अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के बीच इसी महीने हुई बैठक के कुछ दिन बाद पेंटागन ने अमेरिकी संसद को पाकिस्तान को 12.5 करो़ड़ डॉलर मूल्य की सैन्य बिक्री को मंजूरी देने संबंधी अपने फैसले की जानकारी दी। अमेरिकी सरकार का दावा है कि यह सहायता 60 अमेरिकी कॉन्ट्रैक्टरों को वेतन दिए जाने के लिए विदेशी सैन्य बिक्री कार्यक्रम के तहत दी जा रही है और यह केवल एफ-16 विमान के उपयोग की निरंतर निगरानी के लिए है, जैसा कि अमेरिका और पाकिस्तान के बीच हुए समझौते के उद्देश्य के तहत वर्णित है।
कितनी अजीब बात है! सबसे पहली बात, पेंटागन अपने निरीक्षकों को अपने काम के लिए सीधे भुगतान क्यों नहीं करता है? और दूसरी बात, उस स्वीकारोक्ति के बारे में क्या कहना है, जिसमें अमेरिका ने कहा है कि यह तकनीकी और लॉजिस्टिक सेवा सहायता जारी रखने के पाकिस्तान के अनुरोध के जवाब में है?