अब तक मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए 18 से 28 साल की उम्र की महिलाएं ही जा सकती थीं। लेकिन 2023 में मिस यूनिवर्स संस्था ने घोषणा की कि अब इस प्रतियोगिता में अठारह साल से लेकर किसी भी उम्र की महिलाएं भाग ले सकेंगी। जब रोड्रिग्स से पूछा गया कि आखिर वह अपनी जीत का कारण क्या मानती हैं, तो उन्होंने कहा कि शायद निर्णायकों को मेरा आत्मविश्वास पसंद आया और मैं अपनी पीढ़ी की महिलाओं का प्रतिनिधित्व कर रही थी। उन्होंने कहा कि वह मिस यूनिवर्स क्राउन पाने की जी-तोड़ कोशिश करेंगी। यह पूछने पर कि 60 की उम्र में भी वह इतनी युवा कैसे दिखती हैं, उन्होंने कहा कि उनकी स्वस्थ जीवन शैली इसके लिए जिम्मेदार है।
दिलचस्प बात यह है कि सारा का सारा सौंदर्य उद्योग महिलाओं को यही सिखाता रहा है कि कैसे वे युवा और सुंदर दिखें? इसके लिए वे क्या-क्या करें? इसी के लिए वे अपने उत्पाद बाजार में उतारते हैं। इन सौंदर्य के मानकों को महिलाओं के आत्मविश्वास और उनकी सफलता से जोड़ दिया गया है। आज पूरी दुनिया की महिलाएं सौंदर्य उद्योग की गिरफ्त में हैं। वे चाहकर भी इससे नहीं निकल सकतीं, क्योंकि हर स्त्री आत्मविश्वासी दिखना चाहती है। और आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए क्या करना चाहिए, इसे सौंदर्य उत्पाद कंपनियों की मार्केटिंग रणनीति के जरिये उन्हें पल-पल बताया जाता है। औरतों को हमेशा सुंदर ही दिखना चाहिए, चाहे वे घूंघट में हों या बिकिनी में, चाहे युवा हों या बूढ़ी। इस सोच में कोई बदलाव नहीं आया है, आज भी नहीं, जिसे औरतों का युग कहा जा रहा है।
सौंदर्य उद्योग ने स्त्री विमर्श के सारे नारों को अपने-अपने उत्पादों को बेचने के लिए हड़प लिया है। फलां क्रीम लगाइए और सुंदर दिखिए तथा आत्मविश्वास बढ़ाइए। फलां कार चलाइए और अपने अंदर की ताकत को महसूस कीजिए कि कोई भी स्त्री कुछ भी कर सकती है। सौंदर्य प्रतियोगिता आयोजित करने वालों ने भी अपनी रणनीतियों में बदलाव किया है। अब मोटी स्त्रियों के लिए भी ऐसी प्रतियोगिताएं हो रही हैं। शादीशुदा औरतों और उम्र दराज औरतों के लिए भी अब ऐसे रास्ते खोल दिए गए हैं। इसका कारण यह है कि सौंदर्य उत्पादक कंपनियों को लगता है कि सिर्फ 18 से लेकर 28 साल तक की उम्र की औरतों का सेगमेंट बनाए रखना कम फायदे का सौदा है। फायदा तो तब होगा, जब किसी उत्पाद को हर उम्र की औरतें इस्तेमाल करें। इसलिए हर उम्र की औरतों को बताना जरूरी है कि तुम किसी से कम नहीं हो। तुम भी सुंदर और युवा दिख सकती हो। थोड़ी कोशिश तो करो-एज इज जस्ट ए नंबर (उम्र तो बस एक संख्या है)। बस जेब में पैसे होने चाहिए, तो देखो, क्या नहीं कर सकती हो!
वास्तव में देखें, तो औरतों को सिर्फ उनकी चमकती और मुलायम त्वचा में तब्दील कर दिया गया है। किसी को भी बुद्धिमती स्त्री नहीं चाहिए। सवाल पूछने वाली तो हरगिज नहीं! बस वही चाहिए, जो बता सके कि अमुक लोशन इस्तेमाल करते ही उसकी सारी झुर्रियां गायब हो गईं और वह अपनी बेटी जैसी दिखने लगी। कई साल पहले ब्रिटेन की एक महिला ने प्लास्टिक सर्जरी के जरिये अपनी शक्ल और त्वचा को बिल्कुल अपनी बेटी जैसा करवा लिया था। कुछ साल पहले दिल्ली के सौंदर्य विशेषज्ञों की रिपोर्ट में बताया गया था कि आम फेशियल और पेडीक्योर, मेनीक्योर की बात तो छोड़िए, पचहत्तर और अस्सी साल की महिलाएं भी अपने हाथों की झुर्रियां निकलवाने आती हैं।
कायदे से तो स्त्री विमर्श के इस युग में श्रमशील स्त्रियों की बात होनी चाहिए थी कि वे पूरी जिंदगी किन-किन चुनौतियों से जूझती हैं। मगर अफसोस वैसी स्त्रियां हमें कहीं दिखाई नहीं देतीं। वे अक्सर किसी खबर का हिस्सा नहीं बनतीं। बनती हैं तो तब, जब किसी हादसे का शिकार हो जाती हैं। स्त्रियों का नया नारा सिर्फ और सिर्फ सुंदर दिखना बना दिया गया है।