ब्रिटिश मीडिया की नजर में प्रधानमंत्री पद हेतु अंतिम पसंद एलेक्जेंडर बोरिस जॉनसन थे। गत सप्ताह वह यह पद पा भी गए। तीन दशकों से श्रमजीवी पत्रकार रहे जॉनसन को उनके संपादकजन मानते रहे कि वे तथ्यों का आदतन निरादर करते हैं। सार्वजानिक उक्तियों तथा वक्तव्यों को विकृत करते हैं। उनकी कलम पर राग-द्वेष छाए रहते हैं। गांभीर्य तथा कौतुक को वह पर्यायवाची बना डालते हैं। इन्हीं कारणों से विभिन्न पत्रिका प्रबंधनों ने उन्हें तीन बार बर्खास्त किया था। फिर भी यह आदमी स्तंभकार, संवाददाता और संपादक के रूप में ऐसा सिक्का था, जो मीडिया व्यवसाय में बार-बार लौट आता था।
जॉनसन की मीडिया-धर्मिता भी उनके वंश की भांति विविधता से भरपूर है। तुर्की नस्ल के अल्बानी पत्रकार अली कमाल उनके परदादा थे। उनकी रगों में, उन्हीं के शब्दों में, यहूदी, जर्मन और फ्रेंच रक्त प्रवहित होता है। अमेरिका में जन्मे थे, लिहाजा वहीं के बाशिंदे बने। बाद में ब्रिटिश नागरिक बने। वह जन्मजात कट्टर रोमन कैथोलिक थे। उसे परिवर्तित कर उन्होंने चर्च ऑफ इंग्लैंड के उदार धर्म को अपनाया। उनके माता-पिता को एक रूसी मूल का प्रवासी व्यक्ति बोरिस मिला, तो उसी का नाम अपने इस ज्येष्ठ पुत्र को दे दिया।