ने ऐसी ही योजना शुरू की थी। इन दोनों ही राज्यों में ये योजनाएं गेम चेंजर साबित हुईं। 


आयुष्मान भारत के दायरे में पचास करोड़ लोग आएंगे और पांच लाख रुपये तक का इलाज करा सकेंगे। नरेंद्र मोदी ऐसे राजनेता हैं, जो अपने उत्पाद को लोगों तक पहुंचाना जानते हैं। मसलन, खादी को ही देखें तो, जबसे उन्होंने इसके बढ़ावा देने का जिम्मा उठाया, खादी ग्रामोद्योग की बिक्री कई गुना बढ़ गई। इसी तरह से रेडियो से प्रसारित होने वाला उनका कार्यक्रम मन की बात भारत के कोने कोने के गांवों तक पहुंच गया है। 


लिहाजा उनके प्रयास से आयुष्मान भारत भी थोड़ी-सी अवधि में दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंच जाएगा और लोग इसका लाभ उठा सकेंगे। और फिर मनरेगा और आयुष्मान भारत में एक बड़ा अंतर यह है कि इसमें भ्रष्टाचार की गुंजाइश नहीं है। वास्तव में आरोपों के चलते मनरेगा बदनाम हो गया। 


आयुष्मान भारत के महत्व को उस सर्वे से समझा जा सकता है, जिसमें शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा जैसे दो महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर खर्च करने वाले 195 देशों की सूची में अपने देश का स्थान 158वां स्थान था। भारत इस सूची में सूडान, अजरबेजान जैसे देशों के साथ ही चीन से भी नीचे है। 

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सिएटल स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ मैट्रिक्स ऐंड इवोल्यूशन ने यह सर्वे किया, जिसे द लैंसेट पत्रिका ने प्रकाशित किया। यह रिपोर्ट कहती है कि 1990 में भारत 162वें स्थान पर था, वहां से वह अब सुधार करते हुए 2016 में 158वें स्थान पर आ गया। इसका आकलन इस आधार पर किया गया कि कोई व्यक्ति अपने चरम उत्पादकता की स्थिति में कितने वर्षों तक काम कर सकता है। इसमें जीवन प्रत्याशा, स्वास्थ्य, स्कूल में व्यतीत किए वर्ष इत्यादि पर गौर किया गया। इस तरह के अंतरराष्ट्रीय अध्ययन आंखें खोलने वाले हैं। 


प्रधानमंत्री के रूप में मोदी तकरीबन पचास देश की यात्राएं कर चुके हैं, उनका सपना रहा है कि भारतीय स्वास्थ्य सेवा में सुधार होना चाहिए। इसके लिए उनकी सरकार ने भारी कवायद की है। वास्तव में राष्ट्रीय परिदृश्य में यह मोदी की अगुआई वाली भाजपा सरकार के लिए परीक्षण का अवसर भी है। लखनऊ में इसकी शुरुआत करते हुए गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यह गरीबों के लिए मोदी कवच साबित होगा।

वहीं केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि आयुष्मान भारत गरीबों और वंचितों के जीवन स्तर को ऊपर उठाएगा। आप इसे चाहे जिस नजरिये से भी देखें, साफ है कि भाजपा शासित राज्यों में आयुष्मान भारत पर खासा जोर दिया जाएगा। भले ही कांग्रेस शासित पंजाब या आप शासित दिल्ली या फिर नवीन पटनायक शासित ओडिशा इस पर गौर न करें। 


इस योजना का सबसे बड़ा मकसद आम लोगों की जेब से होने वाले अस्पताल के खर्च को कम करना और उन्हें गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवा प्रदान करना है। स्वास्थ्य सुविधा प्रदाता (ईएचसीपी) के वृहत नेटवर्क के जरिये सरकारी और निजी दोनों तरह के अस्पतालों में बिना किसी कागजी औपचारिकताओं और नकदी दिए बिना इलाज प्राप्त किया जा सकेगा।

इस योजना के लिए स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का नेटवर्क तैयार किया जा रहा है, जिन्हें प्रधानमंत्री आरोग्य मित्र कहा जाएगा। इसके लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसी और कौशल विकास मंत्रालय के बीच अगस्त महीने में एमओयू भी हो चुका है। इसके तहत आरोग्य मित्रों को प्रशिक्षित किया जाएगा। वास्तव में बीस राज्यों में इस तरह का प्रशिक्षण शुरू भी हो चुका है। 


प्रधानमंत्री मोदी ने लाल किले के प्राचीर से इस योजना की घोषणा की थी, जो अब जमीन पर उतर चुकी है। इस योजना के दायरे में 8,735 सरकारी और निजी अस्पतालों को सूचीबद्ध किया गया है। क्या राफेल सौदे पर राहुल गांधी के आरोपों की छाया में आयुष्मान भारत एक बड़ा सुधार कार्यक्रम साबित होगा, और इसका लाभ 2019 में भाजपा और नरेंद्र मोदी को मिलेगा यह आने वाला समय ही बताएगा।

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