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सलाह : सोने की चमक बरकरार रहेगी, समझदारी का सौदा है इसमें निवेश

नारायण कृष्णमूर्ति
Updated Sat, 03 May 2025 06:58 AM IST

सार

जब तक भारत में ब्याज दरें कम हैं और डॉलर रुपये की तुलना में मजबूत है, तब तक सोने की चमक बनी रहने की संभावना है। चूंकि भारत सरकार द्वारा मुद्रा का अवमूल्यन करने की संभावना नहीं है। डॉलर व रुपये के बीच का अंतर और बढ़ेगा, जिससे सोने की कीमत को बढ़ने में मदद मिलेगी, इसलिए सोने में निवेश समझदारी का सौदा है।
 
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सोने में निवेश फायदे का सौदा। - फोटो : ANI


विशेष रूप से ऐसे समय में, जब बैंकों में जमा राशि पर ब्याज दरें घट रही हैं, शेयर बाजार में रिटर्न अस्थिर है, रियल एस्टेट में निवेश अब कुछ खास लाभ नहीं दे रहा है, सोना आपके धन को बनाए रखने तथा उसके मूल्य में वृद्धि के लिए निवेश में प्रमुख भूमिका निभाता है। मौजूदा अस्थिरता के समय में 10 ग्राम सोने की कीमत लगभग एक लाख रुपये है और यह बचत या निवेश में अपना महत्व बनाए हुए है।


वर्ष 2015 से तुलना करें, तो आज 24 कैरेट सोने के 10 ग्राम की कीमत लगभग 98,852 रुपये है, जो 14 फीसदी वार्षिक रिटर्न के बराबर है। अब इसकी तुलना शेयर बाजार से करें, जिसने इसी अवधि में 11 फीसदी ब्याज दिया है, और फिक्स्ड डिपोजिट की दरें इस अवधि में सात फीसदी से कम रही हैं, जबकि मुद्रास्फीति लगभग छह फीसदी रही है। जाहिर है, इस अवधि के दौरान सोने की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। जब तक भारत में ब्याज दरें कम हैं तथा अमेरिकी डॉलर रुपये की तुलना में मजबूत है, तब तक सोने की चमक बरकरार रहने की संभावना है। चूंकि भारत सरकार द्वारा मुद्रा का अवमूल्यन करने की फिलहाल कोई संभावना नहीं है, इसलिए डॉलर और रुपये के बीच का अंतर और बढ़ेगा, जिससे सोने की कीमत को बढ़ने में मदद मिलेगी।


वित्तीय क्षेत्र में 72 का नियम यह बताता है कि पैसे को अपना मूल्य दोगुना करने में कितने साल लगते हैं। इसमें यह अनुमान लगाया जाता है कि एक निश्चित ब्याज दर पर किसी निवेश का मूल्य दोगुना होने में कितना समय लगेगा। यह 72 को वार्षिक रिटर्न दर से भाग देकर किया जाता है। इसलिए, अगर कोई छह साल में अपने निवेश को दोगुना करना चाहता है, तो निवेश पर 12 फीसदी (72/6=12) ब्याज मिलना चाहिए। अगर आप पिछले एक दशक में बैंक में रखे पैसे के मूल्य के बारे में गहराई से जानें, तो पाएंगे कि इसने अपना मूल्य भी बरकरार नहीं रखा है। हालांकि, शेयरों में निवेश ने अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन इसमें उतार-चढ़ाव के कारण जोखिम भी बहुत ज्यादा है, जिसे हर कोई नहीं झेल सकता। इसलिए आपकी कुल बचत और निवेश में सोने की भूमिका इतनी महत्वपूर्ण है कि इस पर हमेशा विचार करना चाहिए और सोने की खरीद या उसमें निवेश को अक्षय तृतीया या ऐसी ही महत्वपूर्ण तिथियों तक सीमित नहीं रखना चाहिए।


आज दस हजार रुपये प्रति ग्राम सोने के हिसाब से, सोने में पैसा लगाना महंगा लगता है। लेकिन ध्यान दीजिए कि आपने एक दशक पहले एक ग्राम सोने के लिए 2,500 रुपये चुकाए थे। इसे इस तरह से देखें कि पिछले एक दशक में आपका पैसा चार गुना बढ़ गया है। किसी अन्य निवेश की कीमत में इतनी वृद्धि नहीं हुई है। उदाहरण के लिए, आपके घर की कीमत चार गुना नहीं बढ़ी है, हो सकता है कि यह दोगुना भी न बढ़ी हो। इसके अलावा, एक दशक बाद टूट-फूट के कारण आपके घर की कीमत घटती है, यानी उसके मूल्य में ह्रास होता है। इसी प्रकार, एफडी में जमा धन अधिक से अधिक लगभग दोगुना हो जाएगा, लेकिन यह अब भी मुद्रास्फीति के बराबर ही रहेगा।


आपके पोर्टफोलियो में सोना हेजिंग (जोखिम प्रबंधन की रणनीति, जो किसी परिसंपत्ति के मूल्य में प्रतिकूल परिवर्तन के कारण होने वाले नुकसान को कम करने के लिए प्रयोग की जाती है) से कहीं बढ़कर भूमिका निभाता है। यह आपको विकास और मूल्य वृद्धि भी प्रदान कर सकता है, जैसा कि सोने की बढ़ती कीमतों से देखा जा सकता है। कई निवेशकों ने सोने में निवेश करने के लिए सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (एसजीबी) का रास्ता अपनाया, उन्हें कीमत में वृद्धि का बेहतर लाभ मिला। लेकिन इस योजना के बंद होने से उन निवेशकों को झटका लगा है, जिन्होंने इसकी सुरक्षा और संरक्षा के लिए इस पद्धति का इस्तेमाल किया था। इसका मतलब यह नहीं है कि म्यूचुअल फंड और ईटीएफ जैसे अन्य पेपर गोल्ड निवेश असुरक्षित हैं। बात सिर्फ इतनी है कि वे निवेश जोखिमों के लिए खुले हैं। यदि आपके पास केवल छोटी रकम है, तो आप समय के साथ संचय करने के लिए छोटे मूल्यवर्ग में सोना खरीदने पर विचार कर सकते हैं।


सोने के महत्व का एक अन्य संकेत यह है कि भारतीय रिजर्व बैंक ने हाल के वर्षों में अपने विदेशी मुद्रा भंडार के प्रतिशत के रूप में सोने की खरीद में वृद्धि की है, जो 10 फीसदी से अधिक है। यदि आप इस रणनीति से संकेत लेते हैं, तो आपके पोर्टफोलियो में आपकी बचत का 10 फीसदी या यहां तक कि 40 फीसदी तक सोना हो सकता है, जिससे आपको स्थिरता के साथ-साथ लगभग बिना किसी जोखिम के मूल्य में वृद्धि भी प्राप्त होगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आपके पैसे का मूल्य बरकरार रहेगा, क्योंकि यह मुद्रास्फीति को मात देने में कामयाब रहता है, जब आपके पोर्टफोलियो में सोने की होल्डिंग्स महत्वपूर्ण होती हैं।
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इसके अलावा, सोने के साथ तरलता हमेशा रियल एस्टेट की तुलना में बेहतर होती है। रियल एस्टेट को बेचना आसान नहीं है, जबकि सोने को आप कभी भी बेच सकते हैं। अगर आप निवेश करने के मामले में नए हैं, तो सोने में पैसा लगाने पर विचार करें, भले ही यह छोटी रकम ही क्यों न हो, और शुरुआत करें। अगर आपने पहले से ही सोने में निवेश किया है, तो निवेश जारी रखने पर विचार करें, क्योंकि इससे न केवल आपके पैसे के मूल्य में वृद्धि होगी, बल्कि यह समग्र पोर्टफोलियो रिटर्न में स्थिरता भी लाएगा। एक निवेशक के रूप में, आपको अपनी बचत और निवेश को विभिन्न साधनों में बांटना चाहिए, सोना निवेश का एक ऐसा अवसर है, जिसे आपको गंवाना नहीं चाहिए।    

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