साधो, जापान के वैज्ञानिकों ने कृत्रिम जीभ तैयार कर ली है। सामान्य जीभ से स्वाद को पहचानने में हमसे चूक हो जाती है, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक जीभ अपना काम अधिक सतर्कता से करेगी। फिर भी वैज्ञानिकों से हमने कुछ महत्वपूर्ण सवाल जानने का प्रयास किया, जो इस प्रकार हैं- क्या इलेक्ट्रॉनिक जीभ के प्रत्यारोपण के बाद 'टंग स्लिप’ की समस्या बरकरार रहेगी?
हमारे देश में जीभ के फिसलने की समस्या अत्यंत विकराल है। संसद और मंचों पर अक्सर राजनेताओं की जुबानें फिसलती रहती हैं। इलेक्ट्रॉनिक जीभ से इसका समाधान संभव है अथवा नहीं। क्या कृत्रिम जीभ के जरिये विवादास्पद बयान दिए जा सकते हैं? कहीं ऐसा तो नहीं कि कृत्रिम जीभ से हम बहुत संभल कर ‘रामजादे’ शब्द का उच्चारण करें और मीडिया को वह ‘हरामजादे’ सुनाई पड़े। संसद और सड़क पर गाली-गलौज के समय इस जीभ की गति और स्थिति क्या होगी? क्या कृत्रिम जीभ लगवाने के बाद हमें सामाजिक तौर पर यह घोषणा करनी पड़ेगी कि हम जो कुछ कह रहे हैं, वह हमारी मौलिक जीभ नहीं, बल्कि इलेक्ट्रानिक जीभ से निकला-बोला गया है? क्या सांसदों या विधानसभा सदस्यों को इलेक्ट्रॉनिक जीभ लगवाकर शपथ लेने की सुविधा होगी? इलेक्ट्रॉनिक जीभ से उच्चारित किए गए कथनों से हम अवसरानुसार मुकर सकते हैं अथवा नहीं।
अदालतों का इस जीभ को लेकर क्या रुख होगा, यह जानना अभी बाकी है। इलेक्ट्रॉनिक जीभ लगवाकर बयान देने से पहले क्या यह शपथपत्र देना होगा कि हमारे सच या झूठ की जिम्मेदारी कृत्रिम जीभ की होगी, हमारी नहीं।
इलेक्ट्रॉनिक जीभ से कितना सच और झूठ बोला जा सकता है? क्या कृत्रिम जीभ से किसी सुस्वादु व्यंजन या दूसरी आकर्षक चीज देखकर पहले की तरह ही लार टपका करेगी? यह जीभ कहीं अधिक चटोरी हुई, तो डाइबिटीज के मरीज मुश्किल में आ सकते हैं। अपने अनुसंधानों से वैज्ञानिकों को यह भी प्रयत्न करना चाहिए कि अधिक बोलने वाले नेताओं को यह जीभ कहीं मंझधार में ही धोखा न दे बैठे।