फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स

मुंहतोड़ जवाब के बाद

कपिल काक Published by: Raman Singh Updated Thu, 28 Feb 2019 07:45 PM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
हवाई हमला

भारत और पाकिस्तान के बीच इन दिनों जो हालात हैं, वे बताते हैं कि रिश्ते कितने खराब हो चुके हैं। हमने देखा है कि 26/11 के बाद दोनों मुल्कों के बीच कोई बातचीत नहीं हुई है। हां, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सार्क देशों के सभी प्रमुखों को अपने शपथ ग्रहण समारोह में आमंत्रित करके रिश्ते बेहतर बनाने की कोशिश जरूर की थी। लेकिन बातचीत की शुरुआत से पहले पाकिस्तान हुर्रियत के नेताओं के साथ बातचीत करना चाहता था, जिसके चलते भारत ने वार्ता बंद कर दी। उसके बाद पठानकोट एवं उड़ी में आतंकवादी हमला हुआ, जिसके जवाब में भारत ने सर्जिकल स्ट्राइक की। उसके बाद से लगातार दोनों मुल्कों के बीच तनाव लगातार बढ़ता ही जा रहा है। जैसी कि आशंका थी, विगत 14 फरवरी को पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर आतंकवादी हमला हुआ, जिसमें चालीस जवान शहीद हो गए। इससे देश भर में व्यापक आक्रोश फैला और भारत को इसका मुंहतोड़ जवाब देना ही था, इसमें कोई शक नहीं था।



मीडिया में और आम चर्चा में यह बहस चल ही रही थी कि भारत इसका किस तरह से प्रतिकार करेगा, क्या इसका कोई कूटनीतिक जवाब दिया जाएगा या अर्थव्यवस्था के पहलू से चोट पहुंचाई जाएगी या कोई सैन्य कार्रवाई होगी? और भारत ने पुलवामा बम धमाके को अंजाम देने वाले जैश-ए मोहम्मद के बालाकोट स्थित बड़े आतंकी ठिकाने पर वायुसेना के विमानों से हमला बोलकर इसका बदला लिया। भारत ने काफी सफलतापूर्वक आतंकी ठिकाने को तबाह कर दिया। भारतीय वायुसेना ने एक तरह से चमत्कार कर दिया, क्योंकि ऐसे हमले बहुत जोखिम भरे होते हैं, उसमें एक-दूसरे से तालमेल और संपर्क बनाए रखना होता है, लोडिंग करनी होती है, किन मार्गों के लक्ष्य पर निशाना साधा जाएगा, इन सब चीजों का ख्याल रखना पड़ता है।


पाठकों को यह जानकर हैरानी होगी कि बालाकोट में सैन्य कार्रवाई करने वाले विमानों ने ग्वालियर से उड़ान भरी थी, और उत्तरी कश्मीर के केरन से उन्होंने पाकिस्तान में घुसकर दक्षतापूर्वक लक्ष्य पर निशाना साधा। पुलवामा के जवाब में जो सैनिक कार्रवाई हुई, वह सही मायनों में अभूतपूर्व है। हालांकि हमारे विदेश सचिव ने कहा कि हमें यह खबर मिली कि भारत में फिदायीन हमला करने के लिए बालाकोट में आतंकियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है, इसलिए हमें एहतियात के तौर पर गैर-सैनिक कार्रवाई करनी पड़ी। यह कोई सैन्य कार्रवाई नहीं थी, बल्कि आतंकवाद-विरोधी कार्रवाई थी। हालांकि उसमें वायुसेना के ही विमान का इस्तेमाल किया गया था।


इसका असर यह हुआ कि एक तो केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टी को इससे बड़ी राहत मिली और घरेलू राजनीति में उसे बढ़त हासिल हो गई। दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एक संदेश चला गया कि अगर भारत पर आतंकी हमला हुआ, तो भारत चुप नहीं बैठेगा और उसका मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। इसके लिए हम कौन-सा विकल्प चुनेंगे, इसका फैसला भी हम स्वयं करेंगे। तीसरी बात यह हुई कि पिछले पंद्रह-बीस वर्षों से आतंकवादी हमलों के बावजूद हमने कोई सैन्य कार्रवाई नहीं की थी, जिससे लगता था कि भारत बेबस है। लेकिन सच यह है कि भारत एक बड़ा और जिम्मेदार देश है, जो परमाणु हथियारों के खतरे से दूर रहना चाहता था। इसलिए संयम बरतते हुए कूटनीतिक रास्ते अपना रहा था। लेकिन अब पाकिस्तान को स्पष्ट संकेत भेजा जा रहा है कि अगर आप आतंकवादी हमला करेंगे, तो उसका मुंहतोड़ जवाब मिलेगा।


जिस दिन बालाकोट में भारत ने सैन्य कार्रवाई की, तभी से लग रहा था कि पाकिस्तान भी कोई न कोई प्रतिक्रिया करेगा, क्योंकि वहां के शासक को भी अपनी जनता को संतुष्ट करना है। बुधवार को हमने देखा कि पाकिस्तान के दस विमान नियंत्रण रेखा की तरफ आ रहे थे, और उनका लक्ष्य था नौशेरा में ब्रिगेड मुख्यालय और उसके साथ की बटालियन। लेकिन हमारी वायुसेना के विमान उसी क्षेत्र में निगरानी कर रहे थे, जिसे कॉम्बेट एयर पेट्रोल कहा जाता है। खबरंे हैं कि हमारे मिग-21 ने पाकिस्तान के एक एफ-16 को मार गिराया। यह भी समझने वाली बात है कि भारत और पाकिस्तान के विमानों के बीच यह डॉगफाइट 1971 के बाद पहली बार हुई है। अफसोस की बात है कि उस डॉगफाइट में हमें एक मिग-21 विमान का नुकसान सहना पड़ा और हमारा एक पायलट पाकिस्तान के कब्जे में है। जिनेवा कन्वेंशन के तहत अब यह पाकिस्तान की जिम्मेदारी है कि वह हमारे पायलट को सुरक्षित लौटाए। इससे पहले भी कारगिल युद्ध के दौरान फ्लाइट लेफ्टिनेंट नचिकेता पाकिस्तान के कब्जे में थे, जिन्हें बाद में पाकिस्तान ने भारत के हवाले किया था। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने घोषणा की है कि शुक्रवार को पायलट अभिनंदन वर्तमान को छोड़ दिया जाएगा। यह हमारी बड़ी जीत है और शांति की दिशा में बढ़ने के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है।


जहां तक आगे की बात है, तो हमें यह ध्यान में रखना होगा कि पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देने का हमारा मकसद पूरा हो गया है। मीडिया में कहा जा रहा है कि पाकिस्तान हमारे सैन्य ठिकानों पर हमला करने वाला था, जिसे हमने रोका। पर उसके बाद हमने देखा है कि न तो पाकिस्तान की तरफ से कोई भड़काऊ कार्रवाई हुई और न ही हमारी तरफ से। ऐसा लगता है कि यह एक सीमित युद्ध है, जो स्लो मोशन में है। हम इस वक्त तनाव और सीमित युद्ध के बीच में हैं। दोनों देशों पर अंतरराष्ट्रीय दबाव है कि इसे और न तूल दिया जाए। नहीं भूलना चाहिए कि यह सब कुछ परमाणु हथियारों के काले बादल के नीचे हो रहा है। इसलिए हमें संयम बरतते हुए सोच-समझकर कदम आगे बढ़ाना है। मेरी राय है कि भारत को एक जिम्मेदार राष्ट्र होने के नाते इस तनाव को कम करने की कोशिश करनी चाहिए। पाकिस्तान तो कह ही रहा है कि दोनों मुल्कों को बातचीत करनी चाहिए। बातचीत कब करनी है, कैसे करनी है, यह सरकार को सोचना है, लेकिन इस तनाव को आहिस्ता-आहिस्ता कम करना चाहिए और पुलवामा से पहले की स्थिति बहाल करनी चाहिए। हां, पाकिस्तान पर दबाव जरूर बनाना चाहिए कि वह आतंकवाद को खत्म करे। आज के जमाने में युद्ध के बजाय हमें अपने आर्थिक एवं सामाजिक विकास पर ध्यान देना चाहिए।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next