मैं कभी सोचती भी नहीं थी कि इस आदिवासी इलाके में किसानों के बीच उनकी लीडर बनकर काम करूंगी। मैं इन किसानों को अतिरिक्त आमदनी के तरीके बता रही हूं। मैंने इससे पहले कभी मधुमक्खी पालन नहीं किया। यों तो मैं उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद की रहने वाली हूं। मैंने दिल्ली के श्रीराम कॉलेज ऑफ काॅमर्स से ग्रेजुएशन किया है। इसके बाद मैं बंगलूरू में ‘गोल्डमेन सेस एसेट मैनेजमेंट’ के लिए काम करने लगी।
साथ ही सप्ताह के अंत में बंगलूरू की एक संस्था ‘मैजिक बस फाउंडेशन’ के लिए वालंटियर के तौर पर काम करती थी। वहां मैं तकरीबन दो हजार बच्चों की मेंटरिंग का काम करती थी। उन बच्चों को खेल के जरिये लाइफ स्किल सिखाती थी। धीरे-धीरे मुझे समाज के लिए काम करने की प्रेरणा मिली। इसके बाद मैं आदिवासी किसानों के साथ काम करने के लिए ओडिशा में एक एनजीओ में शामिल हुई। मैंने किसानों के लिए काम करने का निर्णय लिया।