कारोबार में सुगमता से संबंधित सूचकांक में 190 देशों की सूची में भारत ने तीस स्थान की छलांग लगाई है और अब वह सौवें नंबर पर है। विश्व बैंक ने भारत को इस साल सबसे ज्यादा सुधार करने वाले दुनिया के शीर्ष 10 देशों की सूची में भी शामिल किया है। यह बात भी महत्वपूर्ण है कि भारत इस सूची में शामिल होने वाला दक्षिण एशिया और ब्रिक्स समूह का इकलौता देश है।
विश्व बैंक के आसान कारोबार के 10 मापदंडों में से छह पर भारत की रैंकिंग में सुधार आया है। छोटे शेयरधारकों की सुरक्षा के मामले में भारत दुनिया भर में शीर्ष पांच देशों में शामिल है। इसी तरह आसानी से कर्ज प्राप्त करने और बिजली कनेक्शन मिलने के मामले में भारत दुनिया के 30 शीर्ष देशों में शामिल है। कहा गया है कि भारत में अब नया कारोबार शुरू करने में सिर्फ 30 दिन लगते हैं, जबकि 15 साल पहले 127 दिन लगते थे।
इस रिपोर्ट में विकासशील देशों को ग्लोबल स्तर पर खुदरा निवेश और 25 व्यापक आर्थिक व खुदरा क्षेत्र से जुड़े मसलों पर असर डालने वाले कारकों के आधार पर रैंकिंग दी गई है। भारत के शीर्ष पर पहुंचने की जो वजह बताई गई है, उनमें उसकी तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, आर्थिक सुधार, निवेश के नियमों में ढील, काला धन नियंत्रण के प्रयास और खपत में तेजी प्रमुख है। तेजी से बढ़ते शहरीकरण और मध्यवर्ग के लोगों की संख्या बढ़ने और आमदनी का स्तर ऊंचा होने से देश में खपत बढ़ रही है। इसी कारण भारत का रिटेल बाजार सालाना 20 फीसदी की दर से बढ़ रहा है। पिछले साल कुल बिक्री एक लाख करोड़ डॉलर यानी करीब 64.44 लाख करोड़ रुपये को पार कर गई। 2020 तक इसके दोगुना हो जाने की उम्मीद है।
निश्चित रूप से पिछले तीन वर्षों में देश कारोबार में सुधार के विभिन्न मापदंडों पर क्रमश: आगे बढ़ता गया है। सरकार आर्थिक सुधार, श्रम सुधार, बैंकिंग सुधार, कर सुधार और वित्तीय सुधार के रास्ते पर आगे बढ़ी है। वह राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने में भी सफल रही है। वैश्विक कारोबार मापदंडों के परिप्रेक्ष्य में अर्थव्यवस्था को काले धन से बचाना महत्वपूर्ण होता है। पिछले तीन वर्षों में सरकार ने काले धन के खिलाफ कई सार्थक कदम उठाए हैं। सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में काले धन पर विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया। सीधे लाभार्थी के खाते में सब्सिडी जमा कराने के मद्देनजर 28.5 करोड़ जन-धन खाते खोले गए। इससे काले धन में कमी आई है। देश की कारोबार रैंकिंग में ऊंचाई के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में वृद्धि भी महत्वपूर्ण कारक है। हाल ही में प्रकाशित अंकटाड की रिपोर्ट बताती है कि एफडीआई के मोर्चे पर भारत के प्रदर्शन में काफी प्रगति हुई है।
विश्व बैंक की नई कारोबार रिपोर्ट भले ही भारत के कारोबार में आसानी का परिदृश्य प्रस्तुत करते हुए दिखाई दे रही है, पर अभी कई कमियों और चुनौतियों पर ध्यान देना जरूरी है। जैसे, जीएसटी के क्रियान्वयन को सरल बनाने की जरूरत है। अर्थव्यवस्था में धीमापन है, सो रिजर्व बैंक के द्वारा ब्याज दरों में एक बड़ी आकर्षक कटौती की जानी जरूरी है, ताकि कारोबार, निवेश और देश की विकास दर में सुधार हो सके। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष एवं उद्योग संगठनों का कहना है कि यदि भारत कारोबार सरलता के लिए जीएसटी के साथ विकास से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में सुधारों को आगे बढ़ाएगा, तो आगामी दो वर्षों में उसकी विकास दर आठ फीसदी तक पहुंच सकती है।