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चुनाव की बिसात पर पहली चाल जीती है आप ने

Tue, 25 Mar 2014 06:38 PM IST
तवलीन सिंह
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वाह भाई केजरीवाल साहिब, आपके भी क्या कहने! ऊपर से तो आपका व्यवहार संत-महात्मा की तरह है, और अंदर से आप एक अति चतुर राजनीतिज्ञ हैं, जो कुछ भी कहने को तैयार हैं अपने राजनीतिक फायदे के लिए। मैं तो आम आदमी पार्टी के आलोचकों में गिनी जाती हूं। मुझे भी मानना पड़ेगा कि एक नए राजनीतिक दल के नाते बहुत ही होशियारी से राजनीतिक लाभ लिया आप ने पिछले सप्ताह, बड़ी चतुराई से बेवकूफ बनाया भाजपा कार्यकर्ताओं को। बिल्कुल वैसे, जैसे केजरीवाल साहिब ने दिल्ली में सरकार बनवाई थी सिर्फ सही वक्त पर गिराने के लिए। वह गुजरात के दौरे पर गए थे एक मकसद से-नरेंद्र मोदी को नीचा दिखाने के लिए। साथ लेकर गए टीवी पत्रकारों की एक टोली को। इनका काम था, कदम-कदम पर तस्वीरें दिखाना केजरीवाल साहिब की इस यात्रा की। वहां एक देहाती अस्पताल में पहुंचकर कहा आप के इस महान नेता ने कि अस्पताल में न डॉक्टर थे, न मरीज। यह नहीं स्पष्ट किया उन्होंने कि ऐसा हाल हर सरकारी अस्पताल का है देश भर में।
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अगली बार जब केजरीवाल साहिब कैमरे से मुखातिब हुए, तो कहा कि वह किसानों से मिले थे, जिन्होंने उन्हें बताया कि वे बहुत दुखी हैं मोदी की सरकार से। आगे उन्होंने यह भी बताया कि कुछ आम लोगों से बात हुई थी उनकी, जिन्होंने बताया कि गुजरात में भ्रष्टाचार है, घोटाले ही घोटाले हैं। टीवी पत्रकारों ने उनसे एक बार भी यह नहीं पूछा कि अगर इतना बुरा हाल है गुजरात का, तो मोदी तीसरी बार मुख्यमंत्री बने कैसे।

आगे सुनिए। केजरीवाल साहिब के मुंह से हमने सुना कि वह गिरफ्तार किए गए, पर इस गिरफ्तारी की तस्वीर नहीं दिखाई गई। उन्होंने कहा कि उनकी गाड़ी पर हमला किया गया, पर इस हमले की तस्वीरें भी नहीं पेश की गईं। तस्वीरें हमने टीवी पर देखीं हिंसक आप कार्यकर्ताओं की, जो गुस्सा प्रकट करने दिल्ली, और उत्तर प्रदेश के कई शहरों में पहुंचे भाजपा कार्यालयों पर। हिंसा दोनों तरफ से हुई, पर लगता है, मेरे पत्रकार दोस्त केजरीवाल पर इतने फिदा हैं कि कई चैनलों ने साबित करने की कोशिश की कि हिंसा सिर्फ भाजपा कार्यकर्ताओं की तरफ से हुई।
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ये सारी चीजें अगर नरेंद्र मोदी की मर्जी से हुईं, तो जाहिर है कि मोदी को प्रधानमंत्री बनने का कोई अधिकार नहीं है। कैसे संभाल पाएंगे इतना बड़ा देश, अगर एक नवजात राजनीतिक दल को नहीं संभाल सके हैं? ऐसा कहते हुए यह भी मानना होगा कि केजरीवाल साहिब ने चाल बड़ी अच्छी चली। समस्या आप की सिर्फ यह है कि नरेंद्र मोदी को निशाना बनाकर केजरीवाल साहिब ने शंका पैदा कर दी है कि वह वास्तव में कांग्रेस की बी टीम के प्रधान हैं। जब से दिल्ली जीती आप ने, तभी से वरिष्ठ कांग्रेसियों ने कहना शुरू कर दिया था कि उनको दिल्ली हारने की तकलीफ इसलिए नहीं है, क्योंकि आप मोदी को रोकने का वह काम कर सकती है, जो कांग्रेस नहीं कर पाई। ऊपर से यह भी सच है कि हाल में किए गए चुनाव सर्वेक्षणों के मुताबिक, कांग्रेस पीछे है 2014 के चुनावी दौड़ में और भाजपा आगे। सर्वेक्षण यह भी बताते हैं कि मतदाता मोदी को प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं, तो क्यों न उनको अभी से बदनाम किया जाए? इस मकसद से केजरीवाल कई दिनों से कहते आ रहे हैं कि मोदी, कांग्रेस की तरह, अंबानी-अडानी की जेब में हैं।

बिना सुबूत के इल्जाम लगाना केजरीवाल साहिब की पुरानी आदत है, पर अब साफ होता जा रहा है कि ऐसा करना उनकी रणनीति का हिस्सा है। हो न हो, यह तो मानना पड़ेगा कि चुनाव की बिसात पर पहली चाल जीती है आप ने। भाजपा इतनी बुरी तरह हारी है कि अभी अगर कोई ठोस रणनीति नहीं बनाती है, तो आप उसका खासा नुकसान कर सकती है।
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