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लंबे कद और भोले चेहरे वाला दबंग स्पिनर कुंबले

Fri, 24 Jun 2016 10:46 AM IST
रिज़वान/अमर उजाला, दिल्ली
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अनिल कुंबले ने अपने खेल करियर में कई उतार-चढ़ाव देखे और वो लंबे वक्त तक भारतीय गेंदबाजी के सिरमौर रहे - फोटो : Agency
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जंबो अब भारतीय क्रिकेट टीम के कोच होंगे। जंबों के नाम से भारतीय क्रिकेटरों और क्रिकेट प्रेमियों के बीच अनिल कुंबले के साथ भारतीय टीम के कोच के लिए कई नाम थे लेकिन चुने गए अनिल कुंबले। अनिल कुंबले ने अपने खेल करियर में कई उतार-चढ़ाव देखे और वो लंबे वक्त तक भारतीय गेंदबाजी के सिरमौर रहे। अनिल का करियर 18 साल (1990 से 2008) लंबा रहा। अनिल कुंबले का चुना जाना कुछ खास है।
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अनिल कुबंले और उनके चाहने वालों के लिएये वाकई फख्र करने वाली बात हो सकती है कि इस बार उनके पास ये जिम्मेदारी इसलिए नहीं आई क्योंकि कोई और नहीं था, बल्कि इस पद के लिए जोरदार टक्कर थी और वो बेहतर थे तो कोच बने। दरअसल ये कहने के पीछे एक वजह है। कुंबले को 2007 में राहुल द्रविड के कप्तानी छोड़ने के बाद कप्तान बनाया गया। इस पर कुंबले ने कहा था कि कोई कप्तानी की जिम्मेदारी लेने को तैयार ही ना था तो वो कप्तान बना दिए गए।

अब ऐसा नहीं है, कुंबले ने कई बड़े नामों को पछाड़ कर कोच का पद पाया है, ये इसलिए भी खास है कि कोचिंग के लिए अमूमन बल्लेबाजों को गेंदबाजों पर तरजीह दी जाती रही है। कई बड़े नामों की चर्चा थी जिनका अनुभव भी कुंबले से ज्यादा है लेकिन मौका मिला जंबों को। दरअसल जिन लोगों ने कुंबले को खेलता हुआ देखा है, उन्हें पता है कि कुंबले क्या चीज हैं। बिलाशुब्ह कुंबले एक बहुत बड़े खिलाड़ी हैं अपने समकालीन अजहर, सचिन, गांगुली और द्रविड की तरह लेकिन शायद वो इन बड़े नामों के बीच इतना नाम ना पा सके जितने के वो हकदार थे।
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मूंछे रखने वाला (लंबे समय तक कुंबले ने मूछें रखीं) और सज्जन सा दिखने वाले कुंबले ने इंजीनियरिग की पढ़ाई की है। वो मैदान के बाहर भी और अंदर भी किसी इंजीनियर सरीखे ही दिखते हैं, सीधे और भोले से। चेहरे से भोले दिखने वाले अनिल कुंबले बतौर गेंदबाज कितने 'दबंग' रहे हैं? उनके लगभग को दशकों के करियर में जिन्होंने उनके सामने बल्लेबाजी की है, वो सब बता देंगे। कई बार ऐसा हुआ जब विपक्षियों ने उनको तेज गेंदबाज कहा, वो बीच-बीच में अक्सर एक ऐसी तेज गेद फेंक देते थे जो मध्यम गति के गेंदबाज जैसी होती और जिसकी उम्मीद कोई बल्लेबाज स्पिनर से नहीं रखता। कुबंले कितने खतरनाक गेदबाज रहे हैं ये ना सिर्फ बल्लेबाज बल्कि उनकी बॉलिंग पर कीपिंग करने वाले किसी विकेटकीपर से भी पूछा जा सकता है। उनकी बॉल बल्लेबाज को तो छकाती ही थी कई बार कीपर को भी हतप्रभ कर देती थीं, कुंबले की गेंद अक्सर विकेटकीपर को चोट भी पहुंचा देती थी।

कुंबले ने दुनिया के हर हिस्से में बॉलिंग की और हर पिच पर विकेट लिए। टेस्ट में 619 और वनडे में 337, यानि के 1000 से बस थोड़ी ही दूर। ये आंकड़ा खुद कुंबले की कामयाबी की कहानी कह रहा है। कुंबले का एक ही पारी में सभी 10 खिलाडियों को आउट करने का रिकॉर्ड है। जिम लेकर के बाद अनिल अकेले ऐसे खिलाड़ी हैं, जिनके नाम पर ये रिकॉर्ड है। उन्होंने ये रिकॉर्ड किसी और के नहीं बल्कि पाकिस्तान के खिलाफ बनाया है। अनिल कुंबले ना सिर्फ खुद शानदार खिलाड़ी रहे हैं बल्कि उन्होंने कई खिलाड़ी भी भारत को देने में मदद की है। अनिल कुंबले के साथ गेदबाजी करने वाले हरभजन और उनके बाद के हरभजन में कोई भी फर्क देख सकता है, वो दूसरे एंड से अनिल का बनाया दबाव ही होता था, जिसने हरभजन को 'टर्बनेटर' बना दिया। अनिल कुंबले ना होते तो शायद हरभजन भी वो हरभजन ना होते जिनकी फिरकी पर दुनियाभर के बल्लेबाज घूमे।

इतने लंबे सफल करियर के बावजूद अनिल कुंबले के दिल में इस बात का मलाल रहा कि गेंदबाज होने के कारण वो हमेशा पीछे रहे और महफिल चौके-छक्के मारने बल्लेबाज लूट गए। इसका एक उदाहरण तब देखने को मिला जब द्रविड ने अपने यहां बेटा पैदा होने पर कुंबले को मैसेज किया कि 'कॉट द्रविड बोल्ड कुंबले' जारी रहेगा। इस पर कुंबले ने कहा कि नहीं, अब कॉट कुंबले बोल्ड द्रविड़।

अनिल के नाम के साथ लगा 'कुंबले' उनकी जाति नहीं बल्कि गांव का नाम है। केरल के इस गांव को जंबो ने ना सिर्फ मशहूर किया बल्कि कई बार जश्न का मौका भी दिया। एक बार फिर से उन पर बड़ी जिम्मेदारी है। अनिल कुंबले अब भारतीय टीम के नए कोच हैं, उम्मीद है उन्हें अब इस बात की भी तसल्ली होगी कि गेंदबाज होने के बावजूद उनको जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं हम सब को उम्मीद है कि स्वभाव से सज्जन और खेल से दबंग जंबो भारतीय टीम को नयी ऊंचाईयां देंगे। बेस्ट ऑफ लक जंबो।
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