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कोई बताए कि हम बताएं क्या

Thu, 28 May 2015 08:07 PM IST
प्रकाश पुरोहित
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सरकार के साथ यही दिक्कत है कि उसे रह-रहकर अपने काम बताने पड़ते हैं। प्रधानमंत्री ने कह दिया कि सांसद अपने चुनाव-क्षेत्र में सरकार के काम बताएं। अरे, चुनाव के बाद हमने अपना मुंह तक तो दिखाया नहीं है...काम क्या खाक बताएं! क्या बताएं इलाके की जनता को कि आदर्श गांव के चक्कर में सारी सांसद-निधि फुंक गई है और अब हम किसी गांव का हैंडपंप भी ठीक नहीं करवा सकते!
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पहले सदन स्थगित होता था, तो अपने इलाके में पहुंच जाते थे। अब यहां दिल्ली में अकेले बैठे झख मार रहे हैं कि अपने इलाके में किस फटी जेब के साथ जाएं। एक आदर्श-गांव के चक्कर में डेढ़ सौ अनादर्श गांव मुंह फुलाए बैठे हैं कि वोट तो हमने भी दिया था। फिर वहां ऐसा क्या मीठा था कि हमारे गांव को गोद लेने के बजाय दूसरे गांव की गोद में जाकर बैठ गए।

ऐसा नहीं कि हम काम नहीं करना चाहते। पूछा था कुछ सीनियर सांसदों से कि भैया, दो-चार काम हमें भी बता दो। वे कहने लगे कि हम भी यही ढूंढ रहे हैं। फिर यह कैसे बताएं कि सरकार ने एक साल में काम क्या किया है। एक सांसद ने कहा, जनता को जाकर कह देना हमारे प्रधानमंत्री बीस देशों की यात्रा कर आए! पर यह कहना हमें ही नहीं जंच रहा। बता भी दिया, तो कहेंगे-यह कोई काम है भला! सैर-सपाटा ही अगर काम है, तो हम क्या झख मार रहे हैं?
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तभी किसी ने आइडिया दिया कि पिछली सरकार के कुछ काम गिना दो, जनता को कहां याद रहता है। तब से इसी काम में लगा हूं। इससे भी बात नहीं बनी, तो प्रधानमंत्री के भाषण को ध्यान से पढ़ना शुरू किया है। उसमें से जो काम जेनुइन लगे, वह जनता को बता देंगे, क्योंकि प्रधानमंत्री की तो फेकू छवि है, पर इलाके में अब भी हमारी साख है। तो अब हम जा रहे हैं अपने चुनाव-क्षेत्र में सरकार के एक साल का ब्योरा लेकर। आटे में नमक बराबर झूठ तो हम बोल लेंगे, मगर नमक में आटे जितना झूठ हमारे बस की बात नहीं है!
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