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ए वाइल्ड शीप चेज - हारूकी मुराकामी

Sat, 10 Jan 2015 09:16 PM IST
ओम गुप्ता
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उसकी जिंदगी एक ऐसा बुरा सपना था, जो रह-रहकर उसे सताता था। उसका जीवन ठीक वैसे ही दौड़ रहा था जैसे एक रेलगाड़ी बिना मंजिल के बस दौड़े जा रही हो। अक्सर एक साधारण जीवन भी असाधारण मोड़ ले लेता है, जब जिंदगी में एक लड़की प्रवेश करती है। जिसके कान विलक्षण हैं और आकर्षण ऐसा कि आवरण हटे, तो हर कोई देखकर दंग रह जाए। इस परिदृश्य में एक भगौड़ा दोस्त, एक दक्षिणपंथी राजनीतिज्ञ, एक बौराया प्रोफेसर और एक निराश हताश पागल पात्र, कहानी को आगे बढ़ाते हैं। भानुमति का यह कुनबा जापान के एक पहाड़ी गांव में भेड़ों को पालने वालों के बीच पहुंचता है। इन पात्रों पर जापान के जाने-माने उपन्यासकार हारूकी मुराकामी ने एक दिलचस्प कथानक रचा है। जिसका नाम है 'ए वाइल्ड शीप चेज'।
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इस किताब को विटेंज बुक्स द्वारा प्रकाशित किया गया है। यह किताब एक अलग ही शैली और कहानी बयां करती है। इस किताब की सबसे अच्छी बात है कि पाठक जब इसे पढ़ता है, तो पढ़ता ही चला जाता है। उसे कहानी के बीच में कोई ओर-छोर नहीं मिलता। पाठक को ठीक वैसा ही लगता है, जैसे कथा किसी कथावाचक के मुख से कही गई हो। धीरे-धीरे उसके अपने जीवन से रहस्य खुलने लगते हैं। परत-दर परत। लगता है जैसे हमें किसी नई तरह की दुनिया के दर्शन हो रहे हैं। उसके साथ-साथ हमारे कान लगातार आहट सुनते हैं और अचानक से औंधे मुंह गिर पड़ते हैं। परम्परागत किस्सागोई की तर्ज पर यह एक रोमांचक किस्सा है। जिसमें एक तलाश है, एक रहस्य है, एक गैर मामूली औरत है और एक गुदगुदाने वाला तनाव है। किताब की खास बात यह है की कहानी से परदा धीरे-धीरे उठता है। किताब की शुरुआत किसी जासूसी उपन्यास का आभास देती है, लेकिन अचानक एक कॉमेडी में बदल जाती है। अंत आते-आते कहानी एक कलात्मक रचना की शक्ल अख्तियार कर लेती है।

लेखक हारूकी मुराकामी जापान के मशहूर शहर क्योतो में 1949 में पैदा हुए और बाद में टोकियो में रहने लगे। उन्होंने कई उपन्यास, कहानियां और विवेचनात्मक लेख लिखे हैं। उनकी रचना 'काफका ऑन द शोर' काफी प्रसिद्ध है। हारूकी की गिनती जेम ए कोरतजी, मिलान कुदेरा और वी.एस नायपॉल जैसे मशहूर लेखकों में होती है। उनकी फिसलती लेखनी की एक बानगी देखिए-
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उस दिन सुबह के अखबार में एक खबर छपी थी। एक दोस्त ने फोन पर उसे पढ़कर सुनाया। कुछ खास नहीं था उसमें। मानो किसी नौसिखिए रिपोर्टर ने अपनी पहली खबर लिखी हो।
डेटलाइन- सड़क का कोना, ट्रक चलाता ड्राइवर। एक पैदल आदमी। एक हादसा, पुलिस ने कहा बेध्यानी में हुई दुर्घटना। इसे लघुपत्रिका में कविता के पन्ने पर भेजा जा सकता था।
'दाह संस्कार कब है, मैंने पूछा?'
'तुम समझ गए, उसने कहा।'
क्या उसका कोई घर-बाहर था?
हां भाई खानदानी लड़की थी।
'मैंने पुलिस को फोन किया।'
उसका पता-ठिकाना पूछा। फोन नंबर भी। फिर फोन पर पूछा- संस्कार कब होगा?
लड़की का घर टोकियो के एक मोहल्ले में था। मैंने शहर का नक्शा उठाया और लाल स्याही से इलाके पर निशान लगा दिया। वहां बस-मेट्रो सब जाती थीं। गलियां, नालियां सब थी वहां। मैं संस्कार में पहुंचा। रेल में बैठकर। नक्शे से कोई मदद नहीं मिली। मैं पता पूछता-पूछता सिगरेट पर सिगरेट फूंकता रहा। घर लकड़ी का था। बाहर जाली लगी थी। सीलन भरा। बारिश का पानी ठहरा हुआ। पता चला लड़की सिर्फ 26 साल की थी।
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